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लोकसभा चुनाव 2019: भाजपा की हार के बाद जीत के फॉर्मूले की तलाश में संघ

Fri, 21 Dec 2018 03:31 AM IST
गौरव द्विवेदी शरद गुप्ता, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Fri, 21 Dec 2018 03:31 AM IST
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after recent defeat in assembly elections rss in search of winning formula for bjp
भईया जी जोशी - फोटो : samvada.org

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चिंतित है। पांच महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर संघ नेतृत्व निश्चिंत नहीं है। वह भाजपा की जीत का फार्मूला तलाश करने के लिए लगातार मंथन कर रहा है। इसी सिलसिले में बुधवार को दिल्ली स्थित संघ मुख्यालय में क्षेत्र प्रचारकों के साथ सरकार्यवाह भैयाजी जोशी की बैठक देर रात तक चली।

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संघ को चिंता है कि किसानों की हालात को लेकर क्या कदम उठाए जा सकते हैं जिनका लाभ अगले दो से तीन महीने में दिखने लगे। रोजगार के अवसरों की कमी को लेकर युवाओं में व्याप्त बेचैनी को कैसे दूर किया जा सकता है? राम जन्मभूमि मंदिर मामले को कितना आगे ले जाया जा सकता है? क्या संगठन में बदलाव लाने की जरूरत है?
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संघ के अधिकारियों की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से भी लगातार बात हो रही है। संघ का मानना है कि तीन राज्यों के चुनाव परिणामों से जाहिर है कि केंद्र सरकार के मौजूदा कामकाज के आधार पर लोकसभा चुनाव जीतना कठिन है। भाजपा नेता हालांकि इस बात से सहमत नहीं हैं।
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ग्यारह दिन पहले हुई समन्वय बैठक में भी इन सारी बातों पर विचार हुआ। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राम मंदिर मुद्दे को तूल दिए जाने पर सवाल उठाए। विश्व हिंदू परिषद अध्यक्ष जस्टिस (रि) विष्णु कोकजे ने उत्तर दिया कि यह पहली समन्वय बैठक में तय कार्यक्रम के अनुरूप ही था।

संघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शाह की आपत्ति इस कार्यक्रम के विराट स्वरूप पर थी। 25 नवंबर को सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में, सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने दिल्ली के रामलीला मैदान पर और सह-सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने उसी दिन बंगलूरू में रैली संबोधित की। सभी जगह मांग की गई कि मंदिर बनाने के लिए केंद्र सरकार तुरंत कानून बनाए।

नौ दिसंबर को आयोजित संघ परिवार की समन्वय बैठक में अमित शाह का कहना था कि इससे पहले संघ ने राम मंदिर मुद्दे को इतनी प्रमुखता से कभी नहीं उठाया था। यहां तक कि 1990-92 के दौरान भी संघ के शीर्ष अधिकारियों ने एक ही दिन कभी रैली संबोधित नहीं कीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन रैलियों से तीन राज्यों के चुनाव में भाजपा नुकसान हुआ।

मंदिर मुद्दा इसलिए अभी नहीं
भाजपा का मानना है कि राम मंदिर का मुद्दा उठाते ही नरेंद्र मोदी सरकार की पांच सालों की उपलब्धियाँ नेपत्थ्य में चली जाएंगी। सरकार की सारी योजनाएं, सारी मेहनत बेमानी हो जाएंगी। वैसे भी मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के सामने है, इसलिए भाजपा चुनाव से ठीक पहले इस मामले पर कानून बनाने या अध्यादेश लाने के खिलाफ है।


विरोध के स्वर
इस बीच संघ के वरिष्ठ अधिकारी किशोर तिवारी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को लिखे पत्र में मांग की है कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री के समकक्ष दर्जा प्राप्त तिवारी ने कहा कि पार्टी की बागडोर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सौंपी जानी चाहिए। वरिष्ठ भाजपा नेता संघप्रिय गौतम ने भी मांग की है कि मौजूदा पार्टी नेतृत्व को तीन राज्यों में हार की जिम्मेदारी ले कर पद छोड़ देना चाहिए। 

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