फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   AIKSCC said over government claims, these laws will grab farmers land and the MSP will continueFarmers Protest:

Farmers Protest: आंदोलन को बदनाम और तोड़ने की कोशिश कर रही है केंद्र सरकार, 20 दिसंबर को मनाएंगे किसान शहीदी दिवस

Wed, 16 Dec 2020 06:44 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 16 Dec 2020 06:44 PM IST
सार

एआईकेएससीसी के अनुसार, दूध के उत्पादन को सहकारी सरकारी समितियों ने बढ़ावा दिया था, लेकिन बाद में निजी कंपनियों ने उसे तबाह कर दिया...

विज्ञापन
AIKSCC said over government claims, these laws will grab farmers land and the MSP will continueFarmers Protest:
Farmers Protest - फोटो : PTI

विस्तार

किसान आंदोलन का मामला भले ही सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, लेकिन केंद्र सरकार अब इस मुद्दे को लेकर फ्रंटफुट पर खेल रही है। चारों तरफ से आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास हो रहा है। केंद्र सरकार को लग रहा है कि किसान अब वापस लौट जाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। किसान, आज भी केंद्र सरकार को कांटे की टक्कर दे रहे हैं।

विज्ञापन


एआईकेएससीसी के मुताबिक, जब तक सरकार तीनों कृषि कानून व बिजली बिल वापस लेने की घोषणा नहीं करती, दिल्ली का आंदोलन जारी रहेगा। सत्ता के नशे में डूबी केंद्र सरकार के सामने 20 दिसंबर को किसान शहीदी दिवस मनाया जाएगा। इसमें 30 शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके लिए विभिन्न राज्यों के किसान दिल्ली पहुंचना शुरू हो गए हैं। एआईकेएससीसी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुझाई समिति का लाभ, कानून वापसी के बाद ही होगा। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय का सुझाव किसानों की नैतिक जीत है।
विज्ञापन



केंद्र सरकार पिछले एक सप्ताह से फ्रंटफुट पर आ गई है। जब हरियाणा के कुछ लोगों को किसान का मुखौटा पहनाकर कृषि मंत्री के समक्ष बैठाया गया, तभी से केंद्र सरकार को यह लगने लगा कि लड़ाई तो अब जीती जा चुकी है। इसके बाद दूसरे राज्यों से भी किसानों को बरगला कर कृषि मंत्री के सामने पेश कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से कुछ ऐसे किसान नेता मिलने गए, जिनका कहीं कोई आधार नहीं था। एआईकेएससीसी के पदाधिकारी हन्नान मौला बताते हैं, सरकार ने अपनी तरफ से आंदोलन को तोड़ने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। कहीं भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे। किसान को पराजित करने के लिए सरकार ने तमाम मोर्चे खोल दिए हैं।

मंत्रियों की बयानबाजी और किसान संगठनों के नेताओं को अप्रत्यक्ष धमकियां, ये सब पिछले कई दिनों से चल रहा है। सरकार को लग रहा है कि किसानों ने उसकी तौहीन कर दी है। वे पूछते हैं, किसान किसी की तौहीन कैसे कर सकता है। वह तो अपनी जिंदगी की लड़ाई लड़ रहा है।

एआईकेएससीसी के अनुसार, प्रधानमंत्री देश से झूठ कह रहे हैं कि इन कानूनों से किसानों की जमीन नहीं छिनेगी और एमएसपी जारी रहेगा। क्या वे यह सब नहीं जानते कि दूध के उत्पादन को सहकारी सरकारी समितियों ने बढ़ावा दिया था, लेकिन बाद में निजी कंपनियों ने उसे तबाह कर दिया।

किसान हमेशा ही अपनी राय रखने के लिए तैयार रहे हैं। इससे पहले बातचीत के कितने दौर हुए हैं, उन सभी में किसान शामिल हुए हैं। सरकार अपनी बात पर अड़ी रही तो किसानों ने कहा कि अब ऐसे माहौल में बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। जब केंद्र सरकार तीनों कानूनों को रद्द करने का मसौदा तैयार कर ले तो ही बैठक के लिए बुलावा भेजे।

वे कहते हैं, किसी भी कमेटी का बनना तब उपयोगी होगा, जब उससे पहले तीनों कानून वापस लिए जाएं। इतना ही नहीं, उस कमेटी में राष्ट्रीय व क्षेत्रीय किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को प्रभावी रूप में शामिल किए जाए। इन कानूनों के जरिए मोदी सरकार किसानों को नहीं, बल्कि विदेशी कंपनियों और कॉरपोरेट सेक्टर को लाभ पहुंचा रही है।

एआईकेएससीसी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, सरकार इस आंदोलन को तोड़ने के प्रयास करना छोड़ दे। आईआरसीटीसी डाटा का दुरुपयोग कर केवल सिखों के ई-मेल निकालकर मोदी के लिए सहानुभूति अर्जित करने वाले पत्र भेजे जा रहे हैं। इससे निंदनीय बात और क्या हो सकती है। सभी किसान संगठन, सरकार के इस कदम की कठोर निंदा करते हैं। यह काम, किसान आंदोलन को धर्म के आधार पर बांटने के लिए किया जा रहा है।


बतौर, अविक साहा, इससे किसान बंटने वाले नहीं हैं। जब तीन सप्ताह में केंद्र सरकार ने इस आंदोलन को तोड़ने के लिए अपने सारे संसाधन लगा दिए, तब ये नहीं टूटा। दो-चार किसान नेताओं को अगर सरकार अपने पक्ष में कर लेती है तो भी आंदोलन कमजोर नहीं होगा। तीनों कानून वापस होने तक यह चलता रहेगा। वहीं अगर सरकार की तरफ से ठोस पहल वाला बातचीत का कोई प्रस्ताव आता है तो किसान पीछे नहीं हटेंगे। सरकार से पहले की तरह बातचीत होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed