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किताब में दावा, कांग्रेस पहली पार्टी थी जिसने अयोध्या आंदोलन का समर्थन किया था

Wed, 02 Dec 2020 07:53 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 02 Dec 2020 07:53 PM IST
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A book claims, Congress was the first political party which supported Ayodhya movement
कांग्रेस - फोटो : फाइल

लेखक विनय सीतापति ने अपनी एक नई पुस्तक में दावा किया है कि कांग्रेस ऐसी पहली राजनीतिक पार्टी थी, जिसने 1983 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर शहर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन में अयोध्या आंदोलन को ‘प्रोत्साहित’ किया था। सीतापति ने अपनी किसाब 'जुगलबंदी: द बीजेपी बिफोर मोदी' में कहा है कि यह महज संयोग नहीं था कि कांग्रेस के दो पूर्व मंत्री दाऊ दयाल खन्ना और गुलजारीलाल नंदा इस सम्मेलन में उपस्थित थे।'

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खन्ना उत्तर प्रदेश में मंत्री रहे थे, जबकि नंदा देश के तीन प्रथम प्रधानमंत्रियों (जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी) के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे थे। नंदा, 1964 में नेहरू के निधन के बाद और 1966 में शास्त्री की मृत्यु के बाद, दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने थे। किताब के अनुसार 'अयोध्या आंदोलन को प्रोत्साहित करने वाली पहली पार्टी कांग्रेस थी। आडवाणी ने भी कांग्रेस का शुरूआती समर्थन स्वीकार किया था। वहीं, इसके उलट भाजपा दूर रही थी।'

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दाऊ दयाल खन्ना ने दिया था राम मंदिर निर्माण पर जोर

सीतापति ने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की जीवनी 'हाफ लॉयन' भी लिखी है। उन्होंने अपनी नई पुस्तक में कहा है, '...जब विहिप ने 1983 में मुजफ्फरनगर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किया था, खुद को तुलसीदास के 20वीं सदी का अवतार बताने वाले दाऊ दयाल खन्ना स्टार वक्ता थे। कांग्रेस के गुलजारीलाल नंदा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उपस्थिति में खन्ना ने अपने विचार एक बार फिर से प्रकट किए, जिसमें उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण पर जोर दिया।'

हाल ही में विमोचित की गई पुस्तक में कहा गया है, 'वह खन्ना ही थे, जिन्होंने तीन उत्तर भारतीय मस्जिदों के बारे में भी मांग रखी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ये मंदिरों के ध्वंसावशेषों पर निर्मित की गई हैं।' सीतापति ने दावा किया है, 'खन्ना ने जिन मंदिरों का उल्लेख किया है, वे विभिन्न देवी-देवताओं के रहे होंगे; कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा, शिव से जुड़ा स्थान काशी और राम की जन्म स्थली अयोध्या। उन्होंने मांग की थी कि मस्जिदों को ध्वस्त करने के बाद फिर से मंदिर बनाए जाएं।'

आंदोलन का समर्थन करने वाले पहले नेता राजीव गांधी

निजी दस्तावेजों, पार्टी के दस्तावेजों, समाचार पत्रों और 200 से अधिक साक्षात्कारों के आधार पर यह पुस्तक आरएसएस, जनसंघ (जो बाद में भाजपा बन गया) की दशकों लंबी गाथा और इसके संस्थापक नेताओं, अटल बिहारी वाजपेयी व आडवाणी की साझेदारी के साथ भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी और भाजपा के वर्चस्व को बयां करती है। सीतापति ने अपनी पुस्तक में राजीव गांधी को अयोध्या आंदोलन का समर्थन करने वाले प्रथम वरिष्ठ नेता के रूप में वर्णित किया है।

पुस्तक में कांग्रेस के एक नेता का भी बयान शामिल किया गया है और कहा गया है, 'उन्होंने ये अफवाहें सुनीं थी कि इंदिरा गांधी पूजा अर्चना के लिए बाबरी मस्जिद के ताले 1983 में खोलने की योजना बना रही थीं।' हालांकि, कांग्रेस के इस नेता ने पुस्तक में अपने नाम का उल्लेख किए जाने से मना कर दिया है। उल्लेखनीय है कि बाबरी मस्जिद के ताले पूजा अर्चना के लिए एक फरवरी 1986 को खोले गए, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के फैसले के बाद किया गया।

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