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2100 तक 558 और स्तनधारी जीव विलुप्त हो जाएंगे, एक रिपोर्ट का दावा

Sun, 13 Sep 2020 09:27 AM IST
Tanuja Yadav रिसर्च टीम, अमर उजाला, नई दिल्ली
रिसर्च टीम, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 13 Sep 2020 09:27 AM IST
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558 Mammal organism will extinct till 2100 a report from various scientist claimed
स्तनधारी जीवों का विलुप्तिकरण (सांकेतिक फोटो) - फोटो : अमर उजाला

साल 2100 आने तक पृथ्वी से 558 और स्तनधारी जीव विलुप्त हो जाएंगे। विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों की मिली जुली टीम के की ओर से तैयार की गई नई रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है कि पूरी पृथ्वी से जीवों के खत्म होने का दौर शुरू होने वाला है। इसे 1.26 लाख साल में जीवों के विलुप्त होने की रफ्तार के मुकाबले 1700 गुना तेज माना जा रहा है।

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विश्व के स्तनधारी जैव विविधता डाटाबेस के अनुसार इस समय धरती पर स्तनधारी वर्ग के 6,495 जीव हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया के सभी हिस्सों में जीवों का खात्मा होगा। अब तक हुए अध्ययनों के अनुसार, बीते 1.26 लाख वर्ष में पृथ्वी से 550 स्तनधारी जीव विलुप्त हुए हैं।
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ऐसे में अगले मात्र 80 सालों में 558 और जीवों का लुप्त हो जाना एक बहुत बड़ा नुकसान है। इन्हें बचाने के लिए संरक्षण के उपायों को बेहद सख्ती से लागू करने की सिफारिश का गई है, हालांकि इस दिशा में अब तक हुए कमजोर प्रयासों को देखते हुए, वैज्ञानिक बहुत उम्मीद नहीं जता रहे हैं।
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साइंस एडवांसेस पत्रिका में प्रकाशित इस रिपोर्ट को स्वीडन के गॉटनबर्ग विश्वविद्यालय स्विस फ्रीबर्ग विश्वविद्यालय और ब्रिटेन की जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन और रॉयल बॉटेनिक गार्डन के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है।
  
विलुप्तिकरण का दूसरा दौर कई जगह शुरू 
वैज्ञानिकों के अनुसार 2100 तक विलुप्तिकरण का दौर पूरी पृथ्वी पर शुरू हो चुका होगा। अब तक की सबसे तेज गति से सदा के लिए जीव खत्म हो जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया और कैरेबियाई देशों में यह दौर शुरू हो चुका है। प्रकृति को जो व्यापक नुकसान हो रहा है। उसके मुकाबले स्तनधारियों का विलुप्त होना पानी में डूबे किसी हिमखंड की चोटी को देखने जैसा है।

उम्मीद सरकारों के साझे कार्यक्रम से
रिपोर्ट में सरकारों के बीच जैव विविधता और इको सिस्टम को बचाने के लिए हो रहे प्रयासों से थोड़ी उम्मीद जताई जा रही है। जंगल बचाना, समुद्री क्षेत्रों के उपयोग के नियम कड़े करना और प्रदूषण रोकना आदि के लिए कहा गया है। प्रश्न है कि क्या हम अपनी आने वाली नस्लों को ये प्रजातियां दिखा पाने के लिए बचा पाएंगे।

  
सभी के खात्मे के लिए मानव जिम्मेदार
रिपोर्ट में इन जीवों के खात्मे के पीछे मानव को जिम्मेदार बताया गया है। अपने अवतरण के बाद से ही मानव ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है। ऊर्जा की असीमित जरूरत और प्राकृतिक संसाधनों का लालच भरा दोहन साल-दर-साल जीवों को खात्मे की और धकेल रहा है।

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