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बदलते भारत की तस्वीर: कभी फोर्स में शामिल होने पर परिजनों को थी आपत्ति, अब करते हैं गर्व
Sun, 07 Mar 2021 04:33 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 07 Mar 2021 04:33 AM IST
सार
- डिप्टी कमांडेंट कृष्णा की 1986 में सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल के पद पर हुई थी नियुक्ति।
- सीआरपीएफ की 88 महिला बटालियन की कमांडो किसी से पीछे नहीं।
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सीआरपीएफ की 88 महिला बटालियन
- फोटो : ANI
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विस्तार
तेजी से बदलते भारत की तस्वीर में अपनी वीरता और पराक्रम का रंग भरने में सीआरपीएफ की 88 महिला बटालियन की कमांडो किसी से भी पीछे नहीं हैं। जाहिर तौर पर उनके लिए यह सफर आसान नहीं रहा है।
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केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 88 महिला बटालियन की 34 कमांडो को पिछले महीने ही ही कोबरा यूनिट में शामिल किया गया है। ये महिला कमांडो नक्सलियों से लोहा लेने के लिए कोबरा यूनिट में शामिल हुई हैं।
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88 महिला बटालियन की डिप्टी कमांडेंट कृष्णा ने कहा, 'मैं 1986 में हेड कांस्टेबल के तौर पर बल में शामिल हुई थी। उस समय व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन आज परिवारवालों को हम पर गर्व है। उन्होंने बताया कि बीजापुर और दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वह रहीं मगर कभी किसी प्रकार के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।
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वहीं, कमांडेंट नीरज बाला ने बताया कि '1200 में से 1100 महिलाएं यहां ऑपरेशनल ड्यूटी, सिग्नल, मेडिकल और अन्य प्रशासनिक सेवाओं में हैं। कमांडो को श्रीनगर सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाता है।' उन्होंने महिला कमांडो के कोबरा टीम में शामिल होने की सराहना की।
88 महिला बटालियन की स्थापना दिवस के मौके पर महिला ब्रास बैंड के तौर पर महिला कमांडो को शामिल किया गया। इन्हें बाकायदा सभी वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बता दें कि बल में पहले से ही पाइप बैंड है। सीआरपीएफ के अनुसार 88 महिला बटालियन दुनिया में अपनी तरह का पहला महिला बटालियन है।