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स्वच्छ गंगा: मोक्षदायिनी गंगा में बह रहा है 80 प्रतिशत निर्मल जल, नमामि गंगे मिशन के महानिदेशक ने किया दावा

Wed, 27 Sep 2023 08:46 PM IST
शशिधर पाठक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Wed, 27 Sep 2023 08:46 PM IST
सार

जी. अशोक कुमार का दावा है कि मोक्ष दायिनी गंगा की उपनदियों को छोड़ दें तो उसमें 80 प्रतिशत तक निर्मल जल बह रहा है। जैव विविधता लौट रही है और फन्ना(प्राणिसमूह) और फलोरा(वनस्पतियों) पर विशेष ध्यान के साथ 100 घाटों पर हर रोज आरती हो रही है।

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80 per cent of clean water flowing into Mokshadayini Ganga, claims Namami Gange Mission Director
गंगा नदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मानव सभ्यता जल स्रोतों के किनारे फली,फूली और आकार लिया। नमामि गंगे मिशन के महानिदेशक और विशेष सचिव जी अशोक कुमार इसी कड़ी में एक बड़ा दावा कर रहे हैं। अमर उजाला से विशेष बातचीत में जी. अशोक कुमार का दावा है कि मोक्ष दायिनी गंगा की उपनदियों को छोड़ दें तो उसमें 80 प्रतिशत तक निर्मल जल बह रहा है। जैव विविधता लौट रही है और फन्ना(प्राणिसमूह) और फलोरा(वनस्पतियों) पर विशेष ध्यान के साथ 100 घाटों पर हर रोज आरती हो रही है। 2600 स्थानीय नालों से गंदा जल नहीं गिर रहा है और मार्च 2024 तक करीब 3800 एमएलडी प्रतिदिन गंदा जल, कचरे को गंगा में गिरने से रोकने में सफलता मिल जाएगी।

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विशेष सचिव ने एक दावा और किया है। वह कहते हैं कि कानपुर में डालफिन मछली देखी जा सकती है। वहां शीशामऊ नाला से एक बूंद भी गंगा में कचरा और गंदा जल नहीं गिर रहा है। रोहू और भारतीय मछलियों के साथ गंगा में घड़ियाल, कछुए पारिस्थितिकी में अनुकूलता पाने लगे हैं। वह कहते हैं कि कोई भी चाहे तो हरिद्वार से लेकर स्वच्छ होती चली जा रही गंगा को कानपुर, प्रयाग, बनारस और इसके आगे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल तक तक देख सकता है।  पश्चिम बंगाल में भी गंगा में हिल्सा मछली मिलेगी। 70 हजार के करीब छोड़ी गई हैं।, 90 लाख अन्य भारतीय मछलियों को छोड़कर गंगा की जैव विविधता को मजबूत किया और पिछले साल इसके लिए 893 घडिय़ाल भी छोड़े। इससे पहले भी 500-600 छोड़े गए थे। इन सभी पर नजर रखी जा रही है और रीयल टाइम मानिटरिंग भी की जा रही है। खास बात यह है कि सभी जीव जैव पारिस्थितिकी के अनुकूल होने की खुद गवाही भी दे रहे हैं।  
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गंगा के जल को नहाने लायक बनाएंगे, पीने का पानी तो जलबोर्ड देगा
विशेष बातचीत के दौरान विशेष सचिव कहते हैं कि उनका लक्ष्य गंगा के पानी को नहाने लायक बनाना है। गंगा की पारिस्थितिकी को जीवित और प्रफुल्लित रखना है। इसके लिए गांगा के किनारे एफआरआई देहरादून की देखरेख में 30 हजार हेक्टेयर में वनस्पतियां, पेड़-पौधे लगाए जा रहे हैं। अशोक कुमार के मुताबिक अभी तक कई जगहों पर गंगा का पानी प्रदूषण के कारण बिल्कुल काला हो जाता था। वह बताते हैं कि नमामि गंगे मिशन के तहत वह उनका विभाग इसके पानी को नहाने के लायक बनाने का उत्तरदायी है। इसे पीने लायक बनाने की वह कोई गारंटी नहीं लेते। यह काम देश के जल बोर्डों और नगर निगमों का है।
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बजट अब तक खर्च न हो पाया और ऊपर से दावा कि प्रधानमंत्री के विजन से आई क्रांति
गंगा को निर्मल बनाने की परियोजना के लिए वित्तीय मदद विश्व बैंक कर रहा है। खुद अशोक कुमार कहते हैं कि इसके लिए विश्व बैंक ने 2011 में एक अरब डालर की फंडिंग की थी। वह मनमोहन सिंह की सरकार की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं कि 2013 तक इस दिशा में कोई खास काम नहीं हुआ था। हालांकि डीपीआर बनने, स्वच्छ गंगा मिशन के अमली जामा पहनने से जुड़े कई सवालों पर वह कुछ साफ नहीं कह पाते। फंड के सदुपयोग को लेकर भी अशोक कुमार के पास खुलकर अभी जवाब नहीं हैं। वह बस इतना बताते हैं कि तीन-चार सालों से गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान में काफी तेजी आई है। अभी विश्व बैंक द्वारा मिले अनुदान का 80 प्रतिशत हिस्सा ही उपयोग में लाया जा सका है। जी अशोक कुमार बताते हैं कि गंगा में 2034 तक 6500 एमएलडी प्रतिदिन कचरा और गंगा जल गिरने से रोकने का लक्ष्य रखा गया है। इसे केन्द्र में रखकर हम बड़ी सफलता की ओर हैं। इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र में भी भारत के प्रयास की सराहना हो रही है।

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