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अध्ययन: यादें संजोकर पीढ़ियों तक आगे बढ़ाते हैं बैक्टीरिया, इंसनों के खिलाफ खतरनाक संक्रमण बनने की कोशिश
Tue, 28 Nov 2023 05:37 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 28 Nov 2023 05:37 AM IST
सार
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि ई कोली बैक्टीरिया विभिन्न व्यवहारों के बारे में जानकारी एकत्र करने के तरीके के रूप में लौह स्तर का उपयोग करते हैं, जिन्हें कुछ उत्तेजनाओं के जवाब में सक्रिय किया जा सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
बैक्टीरिया यादें संजोकर रखते हैं और इसे पीढ़ियों तक आगे भी बढ़ाते हैं। ऑस्टिन में टेक्सास विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि बैक्टीरिया ऐसी यादें बना सकते हैं कि कब कौन सी रणनीति बनाई जाए जो इन्सानों के लिए खतरनाक संक्रमण का कारण बन सके।
शोधकर्ताओं ने उदाहरण देते हुए बताया कि एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोध और अन्य लाखों बैक्टीरिया एक ही सतह पर जब एक साथ आते हैं तो वे मरीज की जान का जोखिम बढ़ा देते हैं। जीवाणु कोशिकाएं यादों को बनाने और बाद की पीढ़ियों में अपनी संतानों तक पहुंचाने में इसका प्रयोग कर सकती हैं।
ई कोली खतरनाक बैक्टीरिया
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि ई कोली बैक्टीरिया विभिन्न व्यवहारों के बारे में जानकारी एकत्र करने के तरीके के रूप में लौह स्तर का उपयोग करते हैं, जिन्हें कुछ उत्तेजनाओं के जवाब में सक्रिय किया जा सकता है। यही बैक्टीरिया भारत में हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण भी है। हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने जिन प्रमुख जानलेवा बैक्टीरिया की सूची तैयार की उनमें यह शीर्ष पांच में से एक है।
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अपने झुंड को मजबूत बनाने का प्रयास
शोधकर्ता सौविक भट्टाचार्य ने बताया कि इन्सानों की तरह बैक्टीरिया में न्यूरॉन्स, सिनैप्स या तंत्रिका तंत्र नहीं होते हैं। इसलिए इन्सानों की तरह यह यादों को संभालकर नहीं रख सकते हैं, लेकिन अध्ययन से पहले शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन जीवाणुओं को अपना झुंड बनाने का अनुभव है वे समय के साथ ज्यादा क्षमतावान होकर पहले से ज्यादा मजबूत झुंड बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह शोधकर्ताओं के लिए भी हैरान कर देने जैसा था। इन्सानों की तरह बैक्टीरिया का यह व्यवहार क्यों दिखाई दे रहा है? यह जानने के लिए अध्ययन किया गया।
वातावरण से इकट्ठा करते हैं जानकारी
शोधकर्ता सौविक भट्टाचार्य ने कहा, बैक्टीरिया के पास दिमाग नहीं होता है, लेकिन वे अपने वातावरण से जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं और यदि उन्होंने उस वातावरण का अक्सर सामना किया है तो वे उस जानकारी को एकत्र कर बाद में अपने लाभ के लिए उस तक तुरंत पहुंच सकते हैं।
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शोधकर्ताओं ने उदाहरण देते हुए बताया कि एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोध और अन्य लाखों बैक्टीरिया एक ही सतह पर जब एक साथ आते हैं तो वे मरीज की जान का जोखिम बढ़ा देते हैं। जीवाणु कोशिकाएं यादों को बनाने और बाद की पीढ़ियों में अपनी संतानों तक पहुंचाने में इसका प्रयोग कर सकती हैं।
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ई कोली खतरनाक बैक्टीरिया
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि ई कोली बैक्टीरिया विभिन्न व्यवहारों के बारे में जानकारी एकत्र करने के तरीके के रूप में लौह स्तर का उपयोग करते हैं, जिन्हें कुछ उत्तेजनाओं के जवाब में सक्रिय किया जा सकता है। यही बैक्टीरिया भारत में हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण भी है। हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने जिन प्रमुख जानलेवा बैक्टीरिया की सूची तैयार की उनमें यह शीर्ष पांच में से एक है।
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अपने झुंड को मजबूत बनाने का प्रयास
शोधकर्ता सौविक भट्टाचार्य ने बताया कि इन्सानों की तरह बैक्टीरिया में न्यूरॉन्स, सिनैप्स या तंत्रिका तंत्र नहीं होते हैं। इसलिए इन्सानों की तरह यह यादों को संभालकर नहीं रख सकते हैं, लेकिन अध्ययन से पहले शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन जीवाणुओं को अपना झुंड बनाने का अनुभव है वे समय के साथ ज्यादा क्षमतावान होकर पहले से ज्यादा मजबूत झुंड बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह शोधकर्ताओं के लिए भी हैरान कर देने जैसा था। इन्सानों की तरह बैक्टीरिया का यह व्यवहार क्यों दिखाई दे रहा है? यह जानने के लिए अध्ययन किया गया।
वातावरण से इकट्ठा करते हैं जानकारी
शोधकर्ता सौविक भट्टाचार्य ने कहा, बैक्टीरिया के पास दिमाग नहीं होता है, लेकिन वे अपने वातावरण से जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं और यदि उन्होंने उस वातावरण का अक्सर सामना किया है तो वे उस जानकारी को एकत्र कर बाद में अपने लाभ के लिए उस तक तुरंत पहुंच सकते हैं।