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दुनिया में हर घंटे 92 लोग करते हैं खुदकुशी, मरने वालों में सबसे अधिक किसान: रिपोर्ट

Tue, 11 Sep 2018 06:52 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 11 Sep 2018 06:52 PM IST
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92 people commit suicide every hour in the world: report

दुनिया में हर साल 80 लाख यानी हर घंटे 92 लोग खुदकुशी करते हैं। इसका खुलासा सोमवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन और मेंटल हेल्थ कमिशन ऑफ कनाडा की ओर से जारी रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में दुनिया में 15-29 साल की उम्र के जितने लोगों की मौत हुई, उनमें सबसे अधिक लोगों ने खुदकुशी की थी। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2018 रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान भारत में 1.35 लाख लोगों ने खुदकुशी की।

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- 08 लाख लोग हर साल दुनिया में करते हैं खुदकुशी
- 80 फीसदी यानी 6.4 लाख कम और मध्यम आय वाले देश के लोगों ने की खुदकुशी
- 38 देशों ने बनाई है खुदकुशी जैसी अपराध को रोकने की रणनीति

सबसे अधिक जहर खाकर मरते हैं लोग

मरने वालों में सबसे अधिक 20 फीसदी लोग जहर खाकर खुदकुशी करते हैं। ऐसा करने वालों में सबसे अधिक कम और मध्यम वाले देशों में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग और किसान होते हैं। इसके अलावा मौत को गले लगाने के लिए लोग फांसी और आग भी लगा लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति खुदकुशी करने से पहले 20 बार इसका प्रयास कर चुका होता है।
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रूस में सबसे अधिक खुदकुशी करते हैं लोग

देश                        पुरुष    महिलाएं
रूस                        48.3    14.5
यूक्त्रसेन                   34.5    4.7
दक्षिण कोरिया           29.6    11.6
पोलैंड                      23.9    3.4
बेल्जियम                  22.2    9.4

भारत में यह आंकड़ा 18.5 और 14.5 है, आंकड़े प्रति एक लाख में हैं।

जवानों की मानसिक स्थिति जांचने को सीआरपीएफ ने शुरू की पहली मेंटल हेल्थ प्रोजेक्ट
जवानों में बढ़ रही खुदकुशी की रिपोर्ट के बाद सीआरपीएफ ने पहला मेंटल हेल्थ प्रोजेक्ट शुरू किया है। सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल आरआर भटनागर ने एक इंटरव्यू में कहा कि जवानों की खुदकुशी चिंता का विषय है। इसी को देखते हुए यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके लिए एम्स और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस से करार किया गया है। 
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मेंटल हेल्थ प्रोजेक्ट के जरिये जवानों की मानसिक स्थिति की जांच के लिए उनका खास तरह का टेस्ट और इंटरव्यू लिया जाएगा। पिछले साल 156 जवानों की मौत हार्ट अटैक से हुई थी, जबकि 38 ने तनाव में आकर खुदकुशी कर ली थी। वहीं, 435 की किसी अन्य कारणों से मौत हुई थी। इससे पहले 2016 में 92 जवानों की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। वहीं, 26 ने तनाव में आकर खुदकुशी कर ली और 353 ने किसी अन्य कारणों से मौत को गले लगा लिया।

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