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अध्ययन: जैव विविधता की सुरक्षा के लिए बनी 90% राष्ट्रीय नीतियां, पेशेवरों का व्यवहार बताने में हो रहीं विफल
Sun, 03 Nov 2024 05:14 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 03 Nov 2024 05:14 AM IST
सार
अध्ययन में 10 राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीतियों और कार्य योजनाओं (एनबीएसएपीएस) से 1306 नीति क्रियाओं का विश्लेषण किया गया। अध्ययन ने यह जांचा कि जैव विविधता सुरक्षा के लिए नीतियां किसे लक्षित करती हैं, कौन से व्यवहार की अपेक्षा की जाती है, कौन जिम्मेदार है और कौन से तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जैव विविधता की सुरक्षा के लिए बनाई गई लगभग 90 फीसदी राष्ट्रीय नीतियां यह साफ तौर से नहीं बतातीं कि पर्यावरण व जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए किसानों, उपभोक्ताओं, मछुआरों व इससे संबंधित अन्य पेशेवरों के व्यवहार में क्या बदलाव किए जाने चाहिए। शोधकर्ताओं का मानना है, यही वजह हो सकती है कि देश अपने संरक्षण लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पा रहे हैं। यह खुलासा पर्यावरण विज्ञान और नीति पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में हुआ है।
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यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ सरे, यूके के शोधकर्ताओं सहित टीम ने किया है। इस अध्ययन में 10 राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीतियों और कार्य योजनाओं (एनबीएसएपीएस) से 1306 नीति क्रियाओं का विश्लेषण किया गया। अध्ययन ने यह जांचा कि जैव विविधता सुरक्षा के लिए नीतियां किसे लक्षित करती हैं, कौन से व्यवहार की अपेक्षा की जाती है, कौन जिम्मेदार है और कौन से तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। शोधकर्ताओं की टीम ने अध्ययन में पाया कि केवल 11 फीसदी नीतियों में लोगों के व्यवहार में बदलाव की अहमियत का जिक्र था जिससे जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल सके।
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बदलावों के बारे में किया जाए जागरूक
यूनिवर्सिटी ऑफ सरे की मेलिसा मार्सेल और अध्ययन की सह-लेखक के मुताबिक, हम खान-पान, आवास समेत अपनी जरूरतों से जुड़े संसाधनों के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन इससे जैव विविधता को होने वाले नुकसान के बारे में नहीं सोचते। शोधकर्ताओं ने बताया कि जैव विविधता नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह जरूरी है कि यह साफ और खुले तौर पर बताया जाए कि कौन से व्यवहार में बदलाव की जरूरत है, कौन से समूह इसके लिए जिम्मेदार हैं।
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नीतियों को लागू करने के लिए और प्रयास की जरूरत
मार्सेल के मुताबिक, नीतियों को बेहतर बनाने के लिए व्यवहार विज्ञान के सिद्धांतों का इस्तेमाल करना अहम हैं। इसमें यह साफ बताना होगा कि किन व्यवहारों को बदलना है और किस समूह को लक्षित करना है। कई तरीकों और उपायों जैसे वातावरण में बदलाव करना, नियमों या दबाव का इस्तेमाल करने सहित और पेश करने होंगे। नीतियों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए अधिक लोगों या संगठनों को शामिल करना होगा।