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'दिल्ली मॉडल' को मध्यप्रदेश में भुनाने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Updated Tue, 21 Aug 2018 12:41 PM IST
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अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे, तब उनके राजनीतिक गुरु अन्ना हजारे ने कहा था, अब अरविंद केजरीवाल को दिल्ली को एक मॉडल स्टेट के रुप में विकसित करना चाहिए। ऐसा मॉडल जो पूरे देश के लोगों को यह बता सके कि उनकी वैकल्पिक राजनीति वास्तविकता में है क्या। और उसी मॉडल के सहारे उसे देश को एक विकल्प देना चाहिए।
आज अन्ना हजारे से अरविंद केजरीवाल की दूरी बहुत ज्यादा भले ही बढ़ गई हो, अन्ना के इस चेले ने उनकी बात को पूरी करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। आम आदमी पार्टी अब अपने दिल्ली मॉ़डल के सहारे मध्यप्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री बन चुके शिवराज सिंह को पटकने की तैयारी कर रही है।
मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रुप में आलोक अग्रवाल को मैदान में उतार दिया है। वे जगह-जगह रैली कर रहे हैं और लोगों को आम आदमी पार्टी के वायदे गिना रहे हैं। पार्टी मध्यप्रदेश में 'बदली है दिल्ली, बदलेंगे मध्यप्रदेश', दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा में किये गए बदलाव, बिजली की कीमतों में की गई कमी को मुद्दा बना रही है।
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पार्टी लोगों को यह बताने में जुटी है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार आने के बाद दिल्ली के राजस्व में ईमानदारी लाने की कोशिश की है। इसका परिणाम हुआ है कि व्यापारी ईमानदारी से टैक्स दे रहे हैं और सरकार के पास जनता का काम करने के लिए खूब पैसा आ रहा है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि वह मध्य प्रदेश में भी इसी तर्ज पर ईमानदारी की राजनीति करेगी।
आम आदमी पार्टी ने 11 अगस्त को भोपाल में नौ प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करके अब तक 89 उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है। प्रत्याशियों ने अपने क्षेत्रों में प्रचार अभियान तेजी से शुरु कर दिया है। आम आदमी पार्टी के मध्य प्रदेश में चुनावी अभियान की रुपरेखा देखकर लगता है कि उसने काम दिखाने के लिए ही नहीं, प्रचार के लिए भी दिल्ली का ही मॉडल अपनाने की पूरी तैयारी कर ली है।
ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरह दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने जनता से जुड़े बिजली-पानी के मुद्दे उठाए थे, ठीक उसी तर्ज पर आप मध्यप्रदेश में भी बिजली के मुद्दे पर जनता को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश कर रही है। इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि जब उसके नेताओं ने केजरीवाल की तरह बिजली को मुद्दा बनाने की कोशिश की और प्रदर्शन किया तो पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित भटनागर, प्रदेश संगठन सचिव युवराज सिंह, प्रदेश संगठन सचिव मुकेश जायसवाल और नरेला विधानसभा प्रभारी रेहान जाफरी को गिरफ्तार कर लिया। कई नेताओं को 17 दिन जेल के बाद कोर्ट से जमानत लेनी पड़ी।
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आज अन्ना हजारे से अरविंद केजरीवाल की दूरी बहुत ज्यादा भले ही बढ़ गई हो, अन्ना के इस चेले ने उनकी बात को पूरी करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। आम आदमी पार्टी अब अपने दिल्ली मॉ़डल के सहारे मध्यप्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री बन चुके शिवराज सिंह को पटकने की तैयारी कर रही है।
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मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रुप में आलोक अग्रवाल को मैदान में उतार दिया है। वे जगह-जगह रैली कर रहे हैं और लोगों को आम आदमी पार्टी के वायदे गिना रहे हैं। पार्टी मध्यप्रदेश में 'बदली है दिल्ली, बदलेंगे मध्यप्रदेश', दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा में किये गए बदलाव, बिजली की कीमतों में की गई कमी को मुद्दा बना रही है।
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पार्टी लोगों को यह बताने में जुटी है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार आने के बाद दिल्ली के राजस्व में ईमानदारी लाने की कोशिश की है। इसका परिणाम हुआ है कि व्यापारी ईमानदारी से टैक्स दे रहे हैं और सरकार के पास जनता का काम करने के लिए खूब पैसा आ रहा है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि वह मध्य प्रदेश में भी इसी तर्ज पर ईमानदारी की राजनीति करेगी।
आम आदमी पार्टी ने 11 अगस्त को भोपाल में नौ प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करके अब तक 89 उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है। प्रत्याशियों ने अपने क्षेत्रों में प्रचार अभियान तेजी से शुरु कर दिया है। आम आदमी पार्टी के मध्य प्रदेश में चुनावी अभियान की रुपरेखा देखकर लगता है कि उसने काम दिखाने के लिए ही नहीं, प्रचार के लिए भी दिल्ली का ही मॉडल अपनाने की पूरी तैयारी कर ली है।
ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरह दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने जनता से जुड़े बिजली-पानी के मुद्दे उठाए थे, ठीक उसी तर्ज पर आप मध्यप्रदेश में भी बिजली के मुद्दे पर जनता को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश कर रही है। इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि जब उसके नेताओं ने केजरीवाल की तरह बिजली को मुद्दा बनाने की कोशिश की और प्रदर्शन किया तो पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित भटनागर, प्रदेश संगठन सचिव युवराज सिंह, प्रदेश संगठन सचिव मुकेश जायसवाल और नरेला विधानसभा प्रभारी रेहान जाफरी को गिरफ्तार कर लिया। कई नेताओं को 17 दिन जेल के बाद कोर्ट से जमानत लेनी पड़ी।
क्या एमपी में सफल होगी आप
Arvind Kejriwal, Manish Sisodia
आम आदमी पार्टी को दिल्ली को छोड़कर कहीं भी सफलता नहीं मिली। पंजाब की कुछ सफलता को छोड़ दें तो पार्टी को महाराष्ट्र, गोवा, हरियाणा, राजस्थान और उत्तरप्रदेश में कहीं भी पैर जमाने की जगह नहीं मिली। दिल्ली में अन्ना हजारे के प्रदर्शन, खुद केजरीवाल जैसे बड़े नाम का सक्रिय होना और दिल्ली की जनता का मिजाज देश की जनता से अलग होना आप के लिए फायदेमंद रहा। लेकिन क्या मध्यप्रदेश में भी पार्टी के लिए वही परिस्थितियां हैं कि वह भाजपा और कांग्रेस की जमी-जमाई जमीन पर अपना तंबू गाड़ सके।
यह सवाल पूछने पर आम आदमी पार्टी के नेता सचिन श्रीवास्तव बड़े उम्मीद के साथ बताते हैं कि दिल्ली में भी भाजपा-कांग्रेस के पैर जमे-जमाए थे। लेकिन जैसे ही लोगों को आप और केजरीवाल के रुप में एक विश्वसनीय विकल्प मिला, लोगों ने उसे आजमाया। अगर हम लोगों को यकीन दिलाने में सफल रहते हैं तो हम यहां भी सफल हो सकते हैं। उनके मुताबिक अब तो हमारे पास दिखाने के लिए दिल्ली का मॉडल सामने है।
हालांकि आप के ही कई नेता यह स्वीकार करते हैं कि दिल्ली का छोटा होना, मीडिया चैनलों की सक्रियता और खुद केजरीवाल जैसे व्यक्ति के सामने होने के कारण दिल्ली की लड़ाई आसान थी। लेकिन मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, कमलनाथ, सिंधिया जैसे लोगों के होने के कारण यहां का चुनाव आसान नहीं है। उनके संगठन की गहराई, एमपी का बहुत बड़ा होना और भाजपा-कांग्रेस के स्थापित संगठन और धनबल का सामना करना आप के लिए बड़ी चुनौती है।
यह सवाल पूछने पर आम आदमी पार्टी के नेता सचिन श्रीवास्तव बड़े उम्मीद के साथ बताते हैं कि दिल्ली में भी भाजपा-कांग्रेस के पैर जमे-जमाए थे। लेकिन जैसे ही लोगों को आप और केजरीवाल के रुप में एक विश्वसनीय विकल्प मिला, लोगों ने उसे आजमाया। अगर हम लोगों को यकीन दिलाने में सफल रहते हैं तो हम यहां भी सफल हो सकते हैं। उनके मुताबिक अब तो हमारे पास दिखाने के लिए दिल्ली का मॉडल सामने है।
हालांकि आप के ही कई नेता यह स्वीकार करते हैं कि दिल्ली का छोटा होना, मीडिया चैनलों की सक्रियता और खुद केजरीवाल जैसे व्यक्ति के सामने होने के कारण दिल्ली की लड़ाई आसान थी। लेकिन मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, कमलनाथ, सिंधिया जैसे लोगों के होने के कारण यहां का चुनाव आसान नहीं है। उनके संगठन की गहराई, एमपी का बहुत बड़ा होना और भाजपा-कांग्रेस के स्थापित संगठन और धनबल का सामना करना आप के लिए बड़ी चुनौती है।