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वीना जॉर्ज पर कथित हमले का मामला: कन्नूर कोर्ट ने पांच केएसयू कार्यकर्ताओं की जमानत खारिज की

Tue, 03 Mar 2026 06:18 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Tue, 03 Mar 2026 06:18 PM IST
सार

कन्नूर कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज पर कथित हमले मामले में पांच केएसयू कार्यकर्ताओं की जमानत खारिज की। अभियोजन ने साजिश और जांच लंबित होने का हवाला दिया।

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Alleged attack on Veena George Kannur court denies bail to five KSU activists
Veena George - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केरल के कन्नूर की एक अदालत ने राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज की कथित हत्या की कोशिश के मामले में गिरफ्तार पांच केएसयू कार्यकर्ताओं की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कन्नूर ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

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बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि 25 फरवरी को कन्नूर रेलवे स्टेशन पर हुई घटना महज एक ‘ब्लैक फ्लैग’ प्रदर्शन थी और इसे हत्या की कोशिश नहीं माना जा सकता। वकीलों ने कहा कि घटना में किसी हथियार की बरामदगी नहीं हुई है और पुलिस यह स्पष्ट करने में विफल रही है कि कथित हमले में किसी वस्तु का इस्तेमाल हुआ भी था या नहीं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मंत्री शुरू में बयान देने की स्थिति में नहीं थीं, लेकिन बाद में उन्होंने टेलीविजन चैनलों से बातचीत की।

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वहीं, अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की हिरासत की मांग करते हुए कहा कि मामले में और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जानी है तथा घटना में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका है। अभियोजन ने दलील दी कि संभव है किसी छोटे हथियार का इस्तेमाल किया गया हो और मंत्री की गर्दन पर दबाव डाला गया हो। अदालत ने अभियोजन की दलीलों को स्वीकार करते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपियों को अब 5 मार्च को दोबारा पेश किया जाएगा।

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घटना के बाद मंत्री को पहले कन्नूर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से उन्हें परियाराम कन्नूर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। एक दिन इलाज के बाद उन्होंने मेडिकल सलाह के खिलाफ अस्पताल से छुट्टी ली और सरकारी वाहन से लगभग 350 किलोमीटर की यात्रा कर पठानमथिट्टा जिले स्थित अपने घर पहुंचीं।

इस बीच, 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मंत्री को सर्वाइकल कॉलर पहने देखे जाने का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जबकि कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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