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ताउते तूफान: मुंबई में बार्ज पर काम कर रहे 49 लोगों की मौत, शिवसेना ने की पेट्रोलियम मंत्री से इस्तीफे की मांग

Sat, 22 May 2021 03:03 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sat, 22 May 2021 03:03 PM IST
सार

शिवसेना ने अरब सागर में तेल के कुओं पर काम करने वाले 49 मजदूरों की मौत पर पेट्रोलियम मंत्री से इस्तीफे की मांग की है। शिवसेना ने इस घटना को लापरवाही बताया है और ओएनजीसी के खिलाफ सदोष मानव वध के आरोप में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है

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49 people working on barge in Mumbai died due to Tauktae Storm Shivsena demands resignation from Petroleum Minister Dharmendra Pradhan
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ताउते तूफान के दौरान मुंबई के पास अरब सागर में डूबे बार्ज P305 पर काम करने वाले 49 लोगों की मौत तब हो गई, जब वे बार्ज (एक सपाट तल वाली नाव) पर थे। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के शनिवार (22 मई) के संपादकीय संस्करण में इस दुर्घटना को लेकर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा है। सामना के लेख में शिवसेना ने सवाल उठाया, ‘पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कहां हैं? क्या वह जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा देने वाले हैं या नैतिकता के मुद्दे केवल आपके राजनीतिक विरोधियों के लिए ही हैं? क्या आप तैरती लाशों पर बैठकर घी ही खाओगे? 

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ओएनजीसी को भी घेरा
इतना ही नहीं, शिवसेना ने इस घटना को लेकर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) को भी घेरा है। शिवसेना ने ओएनजीसी के खिलाफ सदोष मानव वध का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उसका कहना है कि बेगुनाह मजदूरों की मौत के पीछे ओएनजीसी की लापरवाही है। सामना में लिखा गया, ‘तूफान की पूरी चेतावनी मौसम वैज्ञानिकों ने दी थी फिर भी ओएनजीसी ने चेतावनी की अनदेखी करके बार्ज पर काम कर रहे 700 मजदूरों को वापस नहीं बुलाया। बार्ज डूब गया और 75 मजदूरों की मौत हो गई। 49 शव मिल गए हैं और 26 लोग लापता हैं।’
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तलाश अभियान जारी
एक अन्य सूचना के अनुसार दुर्घटना में अभी भी 37 लोग लापता हैं, जिनकी तलाश में नौसेना और तटरक्षक बल लगा हुआ है। शिवसेना ने अपने सामना के संपादकीय लेख में आगे लिखा, ‘देश के पेट्रोलियम मंत्री, ओएनजीसी के अध्यक्ष और संचालक मंडल की इस दुर्घटना में कुछ जिम्मेदारी है या नहीं? इतने बड़े तूफान से होने वाले नुकसान का पूर्वानुमान होने के बावजूद उन्होंने ऐहतियातन क्या उपाय किए? इसकी जांच होना आवश्यक है। जिस तैरते हुए प्लेटफॉर्म (बार्ज) पर कर्मचारी थे, वह बार्ज दुरुस्त नहीं था। संकट के समय जान बचाने के लिए कोई सुविधा और आपातकालीन व्यवस्था भी नहीं थी। कर्मचारी तूफान आने से पहले ही मौत के जबड़े में काम कर रहे थे। कर्मचारी तूफान के आने तक अपने भाग्य के भरोसे बचे थे, लेकिन जब तूफान ने प्रहार किया तब भाग्य ने साथ नहीं दिया। इसलिए उनमें से 75 लोग मौत के समंदर में हमेशा के लिए समा गए।’
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शिवसेना ने अपराधियों के लिए की सजा की मांग
शिवसेना ने अपने लेख में कहा है कि उत्तर प्रदेश, बिहार की गंगा से मुंबई के समुद्र तक तैरने वाले सैकड़ों शवों की आंतरिक मौत झकझोरने वाली है। गंगा में शवों को समाधि दी तो मुंबई के समुद्र में जिंदा इंसानों को डूबने दिया। यह प्रकृति का प्रकोप न होकर सदोष मानव वध है। सदोष मानव वध की जिम्मेदारी तूफान पर नहीं डाली जा सकती है। तूफान आने की जानकारी पहले से होने के बावजूद जो लोग सोए रहे, वही अपराधी हैं और उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए। 


एफआईआर दर्ज
शिवसेना ने आगे लिखा कि नौसेना और कोस्ट गार्ड के वीरों ने बचाव कार्य नहीं किया होता तो बार्ज पर मौजूद 700 लोग हमेशा के लिए पानी में डूब गए होते। ये तमाम लोग भले एक निजी कंपनी के कर्मचारी होंगे, लेकिन वे ओएनजीसी के लिए तेल उत्खनन कर रहे थे इसलिए उनकी रक्षा की जिम्मेदारी ओएनजीसी प्रशासन की ही थी। इस मामले में बार्ज के इंजीनियर मुस्तफिजुर रहमान शेख की तहरीर पर मुंबई के येलो गेट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी बार्ज के कप्तान राकेश बल्लव ने बार्ज पर काम कर रहे कर्मचारियों की जान खतरे में डाली। इसी आधार पर राकेश बल्लव और अन्य पर धारा 30(2), 338 के तहत एफआईआर दर्ज हुई है। फिलहाल राकेश लापता है, उसकी तलाश जारी है।

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