{"_id":"689231dd178a46be5407a5a6","slug":"accused-cannot-be-held-guilty-on-the-basis-of-conduct-alone-comment-of-supreme-court-in-murder-case-2025-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: 'केवल आचरण के आधार पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता', हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: 'केवल आचरण के आधार पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता', हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
Tue, 05 Aug 2025 10:01 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Tue, 05 Aug 2025 10:01 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ की निचली अदालत ने आरोपी को हत्या का अभियुक्त माना था। जबकि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी को गैर इरादतन हत्या का दोषी माना था। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया और अहम टिप्पणी की।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में मंगलवार को अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में युवक को बरी करते हुए कहा कि ठोस सबूत के बिना आरोपी को केवल आचरण के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अभियुक्त की अपील को स्वीकार करते हुए जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय का निर्णय कई आधारों पर त्रुटिपूर्ण था। मामले में आरोपी को आरोपी को निचली अदालत ने हत्या का दोषी ठहराया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने अपराध को गैर इरादतन हत्या में बदल दिया था।
ये भी पढ़ें: पूरे देश में एक हजार से अधिक जगहों पर कार्यक्रम करेगा आरएसएस, मोहन भागवत बताएंगे संघ के काम
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि पहली गलती यह थी कि हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद मेडिकल सबूतों की जांच की और फिर अपीलकर्ता की ओर से खुद दर्ज कराई गई एफआईआर की विषय-वस्तु के साथ सीधे उसकी पुष्टि करने की कोशिश की। गवाह का साक्ष्य सलाहकारी प्रकृति का होता है और इसका उपयोग केवल आरोपी को हत्या का दोषी ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता।
राज्य के वकील ने कहा कि अपीलकर्ता ने 2019 में पुलिस थाने में जाकर मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीठ ने कहा कि किसी भी अन्य सबूत की तरह अभियुक्त का आचरण उन परिस्थितियों में से एक है, जिस पर अदालत रिकॉर्ड में मौजूद अन्य प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विचार कर सकती है।
अदालत ने कहा कि जब भी अदालत के सामने ऐसे सवाल आएं कि अपराध हत्या है या गैर इरादतन हत्या तो इस पर तीन चरणों में विचार किया जाना चाहिए। पहले चरण में देखा जाए कि क्या अभियुक्त ने ऐसा कृत्य किया जिससे किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु हुई। पीठ ने कहा कि आरोपी के कृत्य और मृत्यु के बीच कारण का सबूत दूसरे चरण की ओर ले जाता है। इसमें यह विचार किया जाए कि क्या आरोपी का कृत्य आईपीसी की धारा 299 के तहत गैर इरादतन हत्या में आता है।
ये भी पढ़ें: एअर इंडिया की दिल्ली-मिलान उड़ान रद्द, बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में आई तकनीकी खराबी
पीठ ने कहा कि दूसरे चरण में सकारात्मक परिणाम मिलें तो तीसरे चरण में आईपीसी की धारा 300 हत्या के आवेदन पर विचार किया जाए। इस स्तर पर अदालत को यह तय करना होगा कि अभियोजन पक्ष द्वारा साबित किए गए तथ्य मामले को धारा 300 में निहित हत्या की परिभाषा के चार खंडों में से किसी के दायरे में लाते हैं या नहीं।
इसमें कहा गया है कि यदि इसका परिणाम नकारात्मक है, तो अपराध गैर इरादतन हत्या होगा। इसमें धारा 304 के पहले या दूसरे भाग के तहत दंड दिया जाएगा। साथ ही यह ध्यान रखा जाए कि धारा 299 का दूसरा या तीसरा खंड लागू होता है या नहीं। पीठ ने कहा कि अगर तीसरे चरण में परिणाम सकारात्मक है, लेकिन मामला धारा 300 में उल्लिखित किसी अपवाद के अंतर्गत आता है, तो भी अपराध गैर इरादतन हत्या होगा और आईपीसी की धारा 304 के भाग 1 के तहत दंड दिया जाएगा।
विज्ञापन
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अभियुक्त की अपील को स्वीकार करते हुए जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय का निर्णय कई आधारों पर त्रुटिपूर्ण था। मामले में आरोपी को आरोपी को निचली अदालत ने हत्या का दोषी ठहराया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने अपराध को गैर इरादतन हत्या में बदल दिया था।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: पूरे देश में एक हजार से अधिक जगहों पर कार्यक्रम करेगा आरएसएस, मोहन भागवत बताएंगे संघ के काम
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि पहली गलती यह थी कि हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद मेडिकल सबूतों की जांच की और फिर अपीलकर्ता की ओर से खुद दर्ज कराई गई एफआईआर की विषय-वस्तु के साथ सीधे उसकी पुष्टि करने की कोशिश की। गवाह का साक्ष्य सलाहकारी प्रकृति का होता है और इसका उपयोग केवल आरोपी को हत्या का दोषी ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता।
राज्य के वकील ने कहा कि अपीलकर्ता ने 2019 में पुलिस थाने में जाकर मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीठ ने कहा कि किसी भी अन्य सबूत की तरह अभियुक्त का आचरण उन परिस्थितियों में से एक है, जिस पर अदालत रिकॉर्ड में मौजूद अन्य प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विचार कर सकती है।
अदालत ने कहा कि जब भी अदालत के सामने ऐसे सवाल आएं कि अपराध हत्या है या गैर इरादतन हत्या तो इस पर तीन चरणों में विचार किया जाना चाहिए। पहले चरण में देखा जाए कि क्या अभियुक्त ने ऐसा कृत्य किया जिससे किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु हुई। पीठ ने कहा कि आरोपी के कृत्य और मृत्यु के बीच कारण का सबूत दूसरे चरण की ओर ले जाता है। इसमें यह विचार किया जाए कि क्या आरोपी का कृत्य आईपीसी की धारा 299 के तहत गैर इरादतन हत्या में आता है।
ये भी पढ़ें: एअर इंडिया की दिल्ली-मिलान उड़ान रद्द, बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में आई तकनीकी खराबी
पीठ ने कहा कि दूसरे चरण में सकारात्मक परिणाम मिलें तो तीसरे चरण में आईपीसी की धारा 300 हत्या के आवेदन पर विचार किया जाए। इस स्तर पर अदालत को यह तय करना होगा कि अभियोजन पक्ष द्वारा साबित किए गए तथ्य मामले को धारा 300 में निहित हत्या की परिभाषा के चार खंडों में से किसी के दायरे में लाते हैं या नहीं।
इसमें कहा गया है कि यदि इसका परिणाम नकारात्मक है, तो अपराध गैर इरादतन हत्या होगा। इसमें धारा 304 के पहले या दूसरे भाग के तहत दंड दिया जाएगा। साथ ही यह ध्यान रखा जाए कि धारा 299 का दूसरा या तीसरा खंड लागू होता है या नहीं। पीठ ने कहा कि अगर तीसरे चरण में परिणाम सकारात्मक है, लेकिन मामला धारा 300 में उल्लिखित किसी अपवाद के अंतर्गत आता है, तो भी अपराध गैर इरादतन हत्या होगा और आईपीसी की धारा 304 के भाग 1 के तहत दंड दिया जाएगा।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन