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संसद सत्र: आप सांसद राघव चड्ढा ने बेरोजगारी-महंगाई पर सरकार को घेरा, बजट पर दो बार चर्चा का दिया प्रस्ताव

Mon, 19 Dec 2022 09:16 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Mon, 19 Dec 2022 09:16 PM IST
सार

राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि सरकार अतिरिक्त बजट की मांग लेकर सदन में आई, लेकिन दो अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होनी चाहिए। सरकार ने 40 लाख करोड़ रुपये का बजट इस साल पेश किया, लेकिन भारत के सभी मौजूदा आर्थिक सूचकांक खतरे की घंटी बजा रहे हैं।

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aap mp raghav chadha slams Centre over inflation unemployment investment farmers issue in rajya sabha
राघव चड्ढा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने सोमवार को संसद में बेरोजगारी, महंगाई, रुपये की गिरती कीमत, निजी निवेश में गिरावट, किसानों से जुड़े मुद्दों सहित कई अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि सरकार अतिरिक्त बजट की मांग लेकर सदन में आई, लेकिन दो अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होनी चाहिए। सरकार ने 40 लाख करोड़ रुपये का बजट इस साल पेश किया, लेकिन भारत के सभी मौजूदा आर्थिक सूचकांक खतरे की घंटी बजा रहे हैं।

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चड्ढा ने सदन को अहम सुझाव देते हुए कहा कि बजट पर दो बार चर्चा होनी चाहिए। एक जब बजट पेश किया जाता है और दूसरा शीतकालीन सत्र के दौरान बजट पेश होने के 7-8 महीने बाद ताकि सदन और देश की जनता जान सके कि प्रस्तुत बजट को खर्च कर देश ने क्या हासिल किया है? कितनी नौकरियां पैदा हुई? बेरोजगारी और महंगाई दर क्या है?
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आप सांसद ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था प्रमुख बीमारियों से पीड़ित है, अतिरिक्त धन स्वीकृत करने से पहले सदन और सरकार को उन पर गौर करने की जरूरत है।  उन्होंने आगे कहा कि आज सरकार सदन में 3,25,757 करोड़ रुपये मांग रही है। राघव चड्ढा ने आठ प्रमुख आर्थिक समस्याओं की ओर सदन और वित्त मंत्री का ध्यान आकर्षित किया और कहा कि ये आठ बीमारियां हैं जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ा गई है।
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देश के सामने बेरोजगारी बड़ी समस्या
राघव चड्ढा ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है, जिसकी दर पिछले 45 सालों में सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने हर साल दो करोड़ नौकरी देने का वादा किया था, नौकरी तो नहीं मिली लेकिन केंद्र सरकार ने बेरोजगारी दर में सारे रिकॉर्ड जरूर तोड़ दिए हैं।

उन्होंने कहा कि 2014 में जब भाजपा सरकार आई थी तो बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत थी जो आज बढ़कर आठ प्रतिशत हो गई है और ये सिर्फ संगठित बेरोजगारी दर है, जबकि असंगठित क्षेत्र का सरकार हिसाब तक नहीं देती है। सरकार को नौकरियों के लिए 22 करोड़ आवेदन मिले और सिर्फ सात लाख नौकरियां दी गईं। युवा देश के रूप में हम गर्व महसूस करते हैं, आज उस देश की बेरोजगारी दर युवाओं पर बोझ बन गई है।

आधार कार्ड की नहीं, उधारी कार्ड की जरूरत
देश में महंगाई को लेकर आप नेता चड्ढा ने कहा कि आज देश को आधार कार्ड नहीं बल्कि उधारी कार्ड की जरूरत है। आज देश उस महंगाई से जूझ रहा है जिसे सरकार बिना कोई कानून लाए जनता पर थोपती है। महंगाई 30 साल के उच्त स्तर पर है। थोक महंगाई की दर 12-15 प्रतिशत और खुदरा 6-8 प्रतिशत है। चड्ढा ने कहा कि वादा देश की जनता से आय बढ़ाने का था लेकिन पिछले आठ साल में जो बढ़ोतरी हुई है वह महंगाई ही है।

खराब आर्थिक नीति से विकास दर में गिरावट
चड्ढा ने आर्थिक सुधार के सरकार के वादे पर भी सवाल उठाए और कहा कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 13.5 प्रतिशत की विकास दर दूसरी तिमाही में घटकर सिर्फ 6.3 प्रतिशत पर आ गई, जोकि त्योहारी सीजन है। चौथी तिमाही यानी अगले बजट के दौरान यह और गिरकर पांच प्रतिशत रह जाएगी, जो पहले कभी नहीं हुआ। सरकार अगले वित्तीय वर्ष के लिए आठ प्रतिशत की वृद्धि दर की बात कर रही है, लेकिन विश्व बैंक और आईएमएफ का डेटा बताता है कि विकास दर 5-6 प्रतिशत के बीच रहेगी।

हर दिन 30 किसानों ने की आत्महत्या
आप सांसद चड्ढा ने संसद में किसानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बीमारी की तरह है कि पूंजीपतियों का कर्ज माफ किया जा रहा है, जबकि पिछले आठ सालों में किसानों पर कर्ज का बोझ 53 फीसदी बढ़ गया है। आज हर किसान पर औसतन 75,000 रुपये का कर्ज है। जब गरीब किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ होता है तो उसे अपमानित किया जाता है, लेकिन हजारों करोड़ रुपये डकारने वाले बड़े पूंजीपतियों को सरकार बिजनेस क्लास में विदेश भेज रही है। उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता जहर खाने को मजबूर है। वर्ष 2021-22 में 10,851 किसानों ने आत्महत्या की, यानी प्रतिदिन करीब 30 किसानों की मौत हुई। भाजपा सरकार ने किसानों से उनकी आय दोगुनी करने का वादा भी किया गया था, लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा।

रुपये में गिरावट चिंता का विषय 
राघव चड्ढा ने रुपये के मूल्य में लगातार हो रही गिरावट पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले भाजपा के बड़े नेता कहते थे कि रुपये के गिरने से देश की इज्जत गिरती है, लेकिन अब मान, प्रतिष्ठा और रुपया न्यूनतम स्तर पर आ गया है। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि रुपया गिरने के बावजूद निर्यात भी गिर रहा है, जो सामान्य नहीं है। नए स्टार्टअप्स की विफलता दर बहुत अधिक है, जो अर्थव्यवस्था के लिए आठवीं सबसे बड़ी चुनौती है।    


वित्त मंत्री से अर्थव्यवस्था से जुड़े 10 अहम सवाल 
राघव चड्ढा ने सदन और केंद्र सरकार के समक्ष 10 सवाल रखे। पहला, वित्त मंत्री क्या एक किलो आटा और एक लीटर दूध का रेट जानती हैं? दूसरा, भाजपा का 2022 का मेगा बजट रोजगार पैदा करने में विफल क्यों रहा? तीसरा, भारतीय उत्पाद इतने महंगे और आम आदमी के बजट से बाहर क्यों हैं? चौथा, कॉर्पोरेट क्षेत्र को रियायतें देने के बावजूद निजी क्षेत्र में निवेश क्यों नहीं है? पांचवां, पूंजीपतियों के कर्ज माफी और कर कटौती से कितनी नौकरियां पैदा हुईं? छठा, नई अर्थव्यवस्था यानी स्टार्टअप इकोनॉमी में भारी गिरावट और असफलता क्यों? सातवां, रुपया कब तक अपने मूल्य को दोबारा प्राप्त करेगा? आठवां, निर्यात में गिरावट क्यों? नौवां, महंगाई दर के विकास दर से अधिक होने का क्या महत्व है? दसवां, आम आदमी पर से टैक्स का बोझ कब कम होगा?

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