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IJR: 84% जेलों में सुनवाई के लिए वीडियो कान्फ्रेंसिंग सुविधा, फिर भी विचाराधीन कैदियों की संख्या में कमी नहीं
Tue, 13 Sep 2022 07:16 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 13 Sep 2022 07:16 PM IST
सार
आईजेआर ने कहा कि प्रत्येक 10 में 8 कैदी अपने ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं। प्रिजन स्टैस्टिक्स इंडिया (पीएसआई) 2020 के मुताबिक 54,287 (14.6 प्रतिशत) विचाराधीन कैदियों ने करीब एक से दो साल जेल में बिताया।
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jail, jail demo
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
एक अध्ययन में पाया गया है कि वीडियो काॉन्फ्रेंस सुविधा से अदालतों से जुड़ने वाली जेलों की संख्या 2021 में बढ़कर 1102 हो गई। यह संख्या 2019 में 808 थी। लेकिन इस तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद विचाराधीन कैदियों की संख्या बहुत कम नहीं हुई है, या उनकी कैद की औसत अवधि कम नहीं हुई है।
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इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (आईजेआर) ने कहा गया है कि 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी जेलों में इस सुविधा की सौ फीसदी कवरेज दर्ज की है। जबकि चार राज्यों ने अपनी आधी जेलों में कवरेज दर्ज की। वहीं लक्षद्वीप की किसी भी जेल में यह सुविधा नहीं है।
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आईजेआर ने कहा कि प्रत्येक 10 में 8 कैदी अपने ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं। आईजेआर ने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रिजन स्टैस्टिक्स इंडिया (पीएसआई) 2020 के मुताबिक 54,287 (14.6 प्रतिशत) विचाराधीन कैदियों ने करीब एक से दो साल जेल में बिताया।
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जबकि 2021 में 56,233 (13.16 प्रतिशत) विचाराधीन कैदियों ने इतना ही समय जेल में बिताया। 2010 में केवल 30,040 (12.5 प्रतिशत) विचाराधीन कैदियों ने एक से दो साल जेल में बिताए।
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट को हर साल टाटा ट्रस्ट के द्वारा प्रकाशित किया जाता है जिसमें उपलब्ध सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2021 तक सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में से 19 में 185 प्रतिशत से 100.2 प्रतिशत तक भीड़भाड़ थी और जेल की कुल आबादी में से 77 प्रतिशित विचाराधीन विचाराधीन कैदी थे। जो कि 2010 के बाद से दोगुना है।
दिल्ली के जेलों में 91 प्रतिशत कैदी विचाराधीन हैं। यानी हर 10 में से 9 विचाराधीन कैदी अपने मुकदमे के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 24,033 विचाराधीन कैदी 3 से 5 वर्षों से अंदर हैं, जबकि 11,490 विचाराधीन कैदियों को पांच वर्ष से भी अधिक का समय हो गया है।