फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   All You Need To Know About Bengaluru Architect Nadaprabhu Kempegowda

Karnataka: बेंगलुरु की नींव रखने वाले नादप्रभु केंपेगौड़ा कौन, मूर्ति पर क्यों सवाल उठा रही कांग्रेस?

Fri, 11 Nov 2022 03:03 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 11 Nov 2022 03:03 PM IST
सार

साल 1537 में केंपेगौड़ा ने बेंगलुरु शहर को आधुनिक बनाने की कोशिश की और कई झीलों एवं अन्य जल निकायों के निर्माण  भी करवाया। केंपेगौड़ा धर्मशास्त्र, साहित्य, व्याकरण, दर्शन और हथियारों के इस्तेमाल के विशेषज्ञ थे।

विज्ञापन
All You Need To Know About Bengaluru Architect Nadaprabhu Kempegowda
नादप्रभु केंपेगौड़ा - फोटो : Social Media

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नादप्रभु केंपेगौड़ा की 108 फीट की प्रतिमा का अनावरण किया। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार, किसी शहर के संस्थापक की यह पहली और सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा है। इसे समृद्धि की मूर्ति कहा जाता है और बंगलूरू के विकास की दिशा में शहर के संस्थापक केम्पेगौड़ा के योगदान को याद रखने के लिए बनाया गया है। आइए जानते हैं आखिर कौन थे नादप्रभु केंपेगौड़ा? कैसे डाली बेंगलुरु शहर की नींव?

विज्ञापन


जानें कौन थे केंपेगौड़ा?
नादप्रभु हिरिया केंपेगौड़ा, जिसे केंपेगौड़ा के नाम से भी जाना जाता है, को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का संस्थापक माना जाता है। केंपेगौड़ा विजयनगर साम्राज्य के अधीन एक सरदार थे और उन्हें 1537 में इस क्षेत्र को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है, जो आधुनिक बेंगलुरु बन गया। केंपेगौड़ा अपने समय के सबसे सुशिक्षित और सफल शासकों में से एक थे। मोरसु गौड़ा वंश के वंशजों के उत्तराधिकारी होने के नाते येलहंकानाडु प्रभु के रूप में शुरू हुआ।
विज्ञापन


बेंगलुरु के संस्थापक के साथ-साथ समाज सुधारक भी थे केंपेगौड़ा
1537 में केंपेगौड़ा ने बेंगलुरु शहर को आधुनिक बनाने की कोशिश की और कई झीलों एवं अन्य जल निकायों के निर्माण  भी करवाया। केंपेगौड़ा धर्मशास्त्र, साहित्य, व्याकरण, दर्शन और हथियारों के इस्तेमाल के विशेषज्ञ थे। वह एक समाज सुधारक भी थे। केंपेगौड़ा ने मोरासु वोक्कालिगास के एक अनिवार्य रिवाज "बंदी देवारू" के दौरान अविवाहित महिलाओं के बाएं हाथ की अंतिम दो उंगलियों को काटने की प्रथा को प्रतिबंधित किया था। 56 वर्षों तक शहर पर शासन करने वाले केम्पेगौड़ा की मृत्यु 1569 में हुई, लेकिन उनकी विरासत और बेंगलुरु पर प्रभाव बना रहा। आज भी, बेंगलुरु के कुछ सबसे प्रसिद्ध स्थलों का नाम उनके नाम पर रखा गया है, जिनमें केंपेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और केंपेगौड़ा बस स्टेशन शामिल हैं, जिसे पहले मैजेस्टिक कहा जाता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


कांग्रेस ने केंपेगौड़ा की मूर्ति पर उठाए सवाल
केंपेगौड़ा की प्रतिमा का अनावरण होने से पहले ही कांग्रेस पार्टी ने इसपर सवाल उठाने शुरु कर दिए। कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि केंपेगौड़ा की मूर्ति बनाने के लिए सरकारी पैसों का इस्तेमाल आखिर क्यों किया गया? केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बनाने का जिम्मा बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (BIAL)के पास है। ऐसे में बीआइएएल को ही केम्पेगोड़ा की प्रतिमा का खर्च वहन करना चाहिए था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed