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उमर अब्दुल्ला लोक व्यवस्था के लिए खतरा, इसलिए की नजरबंदी : जम्मू-कश्मीर प्रशासन

Tue, 03 Mar 2020 12:59 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला ब्यूरो नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 03 Mar 2020 12:59 AM IST
सार

  • जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सीएम की नजरबंदी के फैसले को सही बताया
  • उमर की बहन सारा पायलट की याचिका पर पांच मार्च को होगी सुनवाई

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Administration says, Omar Abdullah is a threat to public order, so  detention is necessary
उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो)

विस्तार

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत नजरबंदी करने के निर्णय को सही ठहराया है। प्रशासन ने कहा है कि उमर अब्दुल्ला अब भी लोक व्यवस्था के लिए खतरा बने हुए हैं। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने उमर की नजरबंदी को चुनौती देने वाली उनकी बहन सारा अब्दुल्ला पायलट की याचिका पर पांच मार्च को सुनवाई की तारीख तय कर दी।

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पीठ के समक्ष जिलाधिकारी द्वारा दिए गए इस हलफनामे में उमर की नजरबंदी को सही बताया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि 24 फरवरी को एडवाइजरी बोर्ड ने भी इसे सही बताया है। हलफनामे में उमर द्वारा एडवाइजरी बोर्ड के पास अपनी बातें न रखने के अलावा हाईकोर्ट का दरवाजा न खटखटाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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प्रशासन ने हलफनामे में कहा है कि उमर अनुच्छेद 370 को लेकर हमेशा बयान देते रहें हैं। गत पांच अगस्त को अनुच्छेद-370 को खत्म करने से पहले भी उमर इसे लेकर काफी मुखर थे। हलफनामे में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की भौगोलिक नजदीकियां होने के कारण लोक व्यवस्था पर लगातार परीक्षण की दरकार है।
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महबूबा की बेटी की याचिका पर 18 को सुनवाई

जस्टिस अरुण मिश्रा ने सुनवाई के दौरान कहा, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा ने भी याचिका दी है, जिसमें उसने अपनी मां महबूबा की पीएसए के तहत नजरबंदी को चुनौती दी है। उन्होंने सलाह दी कि दोनों ही मामलों को साथ ही सुना जाना चाहिए। इल्तिजा की याचिका पर 18 मार्च को, जबकि सारा की याचिका पर पांच मार्च को सुनवाई होगी।

बंदी प्रत्यक्षीकरण के तहत दायर की है याचिका

राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की पत्नी सारा अब्दुल्ला पायलट ने शीर्ष अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपने भाई उमर की जन सुरक्षा कानून के तहत नजरबंदी के पांच फरवरी के प्रशासन के आदेश को चुनौती दे रखी है। सारा ने याचिका में कहा है कि नजरबंदी का आदेश गैरकानूनी हैं और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में उनके भाई से किसी प्रकार का खतरा होने का सवाल ही नहीं है। इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जानबूझकर राजनीतिक नेताओं को खामोश कर दिया गया है।

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