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कार्बन उत्सर्जन बढ़ा रहा है सीमेंट, बायो कंक्रीट से होगा पर्यावरण का भला
Thu, 20 Dec 2018 07:05 PM IST
अनिल पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अनिल पांडेय
Updated Thu, 20 Dec 2018 07:05 PM IST
सार
- कंक्रीट का इस्तेमाल 8 हजार साल पहले हुआ था।
- पोर्टलैंड सीमेंट जिनसे बनी हैं पुराने जमाने की इमारतें
- फिलहाल विश्वभर में सीमेंट के उपयोग के तौर पर नए विकल्पों को भी ढूंढा जा रहा है
- साल 2016 में, वैश्विक सीमेंट उत्पादन में 2.2 अरब टन कार्बनडाई ऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
पूरी दुनिया में पानी के बाद अगर किसी चीज की सबसे अधिक खपत होती है तो वह है सीमेंट की। पूरी दुनिया के जगमगाते शहर दरअसल ईंट और सीमेंट के जंगल हैं। अगर प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन की बात करें तो उनमें भी यह प्रमुख है। शोध से पता चला है कि विश्व के कुल कार्बन उत्सर्जन का फीसदी सीमेंट से ही होता है। सीमेंट से पर्यावरण को होने वाला नुकसान वर्तमान समय में वैश्विक चिंता का विषय बन गया है।
दुनिया की भव्य इमारतों के निर्माण में सीमेंट कंक्रीट का उपयोग होता है। अधिकतर टावर, पार्किंग, पुल और बांध के निर्माण में मुख्य सामग्री के तौर पर सीमेंट का ही उपयोग किया जाता है। सिडनी का ओपेरा हाउस हो या फिर दिल्ली का कमल मंदिर या फिर दुबई का बुर्ज खलीफा यह सारी इमारतें सीमेंट से ही बनी हैं।
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हालांकि चीन में अब इसकी खपत पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल सीमेंट का उभरता हुआ बाजार दक्षिण-पूर्व एशिया और उप-सहारा अफ्रीका है । बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक विकास के चलते तेजी से निर्माण कार्य हो रहे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगले 40 सालों में दुनिया की इमारतों का फ्लोर एरिया (जमीन का क्षेत्रफल) दोगुना होने का अनुमान है। शोधकर्ताओं इसके लिए साल 2030 तक सीमेंट के उत्पादन में एक चौथाई वृद्धि की जरूरत होगी।
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जानें पर्यावरण के लिए खतरा बन रहे सीमेंट से जुड़ी बातें
पिछले दिनों जलवायु परिवर्तन सम्मेलन-सीओपी24 में बड़े सीमेंट उद्योगपति पोलैंड में जुटे। यहां जलवायु परिवर्तन के लिए हुए पेरिस समझौते की जरूरतों को पूरा करने के तरीकों पर भी विमर्श हुआ। कंक्रीट का मुख्य घटक सीमेंट है। कार्बन उत्सर्जन में विमानन ईंधन का योगदान 2.5% से ज्यादा है।
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दुनिया की भव्य इमारतों के निर्माण में सीमेंट कंक्रीट का उपयोग होता है। अधिकतर टावर, पार्किंग, पुल और बांध के निर्माण में मुख्य सामग्री के तौर पर सीमेंट का ही उपयोग किया जाता है। सिडनी का ओपेरा हाउस हो या फिर दिल्ली का कमल मंदिर या फिर दुबई का बुर्ज खलीफा यह सारी इमारतें सीमेंट से ही बनी हैं।
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1990 के बाद से सीमेंट उत्पादन में 4 गुना बढ़ोतरी
सीमेंट सिर्फ इमारतों के निर्माण के लिए ही नहीं उपयोग की जाती हैं बल्कि इसकी कुछ अनूठी खासियते भी हैं जिन्होंने 1950 के दशक से वैश्विक सीमेंट उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद की है। एशिया और चीन में 1990 के बाद से इस क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि हुई है। 1950 के बाद से इसके उत्पादन में 30 गुना और 1990 के बाद से चार गुना बढ़ोतरी हुई है। 20वीं सदी में चीन ने 2011 से 2013 के बीच सीमेंट का अमेरिका से भी ज्यादा इस्तेमाल किया है।हालांकि चीन में अब इसकी खपत पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल सीमेंट का उभरता हुआ बाजार दक्षिण-पूर्व एशिया और उप-सहारा अफ्रीका है । बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक विकास के चलते तेजी से निर्माण कार्य हो रहे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगले 40 सालों में दुनिया की इमारतों का फ्लोर एरिया (जमीन का क्षेत्रफल) दोगुना होने का अनुमान है। शोधकर्ताओं इसके लिए साल 2030 तक सीमेंट के उत्पादन में एक चौथाई वृद्धि की जरूरत होगी।
हजारों साल पहले शुरू हो गया था कंक्रीट का इस्तेमाल
कहते हैं कि कंक्रीट का इस्तेमाल 8 हजार साल पहले हुआ था। सीरिया और जॉर्डन के व्यापारी फर्श, इमारतें और जमीन के नीचे जलाशय बनाने में कंक्रीट का इस्तेमाल करने लगे। उन्होंने 113-125 ई. में पैनतिअन का निर्माण किया, जो बिना किसी सहारे के खड़ा 43 मीटर डायमीटर वाला दुनिया का सबसे बड़ा कंक्रीट का गुंबद है। आधुनिक समय में जिस सीमेंट का इस्तेमाल हो रहा है उसका काफी हद तक श्रेय 19वीं सदी में लीड्स के जोसफ एसफिन पर जाता है।
सीमेंट
- फोटो : File Photo