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AI Impact Summit: भारत एआई से रचेगा इतिहास; अंतरिक्ष सुरक्षा, स्मार्ट उपग्रह की ओर बढ़ाया कदम
Sun, 15 Feb 2026 04:51 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 15 Feb 2026 04:51 AM IST
सार
AI Impact Summit:भारत अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे और जोखिम से निपटने के लिए एआई का इस्तेमाल कर अपने उपग्रहों को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और स्वायत्त बना रहा है। इंडिया एआई मिशन के तहत देश वैश्विक मंच पर अपनी संप्रभु एआई क्षमता, स्वदेशी मॉडल्स और अंतरिक्ष नवाचारों का प्रदर्शन कर रहा है। पढ़ें रिपोर्ट-
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एआई इम्पैक्ट समिट
- फोटो : एक्स/एएनआई
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विस्तार
अंतरिक्ष में बढ़ता कचरा और उपग्रहों की बढ़ती संख्या ने वैश्विक स्तर पर बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से न सिर्फ अपने कीमती स्पेस एसेट्स की सुरक्षा कर रहा है, बल्कि स्मार्ट और स्वायत्त उपग्रहों के युग की ओर कदम बढ़ा चुका है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से एआई इंडिया मिशन के तहत भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में देश की संप्रभु एआई शक्ति का प्रदर्शन किया जाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय मंच दुनिया भर के नीति निर्माताओं, स्टार्टअप्स, छात्रों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक साथ लाएगा ताकि एक जिम्मेदार और टिकाऊ एआई रोडमैप तैयार किया जा सके।
भारतीय कंपनी दिगंतारा के सीईओ अनिरुद्ध शर्मा बताते हैं कि पृथ्वी की कक्षा में एक सेंटीमीटर से बड़े लगभग 10 लाख मलबे के टुकड़े मौजूद हैं। एक छोटे 50 किलो के सैटेलाइट को साल भर में कम से कम 15 बार टक्कर की चेतावनियां मिलती हैं। वर्तमान में इन खतरों को भांपने के लिए पुराने सांख्यिकीय मॉडल के बजाय एआई का उपयोग किया जा रहा है, जो सात दिन पहले ही सटीक भविष्यवाणी कर सकता है। भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत अब सिर्फ रॉकेट लॉन्च करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि एआई की मदद से अंतरिक्ष को सुरक्षित और स्मार्ट बनाने वाला वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन रहा है।
अब अंतरिक्ष में ही होंगे डाटा सेंटर
बंगलूरू स्थित पिक्सेल के संस्थापक अवैस अहमद के अनुसार, सैटेलाइट इमेजरी का डाटा इतना विशाल है कि मानवीय स्तर पर उसका विश्लेषण असंभव है। अब अंतरिक्ष में ही डाटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। उपग्रहों पर जीपीयू और कंप्यूटिंग पावर लगाकर कच्चा डाटा भेजने के बजाय, अब सैटेलाइट अंतरिक्ष में ही विश्लेषण पूरा कर सिर्फ मुख्य इनसाइट या रिपोर्ट धरती पर भेजेंगे। यह सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से न केवल सस्ता होगा, बल्कि तेज भी होगा।
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खुद रास्ता बदल लेंगे सैटेलाइट
भारत की अंतरिक्ष इकाइयां अब ऑटोनॉमस सैटेलाइट ऑपरेशंस पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। ये स्वायत्त सैटेलाइट अगर कोई मलबा या दूसरा उपग्रह करीब आता है, तो खुद अपना रास्ता बदल लेंगे। दिगंतारा ऐसे उपग्रहों पर काम कर रहा है जो एक-दूसरे से बात कर टक्कर से बचेंगे। भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) का कहना है कि एआई अब भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की ऑपरेटिंग लेयर बन चुका है। इसरी इंडिया ने नोएडा में 150 करोड़ रुपये के निवेश से एआई और जीआईएस सेंटर बनाया है।
2032 तक 13.1 लाख करोड़ डॉलर का होगा एआई बाजार
तेजी से बढ़ते एआई उपयोग से इसका बाजार भी देश में रफ्तार पकड़ रहा है। बैंकिंग, बीमा, रिटेल, मैन्यूफैक्चरिंग व स्वास्थ्य सेवाएं, मौसम, रक्षा, आईटी सेवाएं, शशिक्षा व खेती तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है।
ये भी पढ़ें: एआई सम्मेलन में भारत ने पाकिस्तान को नहीं बुलाया, चीन और बांग्लादेश को दिया न्योता
विज्ञान और स्वास्थ्य में नई राहें...
ब्रह्म-एआई के जरिये इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक गणनाओं को आसान बनाया जा रहा है। शोध एआई लैब ऑपरेशन्स और बैटरी तकनीक जैसे क्षेत्रों में शोध की गति बढ़ा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में इंटेलीहेल्थ के जरिये मस्तिष्क विकारों के जल्द निदान के लिए विकसित एआई सिस्टम चिकित्सा जगत में क्रांति ला सकता है।
24 महीनों में इंडिया एआई मिशन की बड़ी उपलब्धियां
मार्च 2024 में 10,372 करोड़ के बजट के साथ शुरू हुए इस मिशन ने दो साल से भी कम समय में अभूतपूर्व प्रगति की है। भारतीय स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए 38,000 से अधिक जीपीयू की सुविधा किफायती दरों पर उपलब्ध कराई गई है। 12 प्रमुख टीमों को स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल्स विकसित करने के लिए चुना गया है।
भारत विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए 30 एआई एप्लीकेशंस को मंजूरी दी गई है। साथ ही, देश भर में 27 डाटा और एआई लैब स्थापित की जा चुकी हैं और 543 नई लैब की पहचान की गई है। मिशन के तहत 8000 से अधिक स्नातक, 5000 स्नातकोत्तर और 500 पीएचडी छात्रों को एआई क्षेत्र में प्रशिक्षण व सहयोग दिया जा रहा है।
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भारतीय कंपनी दिगंतारा के सीईओ अनिरुद्ध शर्मा बताते हैं कि पृथ्वी की कक्षा में एक सेंटीमीटर से बड़े लगभग 10 लाख मलबे के टुकड़े मौजूद हैं। एक छोटे 50 किलो के सैटेलाइट को साल भर में कम से कम 15 बार टक्कर की चेतावनियां मिलती हैं। वर्तमान में इन खतरों को भांपने के लिए पुराने सांख्यिकीय मॉडल के बजाय एआई का उपयोग किया जा रहा है, जो सात दिन पहले ही सटीक भविष्यवाणी कर सकता है। भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत अब सिर्फ रॉकेट लॉन्च करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि एआई की मदद से अंतरिक्ष को सुरक्षित और स्मार्ट बनाने वाला वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन रहा है।
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अब अंतरिक्ष में ही होंगे डाटा सेंटर
बंगलूरू स्थित पिक्सेल के संस्थापक अवैस अहमद के अनुसार, सैटेलाइट इमेजरी का डाटा इतना विशाल है कि मानवीय स्तर पर उसका विश्लेषण असंभव है। अब अंतरिक्ष में ही डाटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। उपग्रहों पर जीपीयू और कंप्यूटिंग पावर लगाकर कच्चा डाटा भेजने के बजाय, अब सैटेलाइट अंतरिक्ष में ही विश्लेषण पूरा कर सिर्फ मुख्य इनसाइट या रिपोर्ट धरती पर भेजेंगे। यह सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से न केवल सस्ता होगा, बल्कि तेज भी होगा।
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खुद रास्ता बदल लेंगे सैटेलाइट
भारत की अंतरिक्ष इकाइयां अब ऑटोनॉमस सैटेलाइट ऑपरेशंस पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। ये स्वायत्त सैटेलाइट अगर कोई मलबा या दूसरा उपग्रह करीब आता है, तो खुद अपना रास्ता बदल लेंगे। दिगंतारा ऐसे उपग्रहों पर काम कर रहा है जो एक-दूसरे से बात कर टक्कर से बचेंगे। भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) का कहना है कि एआई अब भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की ऑपरेटिंग लेयर बन चुका है। इसरी इंडिया ने नोएडा में 150 करोड़ रुपये के निवेश से एआई और जीआईएस सेंटर बनाया है।
2032 तक 13.1 लाख करोड़ डॉलर का होगा एआई बाजार
तेजी से बढ़ते एआई उपयोग से इसका बाजार भी देश में रफ्तार पकड़ रहा है। बैंकिंग, बीमा, रिटेल, मैन्यूफैक्चरिंग व स्वास्थ्य सेवाएं, मौसम, रक्षा, आईटी सेवाएं, शशिक्षा व खेती तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है।
- साल 2032 तक देश में एआई का 13.1 लाख करोड़ डॉलर का बाजार होने की उम्मीद है। भारतीय कंपनियां अपने कामकाज व समाधान में तेजी से एआई टूल्स को शामिल कर रही हैं।
- समिट में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश और रोजगार के विकास के लिए एआई कैसे एक अहम कड़ी बने- इस पर खास चर्चा होगी।
ये भी पढ़ें: एआई सम्मेलन में भारत ने पाकिस्तान को नहीं बुलाया, चीन और बांग्लादेश को दिया न्योता
विज्ञान और स्वास्थ्य में नई राहें...
ब्रह्म-एआई के जरिये इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक गणनाओं को आसान बनाया जा रहा है। शोध एआई लैब ऑपरेशन्स और बैटरी तकनीक जैसे क्षेत्रों में शोध की गति बढ़ा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में इंटेलीहेल्थ के जरिये मस्तिष्क विकारों के जल्द निदान के लिए विकसित एआई सिस्टम चिकित्सा जगत में क्रांति ला सकता है।
24 महीनों में इंडिया एआई मिशन की बड़ी उपलब्धियां
मार्च 2024 में 10,372 करोड़ के बजट के साथ शुरू हुए इस मिशन ने दो साल से भी कम समय में अभूतपूर्व प्रगति की है। भारतीय स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए 38,000 से अधिक जीपीयू की सुविधा किफायती दरों पर उपलब्ध कराई गई है। 12 प्रमुख टीमों को स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल्स विकसित करने के लिए चुना गया है।
भारत विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए 30 एआई एप्लीकेशंस को मंजूरी दी गई है। साथ ही, देश भर में 27 डाटा और एआई लैब स्थापित की जा चुकी हैं और 543 नई लैब की पहचान की गई है। मिशन के तहत 8000 से अधिक स्नातक, 5000 स्नातकोत्तर और 500 पीएचडी छात्रों को एआई क्षेत्र में प्रशिक्षण व सहयोग दिया जा रहा है।
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