विशाखापट्टनम गैस लीक को नियंत्रित करने के लिए वायुसेना ने 8.3 टन रसायन की ढुलाई की
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भारतीय वायुसेना ने सोमवार को गुजरात से 8.3 टन रसायन की हवाई मार्ग से ढुलाई की, जो पिछले हफ्ते विशाखापट्टनम में एलजी पॉलीमर्स संयंत्र के भंडारण टैंक से लीक हुई गैस की विषाक्तता को कम कर सकता है। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने दी है।
सात मई की सुबह प्लास्टिक निर्माण इकाई से लीक हुई गैस के कारण 12 लोगों की मौत हो गई और 400 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि गुजरात के मुंद्रा से आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम तक करीब 1.1 टन बुटाइलकैटकोल रसायन की ढुलाई करने और 7.2 टन पॉलीमेराइजेशन इन्हीबीटर्स एवं ग्रीन रिटार्डर्स को ले जाने के लिए के लिए भारतीय वायुसेना के दो एएन-32 परिवहन विमानों का इस्तेमाल किया गया।
वायुसेना ने भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के निदेशक को दिल्ली से और एक स्टिरीन विशेषज्ञ को मुंबई से विशाखापत्तनम तक पहुंचाया ताकि वे गैस लीक को नियंत्रण में करने के अभियान की देखरेख कर सकें।
इस बीच विशाखापट्टनम के जिलाधिकारी वी. विनय चांद ने कहा कि एलजी पॉलीमर्स से करीब 13 हजार टन स्टाइरिन दक्षिण कोरिया के सियोल में कंपनी के मुख्यालय तक जहाज से भेजा जा रहा है।पॉलीमर्स के संयंत्र से गैस रिसाव के कुछ दिन बाद वहां से करीब 13,000 टन तरल स्टिरीन रसायन को कंपनी के दक्षिण कोरिया में सियोल स्थित उसके मुख्यालय वापस भेजा जा रहा है।
कंपनी ने विशाखापट्टनम बंदरगाह पर भी दो टैंक में यह रसायन रखा था जो सिंगापुर से आयात किया गया था। आंध्र प्रदेश सरकार ने केंद्रीय पोत परिवहन मंत्रालय से बात करके इस रसायन को वापस कंपनी के मुख्यालय सियोल भेजने के लिए एक विशेष टैंकर जहाज का प्रबंध किया है। विशाखापट्टनम के जिला कलेक्टर वी. विनय चंद ने कहा कि हम 8000 टन स्टिरीन का कंटेनर सोमवार को भेज रहे हैं। बाकी बचे 5000 टन को अगले कुछ दिनों में रवाना कर देंगे।
संयंत्र में बचे स्टिरीन को वापस ठोस अवस्था में बदल दिया गया है। इस रसायन का इस्तेमाल पॉलीएस्टर बनाने में होता है। सात मई को तड़के संयंत्र से गैस का रिसाव हुआ। इससे 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि 400 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। शनिवार को वेंकटपुरम और आसपास के गांव के लोगों ने संयंत्र के समक्ष मृतकों के शव के साथ प्रदर्शन किया और संयंत्र को पूरी तरह बंद करने की मांग रखी।
इसके बाद संयंत्र को पूरी तरह बंद कर दिया गया। सोमवार को इलाके में स्थिति नियंत्रण रही। मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के जरिए स्थिति की समीक्षा की। साथ ही मंत्रियों से प्रभावित प्रत्येक गांव में रात बिताने के लिए कहा ताकि लोगों के बीच विश्वास बहाली की जा सके। वहीं दूसरी तरफ मंत्री बोत्सा सत्यनारायण और के. कन्ना बाबू ने मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की।