मुस्लिम देशों को साधने की पाक की मुहिम पर पानी फेरने में जुटा भारत
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अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर मुद्दे को तूल देने के क्रम में पाकिस्तान की मुसलिम देशों को साधने की मुहिम से सतर्क भारत ने जवाबी कूटनीति शुरू कर दी है। इस क्रम में दोनों विदेश राज्य मंत्रियों को मुस्लिम देशों में जवाबी मुहिम चलाने का जिम्मा दिया गया है।
इसके साथ ही सरकार ने इन देशों में कार्यरत अपने दूतावासों और उच्चायोगों को सतर्क कर दिया है। भारतीय कामगारों की समस्या सुलझाने के क्रम में सऊदी अरब की कई यात्रा कर चुके विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह वहां इस मुहिम पर भी काम कर रहे हैं, जबकि दूसरे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर इस समय इराक के दौरे पर हैं।
जरूरत पड़ने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज खुद कुछ चुनिंदा मुसलिम देशों की यात्रा कर सकती हैं। गौरतलब है कि कश्मीर मामले में मुसलिम देशों को एकजुट करने की मुहिम में जुटे पाकिस्तान को इन देशों के सबसे बड़े संगठन आर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कारपोरेशन (ओआईसी) का साथ मिला है। 56 देशों के इस संगठन ने पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते हुए कश्मीर में जनमत सर्वेक्षण की मांग की है।
पीएम भी मुहिम से खुद को जोड़ सकते हैं
सरकारी सूत्रों ने कहा कि पहले भी पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर तनातनी बढ़ने की स्थिति में मुसलिम देशों को भारत के खिलाफ एकजुट करने की कूटनीतिक चाल चल चुका है। भारत को पता था कि पीओके और बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का मामला उठाने पर पाकिस्तान यही रणनीति अपनाएगा।
यही कारण है कि पीओके-बलूचिस्तान की स्थिति पर चिंता जताने के साथ ही सरकार ने मुसलिम देशों में कार्यरत दूतावासों और उच्चायोगों को पाक की रणनीति को धराशाई करने के लिए जवाबी कूटनीतिक उपाय करने का निर्देश दे दिया था।
इसके अलावा फौरी तौर पर अकबर और सिंह को मुसलिम देशों से संपर्क साधने की मुहिम से जोड़ा गया। उक्त सूत्र के मुताबिक ओआईसी के अलावा पाकिस्तान को अपनी मुहिम में बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है। अगर जरूरत पड़ी तो विदेश मंत्री के साथ प्रधानमंत्री भी मुसलिम देशों से संपर्क साधने की मुहिम में खुद को जोड़ेंगे।
पीओके- बलूचिस्तान मुद्दे पर घेरने की रणनीति
सरकार ने पाकिस्तान पर जवाबी हमला बोलने के लिए बलूचिस्तान और पीओके में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं को विश्व मंच पर उठाने की रणनीति बनाई है।
इस क्रम में इन क्षेत्रों के नेता जिस देश में रह रहे हैं, उन्हीं देशों में पाकिस्तान के जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी और भारत सार्वजनिक रूप से इनका समर्थन करेगा।
इस क्रम में अक्टूबर महीने में इन क्षेत्रों के नेताओं को भारत लाए जाने की भी योजना है।