फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   actor vijay tvk tamil nadu election 2026 political rise dmk aiadmk dravidian politics shift

Tamil Nadu Election: सियासत के नए थलापति, विजय की आंधी में उड़ी द्रमुक; वादों का चला चमत्कार

Tue, 05 May 2026 04:45 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 05 May 2026 04:45 AM IST
सार

तमिल सुपरस्टार विजय ने राजनीति में सिर्फ दो साल के भीतर बड़ा सियासी धमाका कर दिया है। तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के साथ उन्होंने तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को चुनौती देते हुए खुद को नए जननेता के रूप में स्थापित किया।

विज्ञापन
actor vijay tvk tamil nadu election 2026 political rise dmk aiadmk dravidian politics shift
थलापति विजय - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

पहले पर्दे के सुपरस्टार अभिनेता विजय ने दो साल में ही ऐसा रंग जमाया कि इस दक्षिण भारतीय राज्य ने अपनी सियासत में एक और सितारा जड़ लिया। साथ ही, सियासत और सिनेमा के साथ अपने रिश्ते को और गहरा कर दिया। तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) पार्टी बनाकर सियासत में उतरे विजय की सुनामी ने तमिलनाडु की द्रविड़ विचारधारा आधारित राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और बहुमत के करीब पहुंच गई है।
विज्ञापन


अभिनेता विजय के लिए विधानसभा चुनाव ब्लॉकबस्टर शो बन गया है। वह सियासत के सुपरस्टार बनने की राह पर हैं। चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने परंपरा से हटकर नई रणनीति अपनाई। खुद को हर दिन के राजनीतिक शोर से दूर रखा। नतीजा यह हुआ कि जब भी वह सामने आए, वह एक खास लम्हा बन गया। यह तरीका सिनेमा की दुनिया में अक्सर काम करता है, जहां स्टार की सीमित झलक ही उसकी लोकप्रियता को बनाए रखती है। विजय ने उसी मनोविज्ञान को राजनीति में उतारा। उनकी कम दिखो और ज्यादा असर छोड़ो वाली रणनीति काम कर गई।
विज्ञापन


विजय की पार्टी टीवीके को चुनाव से पहले राज्य में तीसरी शक्ति के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन वह अप्रत्याशित रूप से पहली ताकत बनकर सामने आई है। दूसरे नंबर की पार्टी मानी जा रही अन्नाद्रमुक तीसरे स्थान पर पहुंच गई, तो सत्ता की दावेदार द्रमुक दूसरे स्थान पर खिसक गई है। दशकों से, तमिलनाडु की राजनीति द्रविड़ विचारधारा पर आधारित रही है, जिसमें द्रमुक और अन्नाद्रमुक मिलकर वोटों और सीटों का भारी हिस्सा हासिल करती रही हैं। एमजीआर के उदय से लेकर जयललिता की व्यापक जीत तक, उथल-पुथल के क्षण भी इसी संरचना के भीतर उभरे, लेकिन इस बार के चुनाव ने इस व्यवस्था को बदल दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विजय की आंधी में उड़ी द्रमुक
मतगणना से पहले चुनावी पंडितों ने विजय को लेकर गंभीरता तो दिखाई
थी, लेकिन वे द्रमुक की सत्ता में वापसी को लेकर करीब निश्चिंत नजर आ
रहे थे। विजय की आंधी ने चुनावी पंडितों के सारे किंतु-परंतु के साथ ही द्रमुक को भी उड़ा दिया है।

तमिलनाडु की द्विध्रुवीय सियासत में दमदार वर्चस्व रखने वाली सत्तारूढ़ द्रमुक न सिर्फ दूसरे स्थान पर खिसक गई है, बल्कि उसके कई मंत्रियों को भी पराजय का सामना करना पड़ा है।
द्रमुक अध्यक्ष और सीएम एमके स्टालिन को भी मुंह की खानी पड़ी है। हालांकि उनके बेटे और उप मुख्यमंत्री उदयनिधि को जीत हासिल हुई है।

वादों का चमत्कार
विजय ने बेटी के विवाह के लिए 8 ग्राम सोना और नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने का वादा किया।
60 वर्ष से कम आयु की महिलाओं के लिए हर माह 2,500 रुपये और हर परिवार को साल में छह एलपीजी सिलिंडर मुफ्त देने का वादा किया।
आर्थिक रूप से कमजोर दुल्हनों के लिए सोने के साथ एक उत्तम रेशमी साड़ी, महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए 5 लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त ऋण का भी वादा किया है।
सरकारी और राज्य-सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की माताओं या अभिभावकों को स्कूल छोड़ने की दर को कम करने में मदद के लिए प्रतिवर्ष 15,000 रुपये देने का प्रस्ताव है।

जहां दिखे, वहां सियासी दलों पर तगड़ा प्रहार
राजनीति में कम दिखना चुप रहने के बराबर है। विजय भले ही चुनाव प्रचार में ज्यादा नहीं दिखे, लेकिन जहां दिखे वहां चुप नहीं रहे, बल्कि सियासी दलों पर जोरदार हमला किया। तिरुनेलवेली में विजय ने द्रमुक पर तीखा हमला किया और बड़े गठबंधनों को ऐसी ताकतों के रूप में पेश किया, जो एक ही डर से एकजुट हैं-उनका उभार। उन्होंने इस चुनाव को एक पीढ़ी के लिए बड़ा बदलाव बताया। वह एक ऐसे चेहरे के रूप में उभरे हैं, जिनका अपने प्रशंसकों से, जो अब मतदाता बन चुके थे, लगभग निजी सा रिश्ता है। यह रिश्ता संगठन से कम और माहौल से ज्यादा जुड़ा है, कार्यकर्ताओं से कम और उनकी स्क्रीन छवि से ज्यादा बना है।

युवाओं-महिलाओं में किया ऊर्चा का संचार
यह माहौल खास तौर पर युवाओं व महिलाओं में दिखने वाली राजनीतिक ऊर्जा में बदल गया। उनकी सभाओं में यह वर्ग बड़ी संख्या में नजर आया। यह वही मतदाता समूह था, जो अक्सर बदलाव की उम्मीद करता है और नई राजनीति की ओर झुकाव रखता है।


चुनाव विश्लेषकों का मानना था कि विजय का इस चुनाव में मुख्यमंत्री बनने से ज्यादा प्रभाव डालने पर ध्यान था। उनका लक्ष्य हर सीट जीतना नहीं, बल्कि मुकाबले के अंतर को प्रभावित करना, वोटों का बंटवारा बदलना और स्थापित दलों की गणित को उलझाना रहा। नतीजों से साफ है कि विजय अपनी इस रणनीति में कामयाब रहे।

अन्य वीडियो- 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed