फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   After 444 years Allahabad will be renamed once again know its complete history

444 साल बाद एक बार फिर बदला इलाहाबाद का नाम, जानिए पूरा इतिहास

Tue, 16 Oct 2018 05:10 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इलाहाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Tue, 16 Oct 2018 05:10 PM IST
विज्ञापन
After 444 years Allahabad will be renamed once again know its complete history
PRAYAGRAJ - फोटो : self

संगम नगरी इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया है। बता दे कि इलाहाबाद का नाम 444 साल बाद एक बार फिर से बदला गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस बात का एलान कर दिया है। इससे संत समाज भी उत्साहित है। दरअसल, पुराणों में इसका नाम प्रयागराज ही था। अकबर के शासनकाल के दोरान इसे इलाहाबाद कर दिया गया था।

विज्ञापन


पौराणिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए वर्षों से इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने की मांग उठ रही थी। मगर किभी ने इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। जब मार्च 2017 को योगी सरकार उत्तर प्रदेश में आई तो उन्होंने जनता से यह वादा भी किया था कि वे इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर देंगे। इसके बाद कई संतों ने योगी आदित्यनाथ को उनका वादा को याद दियाला। 
विज्ञापन


प्रयागराज का पौराणिक महत्व

रामचरित मानस में इलाहाबाद को प्रयागराज ही कहा गया है। बता दे कि संगम के जल से प्राचीन काल में राजाओं का राजअभिषेक भी होता था। इस बात का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में है। वन जाते समय श्रीराम प्रयाग में भारद्वाज ऋषि के आश्रम पर होते ही गए थे। भगवान श्रीराम जब श्रृंग्वेरपुर पहुंचे तो वहां पर भी प्रयागराज का ही जिक्र आया था। सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक पुराण मत्स्य पुराण के 102 अध्याय से लेकर 107 अध्याय तक में इस तीर्थ के महात्म्य का वर्णन है। उसमें लिखा है कि प्रयाग प्रजापति का क्षेत्र है जहां गंगा और यमुना बहती हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रयागराज कब बदला नाम गया था
अकबरनामा और आईने अकबरी व अन्य मुगलकालीन ऐतिहासिक पुस्तकों से ज्ञात होता है कि अकबर ने सन 1574 के आसपास प्रयागराज में किले की नींव रखी। अकबर ने यहां नया नगर बसाया था जिसके बाद उसने प्रयागराज का नाम इलाहाबाद रखा था उसके पहले तक इसे प्रयागराज के ही नाम से जाना जाता था। 

ऐसे बदलता है शहरो का नाम

- किसी शहर के स्थानीय लोग या जनप्रतिनिधि नाम बदलने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे 
- राज्य मंत्रिमंडल प्रस्ताव पर विचार करती है और मंजूरी देने के बाद राज्यपाल की सहमति को भेजती है
- राज्यपाल प्रस्ताव पर अनुंशसा देने के साथ अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृहमंत्रालय को भेजता है 
- गृहमंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद राज्य सरकार नाम बदलने की अधिसूचना जारी करती है

           
स्वामी वासुदेवानन्द का कहना है कि प्रयाग एक पौराणिक नाम है जिसे लोग यज्ञ और तपस्या की भूमि मानते है। यदि किसी शासक ने इसका नाम बदलकर अपनी रुचि के अनुसार इलाहाबाद रख दिया तो उससे भूमी का इतिहास नहीं बदल सकता। मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति को पुनर्जागृत कर दिया। लेकिन यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था। 


वही ममता कालिया का बयान आया कि नाम का कोई मुद्दा नहीं है। इलाहाबाद नाम तो सबके दिल में बसा है। उसे कैसे बदला जा सकता है। मुख्यमंत्री को शहर की दूसरी समस्या पर ध्यान देना चाहिए। नाम की  कोई समस्या नहीं है। माघ के मेले में शहर तो प्रयागराज के नाम से जाना ही जाता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed