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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   AK Sharma, close to PM Modi, said - it is shameful to take permission from China for Kailash mansarovar Yatra, permit will not be needed in future

राजनीति: पीएम के करीबी एके शर्मा बोले- कैलाश यात्रा के लिए चीन से अनुमति लेना शर्मनाक, भविष्य में नहीं होगी परमिट की जरूरत

Wed, 11 Aug 2021 04:04 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 11 Aug 2021 04:04 PM IST
सार

भारत-चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी एके शर्मा के इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए चीन से अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। क्या केंद्र किसी बड़ी तैयारी में है?

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AK Sharma, close to PM Modi, said - it is shameful to take permission from China for Kailash mansarovar Yatra, permit will not be needed in future
एमएलसी एके शर्मा। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी नौकरशाह रहे एके शर्मा ने कहा है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए चीन से अनुमति लेना देश के लोगों के लिए शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि बहुत संभव है कि निकट भविष्य में देश के करोड़ों शिवभक्तों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए चीन से परमिट लेने की जरूरत न पड़े। उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष बन चुके एके शर्मा के इस बयान को तिब्बत के मुद्दे पर केंद्र सरकार के संभावित बड़े कदम के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। शर्मा ने यह बयान मंगलवार को कानपुर में आयोजित भारत-तिब्बत समन्वय संघ के एक कार्यक्रम के दौरान दिया।

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भाजपा नेता एके शर्मा का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत-चीन के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देश आपसी बातचीत के जरिए इसे सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों ही देशों ने माना है कि आपसी बातचीत के जरिए इस मुद्दे का हल निकाल लिया जायेगा। इस बीच पूर्व उच्च नौकरशाह शर्मा के बयान को बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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हालांकि, इस तनाव के बीच चीन तिब्बत में लगातार अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है। वह वहां पर बड़ा बाजार और अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट विकसित कर अपनी दखल बढ़ा रहा है। चीनी राष्ट्रपति ने हाल ही में तिब्बत की यात्रा कर एक बड़ा संकेत देने की कोशिश भी की थी।
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इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा को पहली बार उनके जन्मदिन पर बधाई देकर एक नई पहल भी की। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों में इसे एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। तिब्बत मुद्दे पर भारत को अमेरिकी समर्थन हासिल होने की बात भी कही जा रही है।

क्या बन सकता है करतारपुर की तरह गलियारा

सिख धर्म के लोगों के लिए पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में स्थित करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन का विशेष महत्त्व है। पहले इसके दर्शन के लिए पकिस्तान सरकार से वीजा-परमिट लेकर जाना पड़ता था, या भारत की सीमा से दूरबीन के जरिए सिख धर्मावलंबी इस पवित्र गुरुद्वारे का दर्शन किया करते थे। लेकिन भारत-पाकिस्तान सरकार के बीच सहमति बनने के बाद अब एक विशेष गलियारा बना दिया गया है, जिसके जरिए सिख धर्मानुयायी सीधे गुरुद्वारे के दर्शन कर पाते हैं। इसे केंद्र सरकार की बड़ी जीत के तौर पर देखा गया था।  अब इस बात पर चर्चा होने लगी है कि क्या करतारपुर गलियारे की तरह कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए भी कोई गलियारा विकसित किया जा सकता है?

दरअसल, विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस तरह चीन के आक्रामक रुख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बन रहा है, आज के समय में वह बहुत दिनों तक अलग-थलग नहीं रह सकता। चीन को भी अपनी छवि सुधार की आवश्यकता पड़ेगी और ऐसे समय में वह इस तरह के गलियारे पर विचार कर एक बड़ा संकेत देने की कोशिश कर सकता है। यह अभी दूर की कौड़ी लग रही है, लेकिन इस मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह बहुत मुश्किल नहीं है।

पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय जरूरत  

इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी आंच आई है। कोरोना काल में हुई अव्यवस्था और अन्य मामलों के कारण मोदी की छवि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रभावित हुई है। कथित तौर पर केंद्र सरकार इसके लिए भी विशेष प्रयास कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री की छवि बेहतर करने की कोशिश कर रही है। संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय मंच से दुनिया को संबोधित करना इसी उद्देश्य को पूरा करने में सहायक साबित हुआ है।

जानकारों का मानना है कि अगर प्रधानमंत्री चीन के साथ कैलाश मानसरोवर तक की यात्रा के लिए कोई गलियारा विकसित कराने में सफल हो जाते हैं तो यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। यह देश के अंदर ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी छवि को एक अंतरराष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करने में बड़ी मदद कर सकता है। इस प्रकार कैलाश मानसरोवर का दांव चीन और भारत दोनों के ही हित साधने में सहायक साबित हो सकता है।   

भारत-तिब्बत समन्वय संघ के केंद्रीय संयोजक हेमेन्द्र सिंह तोमर ने अमर उजाला से कहा कि देश के करोड़ों शिवभक्तों की इच्छा होती है कि वे अपने जीवन में कम से कम एक बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा करें। लेकिन इसमें चीन से अनुमति लेने का अड़ंगा हर साल लाखों लोगों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने से रोक देता है। बेहद सीमित मात्रा में ही लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा को पहुंच पाते हैं। लेकिन अगर इसमें चीन से अनुमति लेने की समस्या ख़त्म हो जाए, तो इससे भारी संख्या में शिवभक्त अपने ईष्टदेव का दर्शन करने मानसरोवर तक पहुंच सकेंगे।

हेमेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज की वर्तमान केंद्र सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं। वह अनुच्छेद 370 के विवादित अंशों को हटाने जैसा मुश्किल काम भी कर रही है और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चिन को भी अपनी प्राथमिकता बता रही है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि एक दिन भारत-चीन के बीच ऐसा समझौता हो जाएगा, जिससे देशवासियों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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