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भारतvsपाकिस्तान: अंतर्राष्ट्रीय अदालत में आखिर क्या हुआ था 18 साल पहले?

Thu, 18 May 2017 03:36 PM IST
amarujala.com, Presented By: अकरम
amarujala.com, Presented By: अकरम Updated Thu, 18 May 2017 03:36 PM IST
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18 years after india versus Pakistan At ICJ

कुलभूषण जाधव मामले में हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने सोमवार को सुनवाई की। माना जा रहा है कि इस केस का परिणाम जो भी हो लेकिन इससे दोनों देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

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3 मार्च 2016 को गिरफ्तार किए गए जाधव को पाकिस्तान ने पिछले महीने अप्रैल में जासूसी के आरोप फांसी की सजा सुनाई थी। सजा के बाद भारत ने 16 बार पूर्व नौसेना ऑफिसर को काउंसलर एक्सिस देने की अपील की लेकिन पाक ने इंकार कर दिया।
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पाकिस्तान द्वारा हर बार अपील को ठुकराने के बाद भारत ने 8 मई, 2017 को आईसीजे का रुख किया। आईसीजे में भारत को बड़ी कामयाबी मिली और कोर्ट ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी। भारत ने कहा है कि जाधव मामले पर पाकिस्तान ने 1963 की वियना संधि का उल्लंघन किया है। 
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हालांकि, यह पहला मामला नहीं जब भारत और पाकिस्तान आईसीजे में आमने-सामने हैं। इससे पहले भी आईसीजे भारत और पाकिस्तान के केस में 18 साल पहले सुनवाई कर चुका है।

पाकिस्तान ने 1999 में अटलांटिक नाम के एक पाकिस्तानी विमान के मामले को लेकर आईसीजे का रुख किया था। 10 अगस्त 1999 को अटलांटिक नाम के एक पाकिस्तानी विमान ने 16 नौसैनिक कर्मियों (जिनमें अधिकांश युवा ट्रेनी थे) को लेकर अपने नियमित ट्रेनिंग मिशन के लिए सुबह 9:15 बजे उड़ी भरी थी।

'पाक का अटलांटिक विमान गुजरात के कच्छ क्षेत्र में उड़ रहा था'

18 years after india versus Pakistan At ICJ
उड़ान के दौरान कहीं 10:30 बजे और 10:55 बजे के बीच, भारतीय वायु सेना ने अपने विमानों को मिसाइलों से अटलांटिक को हवा में मार गिराने के निर्देश दिए थे। इसमें कोई भी नहीं बचा था। इस घटना के बाद, भारत ने दावा किया था, 'अटलांटिक ने क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया था, विमान गुजरात के कच्छ क्षेत्र में उड़ रहा था।'

पाकिस्तान ने भारत के दावे को आईसीजे में चुनौती दी, जिसमें उसने कहा कि विमान अपने ही हवाई क्षेत्र में कराची से लगभग 70 से 90 मील पूर्व में एक ऑपरेशनल क्षेत्र में उड़ रहा था। इसके बाद पाकिस्तान ने मुआवजे के रूप में भारत से 60 मिलियन डॉलर का दावा किया। 

भारत ने पाक के दावे को नहीं माना और 21 सितंबर, 1999 को पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) चला गया। पाक ने 16 नौसेना कर्मियों की मौत के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया। 

पाकिस्तान ने अपनी याचिका में कोर्ट से कहा, 'भारत ने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का उल्लंघन किया है। जिसमें संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बनाए रखने के लिए अपनी और दूसरे देशों की क्षेत्रीय अखंडता को मानते हैं।'

भारत ने पाकिस्तान के दावाों के जवाब में कहा कि कि पाकिस्तान के तर्क निराधार हैं। इस मामले में अदालत में आने का कोई कारण नहीं बनता। भारत ने कहा कि यह मामला कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के तहत नहीं दायर किया गया। भारत ने इस केस में 1974 की छूट का उल्लेख किया, जिसमें भारत और राष्ट्रमंडल देशों के बीच मतभेदों को कोर्ट के न्यायिक मापदंडों से बाहर रखा गया था।

साल 2000 में अप्रैल में चार दिन की सुनवाई के बाद आईसीजे ने दो महीने बाद 21 जून को दिए फैसले में पाकिस्तान के दावों यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामला कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इस मामले में 16 जजों की बैंच ने 14-2 से मतदान किया था।

हालांकि, आईसीजे ने यह जरूर कहा कि यह विवाद उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसका मतलब यह नहीं कि देश शांतिपूर्वक और सम्मानपूर्वक अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए बाध्य नहीं हैं।
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