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AIDS Control: US राजदूत गार्सेटी ने भारत की जमकर तारीफ की; कहा- राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम वैश्विक मॉडल
Fri, 01 Dec 2023 11:18 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 01 Dec 2023 11:18 PM IST
सार
भारत के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम को अमेरिकी राजदूत ने वैश्विक मॉडल बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार को एचआईवी एड्स से निपटने के लिए भारत के प्रयासों का समर्थन करने पर गर्व है।
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अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी (फाइल)
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने नगालैंड दौरे पर भारत सरकार की योजना की जमकर सराहना की। उन्होंने विश्व एड्स दिवस कार्यक्रम में कहा, "भारत के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम को एक वैश्विक मॉडल के रूप में सराहा गया है और अमेरिकी सरकार को इन प्रयासों में भागीदारी और समर्थन करने पर गर्व है।" नगालैंड राज्य सरकार के अधिकारियों के अलावा सामुदायिक नेता और नागरिक समाज के नेताओं ने भी विश्व एड्स दिवस पर कार्यक्रम में भाग लिया।
बता दें कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीपी) भारत में 1987 में शुरू हुआ था। 1992 में इस योजना को चरणबद्ध किया गया था। कार्यक्रम का लक्ष्य 2010 बेसलाइन से नए एचआईवी संक्रमण और एड्स से संबंधित मौतों की संख्या को 80 प्रतिशत तक कम करना है। अमेरिकी राजदूत गार्सेटी ने भारत की इस योजना पर कहा कि प्रत्येक विश्व एड्स दिवस पर, अमेरिकी सरकार एचआईवी से पीड़ित लोगों और एचआईवी से प्रभावित लोगों के समर्थन में खड़ी रहती है। सरकार इस मौके पर एचआईवी से मरने वाले लोगों को याद भी करती है।
राजदूत गार्सेटी ने कहा, अमेरिकी सरकार एचआईवी और एड्स के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार और गैर सरकारी संगठनों की भूमिका की भी सराहना करती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल करने वाली संस्थाओं, समुदाय-आधारित संगठनों की तरफ से भी उल्लेखनीय प्रयास हो रहे हैं। इन प्रयासों को भी अमेरिका मान्यता देना चाहता है। बता दें कि विश्व एड्स दिवस हर साल एक दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन का मकसद एड्स महामारी और एचआईवी संक्रमण के बारे में जागरूकता बढ़ाना और एड्स से संबंधित बीमारियों से मरने वालों का सम्मान करना है।
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गौरतलब है कि अमेरिकी सरकार ने शुक्रवार को नई दिल्ली में विश्व एड्स दिवस मनाया। एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा माना जाता है। अमेरिकी राजदूत ने एचआईवी/एड्स को जड़ से मिटाने के साझा प्रयासों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भारत और दुनिया भर के देशों की साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। बता दें कि इस वर्ष का विश्व एड्स दिवस, बीमारी के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक प्रगति के 20 साल पूरे होने का प्रतीक है। अमेरिका में एड्स राहत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की आपातकालीन योजना के तहत एचआईवी/एड्स पीड़ितों की मदद की जाती है। इस योजना को पीईपीएफएआर के नाम से भी जाना जाता है।
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बता दें कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीपी) भारत में 1987 में शुरू हुआ था। 1992 में इस योजना को चरणबद्ध किया गया था। कार्यक्रम का लक्ष्य 2010 बेसलाइन से नए एचआईवी संक्रमण और एड्स से संबंधित मौतों की संख्या को 80 प्रतिशत तक कम करना है। अमेरिकी राजदूत गार्सेटी ने भारत की इस योजना पर कहा कि प्रत्येक विश्व एड्स दिवस पर, अमेरिकी सरकार एचआईवी से पीड़ित लोगों और एचआईवी से प्रभावित लोगों के समर्थन में खड़ी रहती है। सरकार इस मौके पर एचआईवी से मरने वाले लोगों को याद भी करती है।
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राजदूत गार्सेटी ने कहा, अमेरिकी सरकार एचआईवी और एड्स के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार और गैर सरकारी संगठनों की भूमिका की भी सराहना करती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल करने वाली संस्थाओं, समुदाय-आधारित संगठनों की तरफ से भी उल्लेखनीय प्रयास हो रहे हैं। इन प्रयासों को भी अमेरिका मान्यता देना चाहता है। बता दें कि विश्व एड्स दिवस हर साल एक दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन का मकसद एड्स महामारी और एचआईवी संक्रमण के बारे में जागरूकता बढ़ाना और एड्स से संबंधित बीमारियों से मरने वालों का सम्मान करना है।
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गौरतलब है कि अमेरिकी सरकार ने शुक्रवार को नई दिल्ली में विश्व एड्स दिवस मनाया। एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा माना जाता है। अमेरिकी राजदूत ने एचआईवी/एड्स को जड़ से मिटाने के साझा प्रयासों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भारत और दुनिया भर के देशों की साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। बता दें कि इस वर्ष का विश्व एड्स दिवस, बीमारी के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक प्रगति के 20 साल पूरे होने का प्रतीक है। अमेरिका में एड्स राहत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की आपातकालीन योजना के तहत एचआईवी/एड्स पीड़ितों की मदद की जाती है। इस योजना को पीईपीएफएआर के नाम से भी जाना जाता है।