बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

संविधान से बड़ा नहीं पर्सनल लॉ, तीन तलाक थोपना गलत: HC

ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Wed, 10 May 2017 03:54 AM IST
विज्ञापन
 Allahabad HC rules triple talaq against Constitution, imposing three divorce wrong
- फोटो : InShorts
ख़बर सुनें
तीन तलाक और फतवे पर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पर्सनल लॉ के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि फतवों का कोई कानूनी आधार नहीं है इसलिए इन्हें जबरन थोपा नहीं जा सकता। अदालत ने साफ किया कि कोई भी पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नहीं है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि तीन तलाक के नाम पर संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत हासिल मूल अधिकारों का उल्लंघन नहीं हो सकता। पर्सनल लॉ के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ तीन तलाक की इजाजत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि जिस समाज में महिलाओं की इज्जत नहीं होती उसे सिविलाइज्ड नहीं कहा जा सकता। 


कोर्ट ने कहा कि लिंग के आधार पर मूल और मानवाधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। मुस्लिम पति ऐसे तरीके से तलाक नहीं दे सकता, जिससे समानता और जीवन के मूल अधिकारों का उल्लंघन होता हो। कोई भी पर्सनल लॉ संविधान के दायरे में ही लागू हो सकता है। 

अदालत ने फतवे पर फैसला देते हुए कहा कि फतवे को कानूनी शक्ति हासिल नहीं है। इसलिए इसे जबरन थोपा नहीं जा सकता। अगर इसे कोई लागू करता है तो वह अवैध है। फतवे का कोई वैधानिक आधार नहीं है।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

तीन तलाक मूल अधिकारों का हनन

विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us