फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   According to the ministry, this summer may increase the power cuts in many states

मंत्रालय के अनुसार इस गर्मी बढ़ सकती है कई राज्यों में बिजली कटौती

Thu, 11 Apr 2019 06:01 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Thu, 11 Apr 2019 06:01 AM IST
विज्ञापन
According to the ministry, this summer may increase the power cuts in many states
सांकेतिक तस्वीर

इस गर्मी के मौसम में कई राज्यों के लोगों को बिजली कटौती झेलनी पड़ सकती है। केंद्रीय बिजली मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, संपन्नता वाले राज्यों में ज्यादा एयर कंडीशनर चलने से मांग में भारी बढ़ोतरी होती है। दिल्ली में सामान्य दिनों में 4,000 मेगावाट की खपत होती है, तो गर्मी में खपत 50 फीसदी बढ़कर 6,000 मेगावाट हो जाती है। यदि देशभर की बात करे तो बिजली की मांग 20 से 25 फीसदी बढ़ जाती है। इसके साथ ही बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों (जेनको) का बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काम) पर बकाया बढ़कर करीब 41 हजार करोड़ रुपये हो गया है, जिसके कारण भी बिजली कटौती बढ़ सकती है। 

विज्ञापन


मई-जून में जब अधिकांश घरों में एसी, कूलर और पंखे चलाने के लिए बिजली की अतिरिक्त मांग आएगी, तो बकाए वाले राज्यों में कटौती बढ़ सकती है। उस समय बिजली कंपनियां सिर्फ उन्हीं राज्यों को अतिरिक्त बिजली बेचेंगी, जो तुरंत बकाया भुगतान करेंगे। केंद्रीय बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2019 तक देश में 17 बिजली निर्माता कंपनियों का 58 बिजली वितरण कंपनियों पर 40,804 करोड़ रुपये का बकाया था। दो महीने में यह और बढ़ गया होगा। 
विज्ञापन


जनवरी की शुरूआत में देखें तो बिजली वितरण कंपनियों पर 39,400 करोड़ रुपये का बकाया था, जबकि 10,178 करोड़ रुपये की बिलिंग हुई। इस दौरान डिस्काम ने 8,776 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जिससे महीने के अंत में बकाया बढ़कर 40,804 करोड़ रुपये हो गया। इनमें से 26,052 करोड़ रुपये का बकाया 45 दिन से पुराना है, जिस पर डिस्काम को 18 फीसदी की दर से वार्षिक ब्याज भी चुकाना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


यूपी पर सबसे अधिक बकाया

उपभोक्ता के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में छह जेनको का यूपीपीसीएल पर 6,661 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसमें से 3,827 करोड़ रुपये का बकाया 45 दिन या इससे ज्यादा का है। यूपीपीसीएल पर सबसे ज्यादा बकाया एनटीपीसी का 2,665.06 करोड़ रुपये है। इसके बाद ललितपुर पावर जेनेरेशन का स्थान है, जिसका बकाया 2,084.18 करोड़ रुपये का है। एनएचपीसी का भी राज्य पर 921.60 करोड़ रुपये का बकाया है।

खुले बाजार से खरीदनी होती है बिजली

बिजली की मांग बढ़ने पर डिस्काम को खुले बाजार से बिजली खरीदकर आपूर्ति करनी पड़ती है। यदि उसके पास पैसा नहीं है, तो उनके इलाके में बिजली कटौती बढ़ेगी। वैसे भी गर्मी के दिनों में खुले बाजार में बिजली की कीमत बढ़ जाती है।


जेनको के पास हैं सीमित संसाधन

सरकारी बिजली निर्माता कंपनी एनटीपीसी के एक अधिकारी ने कहा कि जेनको के साधन सीमित हैं। इन्हें कोयला खरीदने के साथ उसकी ढुलाई के लिए मालगाड़ी के भाड़े का भुगतान तुरंत करना पड़ता है। यदि डिस्काम पैसे का भुगतान नहीं करेगी, तो वर्किंग कैपिटल के लिए भी लोन लेना होगा। वैसे भी बैंक इन दिनों बिजली कंपनियों को लोन देने में कुछ ज्यादा ही अनिच्छुक है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed