फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Advocate groups file review petition in Supreme Court seeking review of judge BH Loya order

वकील समूहों ने जज लोया पर दिए आदेश पर पुनर्विचार की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

Mon, 21 May 2018 12:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 21 May 2018 12:51 PM IST
विज्ञापन
Advocate groups file review petition in Supreme Court seeking review of judge BH Loya order
बी एच लोया
बॉम्बे वकील संघ ने सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बी एच लोया की मौत की स्वतंत्र जांच के लिए खारिज की गई उनकी याचिका पर पुनर्विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे की याचिका में कोर्ट के फैसले से उन निष्कर्षों को हटाने की भी मांग की गई कि जिसमें कहा गया है कि लोया की मौत की जांच संबंधी याचिका न्यायपालिका की आजादी पर हमला शुरू करने और न्यायिक संस्थानों की विश्वसनीयता को कम करने की "छिपी हुई कोशिश" थी। याचिका में कहा गया है कि "मामले के तथ्यों के आधार पर न्याय को भले ही पूरी तरह नहीं नकारा गया लेकिन फैसले की वजह से न्याय का गर्भपात हुआ है।" 
विज्ञापन


चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने 19 अप्रैल को याचिका खारिज कर दी थी। इसके साथ ऐसी ही मांग करने वाली कई अन्य याचिकाओं को भी खारिज कर दिया गया था। अदालत ने फैसला सुनाया था कि "आधिकारिक दस्तावेजों और दर्ज रिकॉर्ड इशारा करती है कि जज लोया की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी"। एसोसिएशन ने मामले की जांच के लिए पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी याचिका दायर की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खुद ही अपने पास स्थानांतरित कर दिया था। 
विज्ञापन


वकीलों के एसोसिएशन ने कहा कि उनकी कोशिश "मामले को सनसनीखेज करना नहीं था और न ही न्यायपालिका की आजादी पर हमला शुरू करने और न्यायिक संस्थानों की विश्वसनीयता को कम करने की "छिपी हुई कोशिश" थी। इसके उलट याचिकाकर्ता के एसोसिएशन की पूरी कोशिश पूरे न्यायपालिका को आश्वस्त करना था कि एसोसिएशन अपने जीवन में चुनौती का सामना कर रहे हर न्यायाधीश के साथ खड़ा रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह प्रयास न्यायपालिका के सभी सदस्यों को आश्वस्त करने के लिए एक स्वतंत्र जांच के लिए था और कुछ भी नहीं। अगर जांच की प्रार्थना स्वीकार कर ली गई होती और जांच का आदेश दे दिया गया होता और यदि यह पाया जाता कि जज लोया की मौत वास्तव में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी तो यह सभी संदेहों को पर विराम लगा देता। साथ ही यह न्यायपालिका और पूरे देश को एक मजबूत संदेश देता कि लोग न्यायपालिका के साथ खड़े हैं और चुनौती के समय इसे अकेला नहीं छोड़ेंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed