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'मुस्लिम' शब्द हटाने की सलाह पर बोला AMU- हम हमेशा से सेक्यूलर, यह मामला कोर्ट में है

Mon, 09 Oct 2017 02:52 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Mon, 09 Oct 2017 02:52 PM IST
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Aligarh muslim university PRO says AMU always secular minority character pending supreme court
AMU

यूजीसी पैनल ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के नामों से हिंदू-मुस्लिम शब्द हटाने को कहा है। इसपर बात करते हुए AMU के जनसंपर्क अधिकारी ने कहा है कि यूनिवर्सिटी हमेशा से सेक्यूलर है। 

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इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, अधिकारी मोहम्मद असीम सिद्दिकी ने कहा कि नाम में मुस्लिम होना यह नहीं दिखाता कि उनकी यूनिवर्सिटी धर्म विशेष के लिए है। 
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सिद्दिकी ने कहा कि यूनिवर्सिटी में धर्म नहीं मेरिट देखकर दाखिला दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक मामले से जुड़ा केस पहले से कोर्ट में है इसलिए वह ज्यादा बात नहीं कर सकते।
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पढ़ें: UGC ने कहा- AMU और BHU यूनिवर्सिटी के नाम से हटाएं हिंदू-मुस्लिम शब्द

अपने पक्ष में AMU आर्टिकल 30(1) की बात करता रहा है जिसके तहत सभी धर्मों और अल्पसंख्यक लोगों को अपने लिए शैक्षिक संस्थान खोलने की छूट है। इसमें स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी सब शामिल हैं।

वहीं केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफिडेविट्स में कहा गया है कि AMU और जामिया मीलिया इस्लामिया अल्पसंख्यक संस्थान नहीं हैं। एएमयू के मामले में दाखिल एफिडेविट में कहा गया है कि इसको मुसलमानों ने नहीं बल्कि संसद ने बनवाया था।

अल्पसंख्यक केस क्या है?

Aligarh muslim university PRO says AMU always secular minority character pending supreme court
यूजीसी

1981 में संसद ने AMU संशोधित अधिनियम पास किया था जिसमें यह मान लिया गया था कि AMU मुस्लिमों द्वारा बनाया गया, फिर 2005 में इलाहबाद हाईकोर्ट ने 1981 के फैसले को संविधान के दायरे से बाहर बताते हुए फैसला दिया कि AMU अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी नहीं है। 

इसपर AMU ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की जिसके बाद इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी गई। इसके बाद एनडीए की सरकार आई और 11 जनवरी 2016 को उन्होंने पहले की सरकार की बात को पलटते हुए कहा कि AMU अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी नहीं है। यही मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

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