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दिल्ली के 605 निजी स्कूलों पर लटकी एनजीटी की तलवार, मान्यता रद्द होने का खतरा
Thu, 16 May 2019 09:42 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 16 May 2019 09:42 PM IST
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देश की राजधानी दिल्ली में लगभग 605 निजी स्कूलों को सरकार से मिली मान्यता छिन सकती हैं। इसके पीछे कारण यह है कि इन स्कूलों ने अबतक पांच लाख रुपये का पर्यावरण से जुड़ा मुआवजा नहीं जमा कराया है। दिल्ली सरकार से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों से वर्षा जल संरक्षण की व्यवस्था करने संबंधी नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश को लागू करने में ये स्कूल नाकाम रहे हैं।
गौरतलब है कि एनजीटी ने साल 2017 में दिल्ली सरकार समेत सभी निजी स्कूलों और कॉलेजों को निर्देश दिया था कि वे अपने परिसर में वर्षा जल संरक्षण की व्यवस्था करें। इसके लिए उन्हें दो महीनों का समय दिया गया था। साथ ही कहा गया था कि इसका खर्च उन्हें खुद उठाना होगा। ग्रीन पैनल ने तब कहा था कि जो भी संस्थान इसका पालन नहीं करेगा उसे पर्यावरण के नाम पर पांच लाख रुपये मुआवजा देना होगा।
जानकारी के मुताबिक करीब 331 निजी स्कूलों ने एनजीटी के आदेश को लागू करने की दिशा में अबतक कुछ काम तक शुरू नहीं किया है। वहीं 274 निजी स्कूलों में संरक्षण प्लांट अभी काम करने योग्य स्थिति में नहीं हैं।
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साल 2017 से अबतक स्कूलों को कई बार पैसा भरने को कहा गया, लेकिन ज्यादातर स्कूलों ने इस आदेश की अवहेलना की। अब अधिकारियों की तरफ से आखिरी नोटिस भेजा गया है और तीन दिनों के भीतर पैसा जमा करने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर स्कूल इसबार चूके तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें उनकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
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गौरतलब है कि एनजीटी ने साल 2017 में दिल्ली सरकार समेत सभी निजी स्कूलों और कॉलेजों को निर्देश दिया था कि वे अपने परिसर में वर्षा जल संरक्षण की व्यवस्था करें। इसके लिए उन्हें दो महीनों का समय दिया गया था। साथ ही कहा गया था कि इसका खर्च उन्हें खुद उठाना होगा। ग्रीन पैनल ने तब कहा था कि जो भी संस्थान इसका पालन नहीं करेगा उसे पर्यावरण के नाम पर पांच लाख रुपये मुआवजा देना होगा।
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जानकारी के मुताबिक करीब 331 निजी स्कूलों ने एनजीटी के आदेश को लागू करने की दिशा में अबतक कुछ काम तक शुरू नहीं किया है। वहीं 274 निजी स्कूलों में संरक्षण प्लांट अभी काम करने योग्य स्थिति में नहीं हैं।
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साल 2017 से अबतक स्कूलों को कई बार पैसा भरने को कहा गया, लेकिन ज्यादातर स्कूलों ने इस आदेश की अवहेलना की। अब अधिकारियों की तरफ से आखिरी नोटिस भेजा गया है और तीन दिनों के भीतर पैसा जमा करने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर स्कूल इसबार चूके तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें उनकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है।