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2008 Ahmedabad Blasts: 70 मिनट में 20 से ज्यादा धमाके, ब्लास्ट से 5 मिनट पहले आए ईमेल से इंडियन मुजाहिदीन का नाम सुनकर सब चौंके
Fri, 18 Feb 2022 04:08 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Fri, 18 Feb 2022 04:08 PM IST
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26 जुलाई 2008 को 70 मिनट की अवधि में हुए 20 से ज्यादा बम धमाकों ने अहमदाबाद को हिला कर रख दिया था।
- फोटो :
social Media
विस्तार
अहमदाबाद में 2008 में हुए बम धमाकों के दोषियों को 13 साल बाद आखिरकार सजा मिल गई। गुजरात की विशेष अदालत ने इस सीरियल बम ब्लास्ट के 38 दोषियों को सजा-ए-मौत दी है। वहीं 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। 26 जुलाई 2008 को 70 मिनट की अवधि में हुए 20 से ज्यादा बम धमाकों ने अहमदाबाद को हिला कर रख दिया था। इन हमलों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक घायल हुए थे। पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े लोगों ने साल 2002 में गुजरात दंगों (गोधरा कांड) का बदला लेने के लिए इन हमलों को अंजाम दिया था, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग मारे गए थे।कौन है इंडियन मुजाहिदीन
बताया जाता है कि 26 जुलाई 2008 को ब्लास्ट से पांच मिनट पहले कई मीडिया संगठनों को इंडियन मुजाहिदीन नाम के एक संगठन से ईमेल मिला था, जिसमें कहा गया 'जो चाहो कर लो, रोक सकते हो तो रोक लो। इस ईमेल ने सबको चौंका दिया था। कथित तौर पर आईएम के इस ईमेल में 2002 के गुजरात दंगों, और 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने की बात कही गई। आईएम ने लश्कर-ए-तैयबा से बम विस्फोटों की जिम्मेदारी नहीं लेने का अनुरोध किया था। अब तक इस संगठन का नाम बहुत ज्यादा नहीं सुना गया था। हालांकि कहा जाता है कि इस संगठन ने साल 2007 में मीडिया के जरिए भारत में अपनी उपस्थिति का एलान किया था।
Bhopal: भोपाल पुलिस ने सिमी के दो कथित आतंकवादियों को गिरफ्तार किया।
- फोटो :
सोशल मीडिया
सिमी का एक समूह है आईएम
पुलिस ने जांच में निष्कर्ष निकाला कि आईएम प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का एक समूह था। 26 जुलाई की शाम करीब 6 बजकर 45 मिनट पर अहमदाबाद में पहला धमाका हुआ। इसके कुछ देर बाद इन 70 मिनट में 20 से ज्यादा धमाके हुए। इस दौरान अहमदाबाद में राज्य सरकार के सिविल अस्पताल, अहमदाबाद नगर निगम के एलजी अस्पताल, बसों, खड़ी साइकिलों, कारों समेत कई जगहों पर बम विस्फोट हुए और कुल 22 धमाके हुए।
कहां से हुई शुरुआत?
कथित तौर पर आईएम की शुरुआत साल 2000 में कर्नाटक के भटकल कस्बे में हुई थी। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में भारतीय खुफिया एजेंसियों की ओर से मिली जानकारी के हवाले से कहा गया है कि आईएम लश्कर-ए-तैयबा जैसे अन्य स्थापित समूहों की तरह एक सुव्यवस्थित संगठन नहीं है। बल्कि, यह इस्लामिक संगठनों का एक नेटवर्क है जिसमें स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) शामिल है और इसी ने इस संगठन की फंडिंग की। जिसका हरकत उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) और आफताब अंसारी के आतंकी गुट से संबंध है।
आईएम ने अपने कैडर के तौर पर विदेशियों के बजाए हमेशा स्थानीय मुस्लिमों को तरजीह दी। इसमें कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के लोग शामिल थे जिसका मुख्य लक्ष्य इस्लाम के सिपाही बनकर भारत के खिलाफ 'पवित्र जंग' शुरू करना था। रिपोर्टस के मुताबिक एक और जांच में पता चला है कि आईएम ने अपने शुरुआती दिनों में बांग्लादेशी आतंकी संगठन हरकत-उल-ए-इस्लामी की मदद से इस संगठन का नाम आसिफ रजा कमांडो फोर्स रखा था, जिसका नाम बाद में इंडियन मुजाहिदीन में तब्दील हो गया।
पुलिस ने जांच में निष्कर्ष निकाला कि आईएम प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का एक समूह था। 26 जुलाई की शाम करीब 6 बजकर 45 मिनट पर अहमदाबाद में पहला धमाका हुआ। इसके कुछ देर बाद इन 70 मिनट में 20 से ज्यादा धमाके हुए। इस दौरान अहमदाबाद में राज्य सरकार के सिविल अस्पताल, अहमदाबाद नगर निगम के एलजी अस्पताल, बसों, खड़ी साइकिलों, कारों समेत कई जगहों पर बम विस्फोट हुए और कुल 22 धमाके हुए।
कहां से हुई शुरुआत?
कथित तौर पर आईएम की शुरुआत साल 2000 में कर्नाटक के भटकल कस्बे में हुई थी। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में भारतीय खुफिया एजेंसियों की ओर से मिली जानकारी के हवाले से कहा गया है कि आईएम लश्कर-ए-तैयबा जैसे अन्य स्थापित समूहों की तरह एक सुव्यवस्थित संगठन नहीं है। बल्कि, यह इस्लामिक संगठनों का एक नेटवर्क है जिसमें स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) शामिल है और इसी ने इस संगठन की फंडिंग की। जिसका हरकत उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) और आफताब अंसारी के आतंकी गुट से संबंध है।
आईएम ने अपने कैडर के तौर पर विदेशियों के बजाए हमेशा स्थानीय मुस्लिमों को तरजीह दी। इसमें कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के लोग शामिल थे जिसका मुख्य लक्ष्य इस्लाम के सिपाही बनकर भारत के खिलाफ 'पवित्र जंग' शुरू करना था। रिपोर्टस के मुताबिक एक और जांच में पता चला है कि आईएम ने अपने शुरुआती दिनों में बांग्लादेशी आतंकी संगठन हरकत-उल-ए-इस्लामी की मदद से इस संगठन का नाम आसिफ रजा कमांडो फोर्स रखा था, जिसका नाम बाद में इंडियन मुजाहिदीन में तब्दील हो गया।
2008 में अहमदाबाद में सिरियल ब्लास्ट हुआ था
- फोटो :
social Media
धमाके के लिए क्या इस्तेमाल करते थे?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईएम के ज्यादातर आतंकी पहले छोटे स्तर के कार्यकर्ता के रूप में सिमी में भर्ती हुए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आईएम ने कथित तौर पर अपना पहला हमला साल 2002 में ही कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर किया था। हालांकि तब तक इसका नाम सामने नहीं आया था। कहा यह भी जाता है कि साल 2003 से 2005 के बीच आईएम सबसे ज्यादा सक्रिय था और उसने IED के इस्तेमाल से कई जगह हमले किए थे। IED और दूध की खाली केन को इस्तेमाल से किए गए धमाकों से जांच एजेसियों को यह पता चला कि आईएम का सिग्नेचर मार्क यही है। उनके लिए IED के जरिये एक से ज्यादा धमाके करना आसान था, जिससे ज्यादा से ज्यादा जान-माल का नुकसान पहुंचाया जा सके। हालांकि वे दूसरे विस्फोटकों का भी इस्तेमाल करते रहे हैं।
कब लगा प्रतिबंध?
सरकार ने जून 2010 में आईएम को आतंकी संगठन घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी की 2014 में दायर की गई एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा गया कि पहली बार नवंबर 2007 में लखनऊ कोर्ट में हुए बम ब्लास्ट की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन नाम के आतंकी सगठन ने ली थी। एक ईमेल सभी मीडिया हाउस को भेजा गया था जिसमें लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद में हुए धमाकों की जिम्मेदारी इस संगठन ने ली थी। इंडियन मुजाहिदीन ने बाद में 2005 दिल्ली ब्लास्ट, 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट, 2007 वाराणसी और हैदराबाद ब्लास्ट की जिम्मेदारी भी इसी तरह मेल भेजकर ली।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईएम के ज्यादातर आतंकी पहले छोटे स्तर के कार्यकर्ता के रूप में सिमी में भर्ती हुए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आईएम ने कथित तौर पर अपना पहला हमला साल 2002 में ही कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर किया था। हालांकि तब तक इसका नाम सामने नहीं आया था। कहा यह भी जाता है कि साल 2003 से 2005 के बीच आईएम सबसे ज्यादा सक्रिय था और उसने IED के इस्तेमाल से कई जगह हमले किए थे। IED और दूध की खाली केन को इस्तेमाल से किए गए धमाकों से जांच एजेसियों को यह पता चला कि आईएम का सिग्नेचर मार्क यही है। उनके लिए IED के जरिये एक से ज्यादा धमाके करना आसान था, जिससे ज्यादा से ज्यादा जान-माल का नुकसान पहुंचाया जा सके। हालांकि वे दूसरे विस्फोटकों का भी इस्तेमाल करते रहे हैं।
कब लगा प्रतिबंध?
सरकार ने जून 2010 में आईएम को आतंकी संगठन घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी की 2014 में दायर की गई एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा गया कि पहली बार नवंबर 2007 में लखनऊ कोर्ट में हुए बम ब्लास्ट की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन नाम के आतंकी सगठन ने ली थी। एक ईमेल सभी मीडिया हाउस को भेजा गया था जिसमें लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद में हुए धमाकों की जिम्मेदारी इस संगठन ने ली थी। इंडियन मुजाहिदीन ने बाद में 2005 दिल्ली ब्लास्ट, 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट, 2007 वाराणसी और हैदराबाद ब्लास्ट की जिम्मेदारी भी इसी तरह मेल भेजकर ली।