पंजशीर में सालेह का सिर लेने पहुंचा पाकिस्तान: 30 लाख शरणार्थियों और 11 हजार तालिबानी लड़ाकों की रिहाई के बदले मांगा हिस्सा
रिटायर्ड मेजर जनरल एवं रक्षा विशेषज्ञ जीडी बख्शी के अनुसार, पाकिस्तान ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है। अमरुल्ला सालेह, जो अभी पंजशीर में मौजूद हैं, उन्होंने तालिबान को कड़ी टक्कर दी है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हजारों आतंकियों को भेजा है। बड़ी बात तो यह है कि अफगानिस्तान में पड़ोसी मुल्क ने अपने अफसरों के साथ सेना की कई यूनिटें भेजी हैं...
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अफगानिस्तान में सरकार का गठन करने के प्रयासों में जुटे तालिबान के साथ-साथ 'पड़ोसी' मुल्क पाकिस्तान की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने पंजशीर में अपनी सेना की कुछ यूनिटें भेजी हैं। तालिबान ने बाजवा के सामने यह शर्त रखी थी कि उन्हें 'पंजशीर' जीतने के बाद वहां से अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह का सिर लाना होगा। इसके अलावा पड़ोसी मुल्क ने तालिबान को वह बात याद दिलाई है कि उसने अफगानिस्तान के 30 लाख से अधिक शरणार्थियों को अपने यहां बसाया है। साथ ही करीब 11 हजार लड़ाके, जो पाकिस्तान की जेलों में बंद थे, उन्हें रिहा कर अफगानिस्तान में सुरक्षित भेज दिया है। इसके चलते अब पाकिस्तान, 'महाशक्तियों की कब्रगाह' यानी अफगानिस्तान में अपना हिस्सा मांग रहा है। आतंकी संगठन अल-कायदा ने अफगानिस्तान को, ‘महाशक्तियों की कब्रगाह’ और ‘इस्लाम का अजेय किला’, बताते हुए कहा, अब यही इस्लामी जिहाद का केंद्र होगा।
बता दें कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा, तालिबान को लेकर खासे चिंतित हैं। उनकी चिंता का कारण यह नहीं है कि वहां सरकार का गठन कब होगा और किसे कौन सा ओहदा मिलेगा। उसका फोकस तालिबानी सरकार में अपने फायदे पर है। उसे कहां से क्या मिल सकता है, पाकिस्तान केवल इसी ताक में है। दूसरा, पड़ोसी मुल्क इन प्रयासों में भी लगा है कि भारत की पहुंच, तालिबान तक न बनने पाए। इतना ही नहीं, पाकिस्तान यह भी चाह रहा है कि महाशक्तियों के अलावा दूसरे देश भी अफगानिस्तान से संपर्क करने के लिए पहले उससे बात करें।
रिटायर्ड मेजर जनरल एवं रक्षा विशेषज्ञ जीडी बख्शी के अनुसार, पाकिस्तान ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है। अमरुल्ला सालेह, जो अभी पंजशीर में मौजूद हैं, उन्होंने तालिबान को कड़ी टक्कर दी है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हजारों आतंकियों को भेजा है। बड़ी बात तो यह है कि अफगानिस्तान में पड़ोसी मुल्क ने अपने अफसरों के साथ सेना की कई यूनिटें भेजी हैं।
.Taliban got a bloody nose in Panjshir and has requested Gen Bajwa to take Panjshir for them. Have promised Gen Bajwa if his forces get them the head of amrullah saleh they will help Pak take kashmir.Maj Gen Adil Rehmani along with two SSG bns is leading the assault on Panjshir— Maj Gen (Dr)GD Bakshi SM,VSM(retd) (@GeneralBakshi) September 3, 2021
कई दिनों से तालिबान और पंजशीर के लड़ाकों के बीच भयानक लड़ाई जारी है। कई बार ऐसी सूचनाएं भी आईं कि तालिबान ने लड़ाई जीत ली है। पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह पंजशीर छोड़कर कहीं चले गए हैं। हालांकि कुछ ही घंटे बाद पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने अपना वीडियो जारी कर कहा, वे पंजशीर में ही मौजूद हैं। यहां के हालात ज्यादा अच्छे नहीं हैं। बतौर रक्षा विशेषज्ञ जीडी बख्शी, पाकिस्तानी आईएसआई चीफ खुद काबुल में हैं। उनके कई सहयोगी पंजशीर में तालिबान की तरफ से लड़ रहे हैं। पंजशीर में पाकिस्तानी सेना के दो अफसरों सहित करीब 10 जवानों के मारे जान की खबर है। दरअसल, पाकिस्तान इस मामले में इसलिए ज्यादा सक्रियता दिखा रहा है, ताकि वह अपना हिस्सा लेने की मांग प्रभावी तरीके से तालिबान के समक्ष रख सके। दूसरा, उसे तालिबान की शर्त भी पूरी करनी है। यानी पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह का सिर लाकर देना है। इसके बाद ही पाकिस्तान को सहयोग के रूप में तालिबान कुछ देगा। यहां प्रधानमंत्री इमरान खान और आर्मी चीफ बाजवा, दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। चीन की बयानबाजी भी उसे परेशान कर रही है।
अफगानिस्तान से जब अमेरिकी सेना वापस लौट रही थी, तभी पाकिस्तान के आर्मी चीफ बाजवा ने कह दिया कि हमने बुरे वक्त में तालिबान की मदद की है। पाकिस्तान, लड़ाकों की भर्ती से लेकर उन्हें हथियार एवं आर्थिक मदद देता आया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने एक बार कहा था कि पाकिस्तान ने आतंकियों के साथ अपने संबंध समाप्त नहीं किए हैं। दस हजार से अधिक लड़ाके अफगानिस्तान में प्रवेश कर चुके हैं। तालिबान का कब्जा होने के बाद पाकिस्तान ने कई बड़े आतंकियों को भी रिहा कर दिया है। मुल्ला बरादर सहित तालिबान के कई बड़े नेता पाकिस्तानी जेलों में रहे हैं।
जनरल जीडी बख्शी कहते हैं, पाकिस्तानी ले. जनरल सईद शमसार और आदिल रहमानी, पंजशीर में रह कर लड़ाई का संचालन कर रहे हैं। इससे पाकिस्तान की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। पाकिस्तान चाहता है कि तालिबान अपनी मर्जी से दूसरे देशों के साथ संबंध स्थापित न करे। चीन ने कहा, तालिबान अफगानिस्तान में 'सबको साथ लेकर' सरकार बनाए, इस बयान ने पाकिस्तान को चिंता में डाल दिया। रूस और ईरान के बयान भी पाकिस्तान को मुसीबत में डाल देते हैं।
हालांकि इन सबके बीच, तालिबानी प्रवक्ता जबीबुल्लाह मुजाहिद ने 'पाकिस्तान को तालिबान का दूसरा घर' बताकर उसे कुछ सुकून देने का प्रयास किया है। मुजाहिद ने कहा, वे अपने घर के खिलाफ कुछ नहीं होने देंगे। दूसरी ओर, अल-कायदा ने 'इस्लामिक उम्माह को अफगानिस्तान में अल्लाह की दी गई आजादी मुबारक' नाम का संदेश जारी कर दिया। इस संगठन ने लिखा, ओ अल्लाह! लेवेंट, सोमालिया, यमन, कश्मीर और दुनिया की दूसरी इस्लामी जमीनों को इस्लाम के दुश्मनों से आजाद कराओ। दुनियाभर में मुस्लिम कैदियों को आजादी दिलाओ। अल-कायदा के इस संदेश को कश्मीर से जोड़कर पड़ोसी मुल्क खुश हो रहा है।