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स्कूलों में भाषा और गणित में 75 फीसदी सवाल हल होने जरूरी
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 22 Jul 2018 01:48 AM IST
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देशभर के स्कूलों में भाषा और गणित विषय में छात्रों के पिछड़ेपन की रिपोर्ट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर सरकार ने स्कूली शिक्षा में सुधार का खाका तैयार किया है। इसे ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ एसपिरेशनल डिस्ट्रिक का नाम दिया गया है, जिसके तहत 28 राज्यों के 100 जिलों में अगस्त से पहली से दसवीं कक्षा में सुधार के लिए आठ बिंदुओं पर काम होगा। खास बात है कि तीसरी, पांचवीं व आठवीं कक्षा तक के छात्रों को अब 75 फीसदी सवालों को हल करना जरूरी होगा।
केंद्र ने 28 राज्यों के 100 जिलों की स्कूली शिक्षा में सुधार का तैयार किया खाका
सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, तीसरी, पांचवीं व आठवीं कक्षा में लर्निंग आउटकम के तहत भाषा और गणित विषय में सुधार पर फोकस होगा। उक्त दोनों विषयों में छात्रों को लर्निंग आउटकम परीक्षा में 75 फीसदी सवालों का जवाब देना जरूरी होगा। परीक्षा के रिजल्ट के आधार पर शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग भी मुहैया करवाई जाएगी। शिक्षकों व छात्रों की हाजिरी सौ फीसदी पहुंचाई जाएगी।
आठ बिंदुओं पर फोकस, सत्र शुरू होने के 30 दिन में किताबें करवानी होंगी मुहैया
सत्र शुरू होने के 30 दिन के भीतर किताबें मुहैया करवाने आदि पर काम होगा। भारत में पंद्रह साल तक बेटियों की साक्षरता दर महज 59.3 फीसदी है, जिसे सौ फीसदी तक पहुंचाना है। आठवीं कक्षा के बाद अधिकतर छात्राएं पढ़ाई छोड़ देती हैं। बेटियों को स्कूल से जोड़ने की जिम्मेदारी डीसी, जिला परिषद, सीईओ, रिटायर शिक्षक और एनएसएस कार्यकर्ताओं की रहेगी। योजना में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नीति आयोग, पंचायती राज व ग्रामीण विकास मंत्रालय मिलकर काम करेंगे।
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पांचवीं और आठवीं के बाद सीधा दाखिला नहीं
कोई भी स्कूल पांचवीं और आठवीं के बाद सीधे दाखिला नहीं दे सकता है, बल्कि परीक्षा लेनी जरूरी होगी। सभी स्कूलों में तीसरी, चौथी, पांचवीं, छठी, सातवीं व आठवीं कक्षा के छात्रों को एनसीईआरटी के नेशनल असेसमेंट परीक्षा में भाग लेना पड़ेगा।
पढ़ाई में कमजोर छात्रों को मिलेगी एक्सट्रा कोचिंग
स्कूलों को पढ़ाई में कमजोर छात्रों की पहचान करते हुए उन्हें एक्सट्रा कोचिंग देनी होगी। स्कूलों पर जिला शिक्षा अधिकारी और उन पर राज्य सरकार निगरानी करेगी, जबकि एनसीईआरटी देशभर में सभी राज्यों में नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए लर्निंग आउटकम के तहत पढ़ाने में बदलाव व शिक्षकों को कोचिंग आदि की निगरानी करेगी।
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केंद्र ने 28 राज्यों के 100 जिलों की स्कूली शिक्षा में सुधार का तैयार किया खाका
सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, तीसरी, पांचवीं व आठवीं कक्षा में लर्निंग आउटकम के तहत भाषा और गणित विषय में सुधार पर फोकस होगा। उक्त दोनों विषयों में छात्रों को लर्निंग आउटकम परीक्षा में 75 फीसदी सवालों का जवाब देना जरूरी होगा। परीक्षा के रिजल्ट के आधार पर शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग भी मुहैया करवाई जाएगी। शिक्षकों व छात्रों की हाजिरी सौ फीसदी पहुंचाई जाएगी।
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आठ बिंदुओं पर फोकस, सत्र शुरू होने के 30 दिन में किताबें करवानी होंगी मुहैया
सत्र शुरू होने के 30 दिन के भीतर किताबें मुहैया करवाने आदि पर काम होगा। भारत में पंद्रह साल तक बेटियों की साक्षरता दर महज 59.3 फीसदी है, जिसे सौ फीसदी तक पहुंचाना है। आठवीं कक्षा के बाद अधिकतर छात्राएं पढ़ाई छोड़ देती हैं। बेटियों को स्कूल से जोड़ने की जिम्मेदारी डीसी, जिला परिषद, सीईओ, रिटायर शिक्षक और एनएसएस कार्यकर्ताओं की रहेगी। योजना में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नीति आयोग, पंचायती राज व ग्रामीण विकास मंत्रालय मिलकर काम करेंगे।
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पांचवीं और आठवीं के बाद सीधा दाखिला नहीं
कोई भी स्कूल पांचवीं और आठवीं के बाद सीधे दाखिला नहीं दे सकता है, बल्कि परीक्षा लेनी जरूरी होगी। सभी स्कूलों में तीसरी, चौथी, पांचवीं, छठी, सातवीं व आठवीं कक्षा के छात्रों को एनसीईआरटी के नेशनल असेसमेंट परीक्षा में भाग लेना पड़ेगा।
पढ़ाई में कमजोर छात्रों को मिलेगी एक्सट्रा कोचिंग
स्कूलों को पढ़ाई में कमजोर छात्रों की पहचान करते हुए उन्हें एक्सट्रा कोचिंग देनी होगी। स्कूलों पर जिला शिक्षा अधिकारी और उन पर राज्य सरकार निगरानी करेगी, जबकि एनसीईआरटी देशभर में सभी राज्यों में नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए लर्निंग आउटकम के तहत पढ़ाने में बदलाव व शिक्षकों को कोचिंग आदि की निगरानी करेगी।