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विश्व बैंक की रिपोर्ट में खुलासा, 104 देशों के श्रम कानून में कुछ काम केवल पुरुषों के लिए ही आरक्षित

Sat, 04 Aug 2018 03:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 04 Aug 2018 03:19 PM IST
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According to world bank study, in 104 countries some jobs only reserved for men

दुनिया में यूं तो महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिलाने के लिए सरकारें कई तरह के प्रयास कर रही हैं। लेकिन विश्व बैंक की हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक इतने प्रयास होने के बाद भी दुनिया के 104 देशों के श्रम कानूनों में महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया है। इन कानूनों के मुताबिक रोजगार से संबंधित कई कामों को केवल पुरुषों के लिए आरक्षित किया गया है। उन कामों को महिलाएं नहीं कर सकती हैं।

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कजाकिस्तान में महिलाएं पशुओं से संबंधित कोई काम नहीं कर सकती हैं। वहीं वियतनाम में महिलाएं 50 हॉर्सपावर और उससे अधिक के ट्रक्टर नहीं चला सकतीं। कई समृद्ध देशों में कार्य स्थलों पर लिंग भेदभाव को समाप्त करने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी विकसित देशों में ऐसे भेदभावों को पूरी तरह से खत्म नहीं किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक महिलाएं सभी काम नहीं कर सकती हैं।
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विश्व बैंक में कार्यरत सारा इकबाल कहती हैं कि कई देशों ने तो ऐसी नौकरियों की एक लिस्ट ही जारी कर दी है जिन्हें महिलाओं के लिए खतरनाक बताया गया है। इनमें कई जगह महिलाएं रात की ड्यूटी नहीं कर सकती हैं। कई कार्यों को महिलाओं के लिए नैतिक रूप से अनुचित बताया गया है जैसे कजाकिस्तान में पशुओं से संबंधित काम किया जाना। चार देशों में तो महिलाएं अपना बिजनेस पंजीकृत नहीं करवा सकतीं। वहीं 18 देश तो ऐसे हैं जहां पति अपनी पत्नियों को काम करने से रोक सकते हैं।
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ये सब करने के पीछे उद्देश्य होता है महिलाओं (वीकर सेक्स) की सुरक्षा करना। कई कानूनों में तो महिलाओं को बच्चों वाली श्रेणी में डाल दिया गया है। जिनमें महिलाओं को उन कामों को करने के लिए मना किया गया है जो शारीरिक रूप से कठिन हैं जैसे कि खनन, निर्माण और उत्पादन से संबंधित काम। मुंबई जैसी जगहों पर महिला दुकानदार देर रात तक दुकानें नहीं खोल सकतीं। केवल पुरुष ही खोल सकते हैं। ऐसा भी उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है।

कई देशों में हाल ही में लगाए गए हैं प्रतिंबध

According to world bank study, in 104 countries some jobs only reserved for men

महिलाओं के रात के वक्त काम करने की पाबंदी इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के वक्त लगाई गई थी। ऐसा करने के पीछे उनका विचार था कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक कमजोर हैं। साथ ही वह कार्य के दौरान शोषण के लिए भी पुरुषों के मुकाबले कमजोर हैं। महिलाओं की क्षमता को कम आंकते हुए पुरुषों को ही उनसे बेहतर विकल्प माना जाता रहा है।

साल 1948 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संस्थान (आईएलओ) ने महिलाओं को खदानों और उद्योग से संबंधित कार्य स्थलों में रात के वक्त काम करने से दूर रहने के लिए कहा था। स्पेन ने भी साल 1995 तक महिलाओं के खदान, बिजली और निर्माण कार्य से संबंधित काम करने पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए थे। पूर्व उपनिवेशों में महिलाओं के काम करने पर प्रतिबंध आज के समय में भी लगाए जा रहे हैं जिनके पीछे का कारण साल 1960 की स्पेनिश नागरिक संहिता है।

कई कानूनों को तो हाल ही में लागू किया गया है। जैसे वियतनाम में महिलाओं का 50 हॉर्सपावर या उससे अधिक में ट्रैक्टर चलाने पर प्रतिबंध। इस कानून को साल 2013 में ही लागू किया गया था। लेकिन कई देश ऐसे भी हैं जहां उदारीकरण की नीति अपनाई जा रही है। हाल ही में बुलगारिया, किरिबाती और पोलैंड ने सभी तरह के प्रतिबंधों को हटा दिया है।

वहीं कोलंबिया और कांगो ऐसे देश हैं जिन्होंने सारे तो नहीं पर कुछ प्रतिबंधों को हटा दिया है। कई देशों ने तो तकनीकी विकास के चलते कानूनों में परिवर्तन किया है। क्योंकि तकनीकी विकास से कई तरह के काम सुरक्षित हो गए हैं, जिस कारण महिलाओं की खुद की सुरक्षा के लिए किसी पर निर्भरता कम हो गई है। तो कहीं अदालतों ने कानूनों को भेदभावपूर्ण बताते हुए उनमें बदलाव किया है।

फिलिपींस में हटा रात के वक्त काम करने पर लगा प्रतिबंध

According to world bank study, in 104 countries some jobs only reserved for men

श्रमिकों की कमी भी महिलाओं पर लगे प्रतिबंधों को हटाने में मददगार साबित हुई है। जब बहुत से पुरुषों ने केलंबिया के मरमाटो को छोड़ दिया और बेहतर रेजगार की तलाश में दूसरी जगहों पर जाने लगे तो न चाहते हुए भी महिलाओं को उनकी जगह काम पर रखना पड़ा। महिलाओं को पुरुषों की जगह रखने से कानून भी टूट रहा था पर काम चलाने के लिए मालिकों के पास और कोई दूसरा रास्ता नहीं था।

ठीक इसी तरह पूर्वी यूरोप के पुरुष ट्रकर्स जो यूरोपीय संघ से जुड़े थे, उन्होंने भी पश्चिमी देशों की तरफ जाना शुरू कर दिया। जिसके बाद न चाहते हुए भी महिलाओं को उनकी जगह काम पर रखा गया। साल 2011 में फिलिपींस में कॉल सेंटरों में काम करने के लिए महिलाओं के रात के वक्त काम करने पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया गया।

बता दें आईएलओ द्वारा महिलाओं पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को विश्व बैंक के इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया है। इसमें वो जगह शामिल हैं जहां केमिकल का काम किया जाता है। वहां गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। ताकि उनके होने वाले बच्चे की सेहत पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े। 

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