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अहमदाबाद विमान हादसा: क्या अमेरिकी जांच टीम को जांच के लिए ब्लैक बॉक्स देगा भारत? US और बोइंग की साख का सवाल
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अहमदाबाद विमान हादसे में इमारत में घुसा विमान
- फोटो : पीटीआई
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अहमदाबाद में उड़ान भरने के कुछ ही क्षण बाद हादसे का शिकार हुए विमान के ब्लैक बॉक्स पर दुनिया भर की निगाह है। जांच पड़ताल के लिए भारत आए अमेरिकी इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ भारत से विमान के ब्लैक बॉक्स की मांग कर रहे हैं। ताकि वह विमान हादसे के कारणों की सही ढंग से पड़ताल कर सकें। बताते हैं कि अमेरिकी अथॉरिटी भी चाहती हैं कि भारत ब्लैक बॉक्स दे दे। बड़ा सवाल है कि क्या भारत ब्लैक बॉक्स अमेरिकी विशेषज्ञों को सैंपेगा?
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भारतीय विशेषज्ञों को आशंका है कि अमेरिकन विशेषज्ञ ब्लैक बाक्स के बहाने पूरी जांच रिपोर्ट को बोइंग के पक्ष में कर सकते हैं। दुर्घटना का कारण मानवीय चूक बता सकते हैं। ताकि अंतरराष्ट्रीय एविएशन इंडस्ट्री में अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी को झटका न लगे। उसके शेयरों में भूचाल न आए। सूत्र का कहना है कि हाल में डीजीसीए ने बोइंग 787-8 ड्रीम लाइनर को पूरी जांच के बाद ही उडान भरने का निर्देश दिया है। इससे अमेरिका को झटका लगा है। यह पूरा मामला आपरेशन सिंदूर में लड़ाकू विमान के गिरने को लेकर शेयर बाजार में चल रहे तूफान की तरह है।
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किसके पास है विमान का ब्लैक बॉक्स?
अहमदाबाद में टेकऑफ के ठीक बाद हादसे का शिकार हुए विमान, बोइंग 787-8ड्रीम लाइनर का ब्लैक्स बॉक्स फिलहाल एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो (एएआईबी) के पास है। इसका दफ्तर अरविंदो मार्ग, नई दिल्ली में है। अमेरिकी जांच दल कॉकपिट रिकार्डर समेत ब्लैक बॉक्स को चहता है, ताकि वह दुर्घटना के कारणों की सटीक और तकनीकी जांच कर सके। भारत इसकी जांच प्रक्रिया बंगलूरू में पूरी करना चाहता है। भारतीय वैमानिक इंजीनियर और भारतीय वायुसेना के तमाम अवकाश प्राप्त विशेषज्ञ भी इस घटनाक्रम पर निगाह बनाए हैं।
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एक भारतीय विशेषज्ञ ने अमर उजाला से अपनी चिंता भी जाहिर की। सूत्र का कहना है कि भारत को किसी भी सूरत में ब्लैक बॉक्स को अमेरिकी विशेषज्ञों के हवाले नहीं करना चाहिए। भारतीय वायुसेना के तमाम दुर्घटनाग्रस्त विमानों की जांच में शामिल रहे सूत्र का कहना है कि भारतीय विशेषज्ञ इसकी जांच करने और सही कारण का पता लगाने में सक्षम हैं। आवश्यकता पड़ने पर इसकी जांच में स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की सहायता ली जा सकती है, लेकिन इसे अमेरिका के एक्सपर्ट को देना सही नहीं होगा।
क्या होता है ब्लैक बॉक्स?
आम तौर पर चमकीले नारंगी रंग का रिकॉर्डर। नारंगी रंग इसलिए भी कि आसानी से ढूंढा जा सके। यह हर जहाज में होता है। इसके दो हिस्से होते हैं। 1. कॉकपिट वाइस रिकार्डर ( सीवीआर)। यह पायलट, सह-पायलट की बातचीत, कॉकपिट अलार्म, आवाज आदि को रिकॉर्ड करता है। 2. फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर)। इसमें विमान और उसके इंजन से जुड़ी जानकारियां होती हैं। मसलन विमान की ऊंचाई, उड़ान की स्थिति, मूव, नियंत्रण कक्ष से आखिरी संपर्क, गति, दिशा, इंजन और अन्य तकनीकी डेटा।
इस ब्लैक बॉक्स को काफी ढंग और मजबूती के साथ तैयार किया जाता है। इसमें ऐसी सिग्नलिंग डिवाइस भी लगी होती है, जो हादसे के बाद इस ब्लैक बॉक्स को ढूंढने में मदद करती है। ताकि विमान की दुर्घटना के बाद इसे सुरक्षित प्राप्त किया जा सके और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम गहन जांच-पड़ताल करके निष्कर्ष पर पहुंचती है।
विमान दुर्घटना के सामान्य कारण
अधिकांश विमान दुर्घटना में दो बड़े कारण आते हैं। 1. मानवीय भूल। मानवीय भूल में विमान को उड़ा रहे पायलट से हुई कोई गलती। आम तौर पर टेकऑफ या लैंडिंग के समय जरा सी असावधानी या निर्णय में चूक दुर्घटना का कारण बन जाती है। यहां पायलट की सूझ-बूझ, दक्षता आदि काफी महत्वपूर्ण होती है। 2. तकनीकी कारण। इसका संबंध विमान के इंजन, प्रणाली, टरबाइन सिस्टम, थ्रस्ट जनरेशन, फ्यूएल सप्लाई, इलेक्ट्रिक सिस्टम आदि से जुड़ी होती है। इसके अलावा विमान पक्षी से टकराने, रन-वे पर किसी जानवर या आब्जेक्ट आदि से टकराने पर भी दुर्घटना ग्रस्त हो जाते हैं।
बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के ब्लैक बाक्स पर दुनिया के देशों की निगाह
बोइंग 787-8 ड्रीन लाइनर अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग का सबसे शानदार विमान है, लेकिन 2011 से आसमान में उड़ान भरने के बाद से इसकी दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। कभी लिथियम आयन बैट्री को लेकर समस्या तो कभी कुछ। इसके चलते कई बार इसने यात्रियों की जान को जोखिम में डाला है। हालांकि, बोइंग ने इसमें समय रहते सुधार किए हैं। 12 जून को अहमदाबाद में हुई दुर्घटना, इसका प्रकार और भयावहता अपने आप में पहली बार है। कह सकते हैं कि यह सीधे बोइंग के इस विमान की विश्वसनीयता से जुड़ी है। हालांकि, विमान मिड साइज, ट्विन इंजन जेट एयर लाइनर है। इसके केबिन फीचर अत्याधुनिक, 20 प्रतिशत तक कम ईधन लेने वाला 248 यात्री को ले जाने में सक्षम है। इसकी रेंज भी 7,650 से 8,200 नाटिकल मील है। यह जापान, अमेरिका, सिंगापुर, एतिहाद एयरलाइंस समेत तमाम एयरलाइंस का हिस्सा है। दुनिया में इस समय इस सीरीज के 2137 से अधिक विमान उड़ रहे हैं। बोइंग 787 का फ्रांस के एयर बस से कड़ा मुकाबला रहता है।
अमेरिका को अपने बाजार की परवाह, दबाव में आना ठीक नहीं...
डीजीसीए, एएआईबी के सूत्र हालांकि किसी भी प्रकार की अमेरिकी दबाव की आशंकाओं से इनकार कर रहे हैं। सूचना है कि ब्लैक बॉक्स को खोलने, उसकी एनालिसिस समेत अन्य जांच-पड़ताल का काम बंगलूरू में शुरू हो चुका है। संभावना जताई जा रही है कि अगले दो-तीन दिन में कारणों का पता चल जाएगा। इंडियन एयरलाइंस में सेवाएं दे चुके और अहमदाबाद बोइंग-787 हादसे में जान गंवाने वाले वरिष्ठ पायलट सुमित सभरवाल के दोस्त पायलट ने कहा कि अमेरिकी दबाव में आना ठीक नहीं है। सूत्र भी उन्नत पायलट हैं। वह कहते हैं कि सुमित सभरवाल ने 8 हजार घंटे से अधिक कॉकपिट में बिताए हैं। यहां मानवीय चूक का मामला आने की कोई गुंजाइश नहीं है।
सूत्र का कहना है कि वह सालों से ड्रीमलाइनर उड़ा रहे हैं। डर उन्हें भी रहता है। इसमें सीधे तकनीकी गड़बड़ी जिम्मेदार है। इलेक्ट्रिक सप्लाई में गड़बड़ी का मामला सामने आ सकता है। वरिष्ठ पायलट का कहना है कि अमेरिका को तो अपने बाजार की परवाह है। उसे लग रहा है कि तकनीकी खामी सामने आने पर बोइंग के विमान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में करारा झटका लगेगा। इसलिए अमेरिका और उसके विशेषज्ञ इस पूरे दुर्घटना के कारण को मानवीय चूक पर ही थोपने की कोशिश करेंगे।
चिंता की बात: अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट कर चुके हैं मानयीय चूक का ईशारा
वरिष्ठ पायलट सूत्र का कहना है कि जांच के नतीजे आने से पहले अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट कैप्टन स्टीव ने इसमें पायलट की खामी निकाल दी। उन्हें इंतजार करना चाहिए। साफ दिखाई दे रहा है कि रन-वे से उठते समय विमान का इंजन पूरी तरह से काम कर रहा था। वीडियो में रन-वे पर धूल के गुबार इसका संकेत दे रहे हैं। पायलट ने गियर उठाया है, लेकिन लिफ्ट नहीं मिल सकी है। संभव है कि पॉवर सप्लाई में कोई तकनीकी खराबी आई हो। इसी की संभावना ज्यादा है। न जाने कितने पायलट ट्रेंड किए हैं। ऐसे में मानवीय गड़बड़ी की संभावना न के बराबर रहती है।