राफेल डील : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब राहुल गांधी ने की जेपीसी जांच की मांग
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उच्चतम न्यायालय ने 14 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को बरकरार रखते हुए अपने 14 दिसंबर, 2018 को दिए फैसले के खिलाफ दाखिल समीक्षा याचिकाओं को खारिज कर दिया। केंद्र सरकार को राहत देते हुए मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि इसकी अलग से जांच करने की जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने अब जेपीसी जांच की मांग की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राहुल गांधी ने ट्वीट कर राफेल डील की सुनवाई करने वाली बेंच में शामिल जस्टिस जोसेफ की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने जांच के दरवाजे खोल दिए हैं। अब पूरी गंभीरता से एक जांच शुरू होनी चाहिए। इस घोटाले की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन भी किया जाना चाहिए।
Justice Joseph of the Supreme Court has opened a huge door into investigation of the RAFALE scam.
An investigation must now begin in full earnest. A Joint Parliamentary Committee (JPC) must also be set up to probe this scam. #BJPLiesOnRafale pic.twitter.com/JsqZ53kZFPविज्ञापन विज्ञापन— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) November 14, 2019
राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जश्न मना रही है, लेकिन यह सेलिब्रेशन नहीं बल्कि इन्वेस्टिगेशन का समय है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय यह साबित करता है कि राफेल केस की जांच का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने खोल दिया है।
Supreme Court judgment in the Review today has paved way for comprehensive criminal investigation into Rafale Scam
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) November 14, 2019
As usual, BJP Govt is misleading the Nation on impact of judgment
Supreme Court judgment is not a Clean Chit, but paves way for full investigation
Our Statement: pic.twitter.com/uPtuYxec92
केंद्र सरकार को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हमें नहीं लगता कि राफेल विमान सौदा मामले में प्राथमिकी दर्ज करने या बेवजह जांच का आदेश देने की जरूरत है।'
अदालत ने 14 दिसंबर 2018 को राफेल खरीद प्रक्रिया और सरकार द्वारा इंडियन ऑफसेट पार्टनर के चुनाव में भारतीय कंपनी को फेवर किए जाने के आरोपों की जांच करने का अनुरोध करने वाले सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि फैसला लेने की प्रक्रिया में कहीं भी शक करने की गुंजाइश नहीं है।