फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Ajit singh to make big front with smalls'

बड़े दलों से टूटी आस, अब अजीत को छोटे दलों का सहारा

Mon, 10 Oct 2016 02:08 AM IST
शादाब रिज़वी/ अमर उजाला, दिल्ली
शादाब रिज़वी/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 10 Oct 2016 02:08 AM IST
विज्ञापन
Ajit singh to make big front with smalls'
चौधरी अजित सिंह - फोटो : amar ujala

मुजफ्फरनगर दंगे के बाद राजनीतिक ताकत खो चुके राष्ट्रीय लोकदल यूपी विधानसभा चुनाव में अस्तित्व बरकार रखने की जुस्तजू में जुटा है। कमोबेश सभी बड़े दलों से सियासी दोस्ती की कोशिश परवान नहीं चढ़ने के बाद अजित सिंह ने छोटे दलों  को विश्वास में लेकर एकमंच पर लाने की पहल की है।

विज्ञापन


दंगे के दंश की वजह से 2014 के लोकसभा चुनाव में रालोद मुखिया अजित सिंह और उनके पुत्र जयंत चौधरी को भी जीत नसीब नहीं हो सकी थी। तभी से पिता-पुत्र अपने पुराने जातीय समीकरण जाट, मुस्लिम, किसान, कामगार को साधने में जुटे जरूर हैं, लेकिन वे जानते हैं  कि विधानससभा चुनाव में अपने बल पर खोई ताकत हासिल करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा। इसलिए छोटे चौधरी ने बड़ें दलों से गठबंधन की कोशिश की थी।
विज्ञापन


रालोद की दोस्ती सपा से होने की बात बढ़ी लेकिन अटक गई। अब सपा में ही खींचातन के चलते रालोद और सपा की दोस्ती होने के आसार कम ही है। बसपा के साथ चर्चा चली तो तब भी और रविवार को लखनऊ रैली में  भी मायावती ने साफ कर दिया कि यूपी ही नहीं उत्तराखंड और पंजाब में भी किसी से गठबंधन नहीं करेंगे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

छोटे दलों के संग चुनाव में उतरेंगे अजीत

Ajit singh to make big front with smalls'
चौधरी अजित सिंह - फोटो : amar ujala

भाजपा से रालोद की दोस्ती की बात राजनीतिक गलियारों में आई तो अजित सिंह के सजातीय भाजपा नेताओं ने विरोध कर डाला और आरएसएस तक यह मुद्दा ले गए। हालांकि रालोद भाजपा से गठबंधनन की बात बढ़ाने से इनकार करता रहा है।

कांग्रेस भी लगातार अकेला चलों की बात कर गठबंधन से दूर रहने की बात कर रही है।  पहले दौर में जेडीयू के नीतीश कुमार से दोस्ती की बात चली तो रालोद के एक राष्ट्रीय महामंत्री की वजह से अटक गई। अब अजित सिंह ने छोटे दलों को एकमंच पर लाकर अलग मोर्चा बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया।

बागपत में हाल ही में एक बार फिर नीतीश कुमार, शरद यादव और बसपा से अलग हुए पूर्व मंत्री आरके चौधरी को ले जाना इसी पहल का हिस्सा था। खुद अजित सिंह का कहना है कि छोटे दलों को एक मंच पर लाकर विधानसभा चुनाव में  उतरना वक्त की जरूरत है। दरअसल, छोटे चौधरी का प्लान पीस पार्टी और हाल में बने  इत्तेहाद फ्रंट में शामिल पार्टियों  समेत अन्य
छोटे मुस्लिम दलों को भी जोड़ने का है।  

अजित सिंह की पूरी कोशिश है कि सारे दल सीएम के तौर पर उनके बेटे जयंत चौधरी के चेहरे को पेश करने के लिए राजी हो जाए। खुद अजित सिंह  ने बेटे जयंत चौधरी  का नाम रालोद के सीएम फेस के तौर पर ऐलान भी कर दिया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed