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Amar Ujala Batras: शहर दमघोंटू, मैदान गायब; AQI का खतरा, जिम्मेदार कौन? देखें पॉडकास्ट
Sat, 22 Nov 2025 08:13 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 22 Nov 2025 08:13 PM IST
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अमर उजाला बतरस।
- फोटो : AU
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अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई उत्तर भारत के अधिकतर शहरों में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता की और इसकी वजह से बच्चों की सेहत पर पड़ने वाले असर की। दरअसल, जैसे-जैसे हवा में प्रदूषक बढ़ते जा रहे हैं, वैसे ही डॉक्टरों ने लोगों को बाहर निकलने पर चेतावनी जारी की हैं। इतना ही नहीं बड़े शहरों खासकर मेट्रो शहरों में तो खेलने के लिए मैदानों की भी भारी कमी है। ऐसे में बच्चों की सेहत के लिए यह मौसम दोहरी परेशानी लेकर आया है। एंकर और पत्रकार नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में इन्हीं समस्याओं को लेकर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना की आखिर इस स्थित की वजह क्या है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
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नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें आर्किटेक्ट हरीश त्रिपाठी और पर्यावरण कार्यकर्ता और अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ शामिल रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- आंगन बरामदे में बदल चुके हैं, ये किस तरह के बदलाव का परिचायक है? बिल्डर्स ने सारे नियम कानून मानना बंद कर दिया, कैसे रोके? प्राइवेट बिल्डर्स किन मानकों पर अथॉरिटी के सामने प्लान रखते हैं? सरकारी नियमों को इमारतों के निर्माण क्यों ध्यान नहीं रखा जा रहा? ग्रीन ब्लेट के नियम और मानक क्या बिल्डर्स मान रहे हैं?
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि मौजूदा समय में यह भी बताया कि एक्यूआई का बढ़ जाना, पानी की दिक्कत कौन जिम्मेदार है। नियमों को न मानने पर बिल्डर्स पर किस तरह की कार्रवाई होती है। हाई राइज इमारतों को लेकर क्या लोगों की मानसिकता बदली है। अथॉरिटी को क्या कदम उठाने चाहिए कि अब इमारते नियम के अनुसार बनें। हरियाली को बचाते हुए इमारतें बनाने के लिए उपभोक्ता किन बातों का ध्यान रखें।
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि मौजूदा समय में यह भी बताया कि एक्यूआई का बढ़ जाना, पानी की दिक्कत कौन जिम्मेदार है। नियमों को न मानने पर बिल्डर्स पर किस तरह की कार्रवाई होती है। हाई राइज इमारतों को लेकर क्या लोगों की मानसिकता बदली है। अथॉरिटी को क्या कदम उठाने चाहिए कि अब इमारते नियम के अनुसार बनें। हरियाली को बचाते हुए इमारतें बनाने के लिए उपभोक्ता किन बातों का ध्यान रखें।