Congress convention: महाधिवेशन के 48 घंटे पहले कांग्रेस-भाजपा में जुबानी जंग, विदेश मंत्री से पूछे ये सवाल
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विस्तार
कांग्रेस पार्टी का महाधिवेशन रायपुर में 24 फरवरी को शुरू हो रहा है। इसके 48 घंटे पहले कांग्रेस और भाजपा, एक दूसरे पर जोरदार तरीके से हमला बोल रहे हैं। दोनों दलों के इस हमले में चीन, इंदिरा गांधी, बाइडन, अर्थनीति और कूटनीति जैसे शब्द आ गए हैं। महाधिवेशन से पहले छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पदाधिकारियों के यहां ईडी के छापे पड़े हैं। इसके बाद भाजपा की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर के एक साक्षात्कार ने दोनों दलों के बीच तल्खी बढ़ा दी है। विदेश मंत्री ने कहा, मैं वायनाड के एमपी से चीन से जुड़ी जानकारियों को सुनने के लिए तैयार हूं, अगर उन्हें चीन के बारे में शानदार ज्ञान हो। इसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने जयशंकर पर भारत की विदेश नीति को विफल करने का आरोप लगा दिया। कांग्रेस नेत्री ने कहा, बाइडन के राष्ट्रपति के रूप में अपना आधा कार्यकाल लगभग पार कर लेने के बावजूद, भारत में कोई अमेरिकी राजदूत नहीं है।
महासचिव केसी वेणुगोपाल का कहना था कि जब भी कांग्रेस पार्टी का अधिवेशन या भारत जोड़ो यात्रा जैसा कोई आयोजन होता है, तो भाजपा उसे डिस्टर्ब करने का प्रयास करती है। रायपुर अधिवेशन से पहले कांग्रेस नेताओं के घरों एवं दफ्तरों पर ईडी की रेड होती है। अभी यह मामला ठंडा नहीं पड़ा था कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साक्षात्कार ने कांग्रेस पार्टी को उकसा दिया। विदेश मंत्री ने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मैं वायनाड के एमपी के साथ चीन से जुड़ी जानकारियां सुनने के लिए तैयार हूं, अगर उन्हें चीन के बारे में शानदार ज्ञान हो। इससे पहले राहुल गांधी ने कहा था कि जयशंकर को विदेशी मामलों की ज्यादा जानकारी नहीं है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कह दिया, अदाणी मामले की पोल खुलने के भय से भाजपा लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। भारत जोड़ो यात्रा की सफलता से भाजपा में बौखलाहट है।
जयशंकर ने कहा, चीन द्वारा जिस क्षेत्र में पुल बनाया जा रहा है, वह क्षेत्र चीन के कब्जे में कब आया। चीन ने पहली बार 1958 में उस क्षेत्र में कदम रखा था। 1962 के अक्तूबर माह में चीन ने उस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। क्या 1962 में किए गए कब्जे का दोष, साल 2023 में पीएम मोदी को देंगे। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, मैं बता दूं कि हम चीन से नहीं डरते। अगर हम डरते हैं तो भारतीय सेना को चीन बॉर्डर पर किसने भेजा। ये सेना राहुल गांधी ने नहीं भेजी, नरेंद्र मोदी ने भेजी है। केंद्र सरकार ने चीन से लगते बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए अपने खर्च में पांच गुना की बढ़ोतरी की है। जयशंकर ने अपने साक्षात्कार में पीएम इंदिरा गांधी को लेकर भी एक बयान दे दिया। इसमें उन्होंने कहा, मेरे पिता डॉ. के सुब्रमण्यम उस वक्त कैबिनेट सेक्रेटरी थे। 1980 में जब इंदिरा गांधी दोबारा से सरकार में आईं, तो सबसे पहले उन्हें ही पद से हटाया गया। बतौर जयशंकर, मेरे पिता बहुत ईमानदार शख्स थे। इसी वजह से वे कभी सेक्रेटरी नहीं बन सके। इसके बाद जब राजीव गांधी, पीएम बने तो उनके पिता से जूनियर अधिकारी को कैबिनेट सेक्रेटरी बना दिया गया।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने बुधवार को एक प्रेसवार्ता में विदेश मंत्री पर आरोपों की झड़ी लगा दी। जयशंकर को असफल विदेश मंत्री करार दिया गया। श्रीनेत ने कहा, चीन में सबसे लंबे समय तक राजनयिक रहने के बावजूद जयशंकर हर मोर्चे पर विफल रहे हैं। उन्होंने सवाल भरे लहजे में कहा, चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर, विदेश मंत्री ने क्यों चुप्पी साध ली थी। क्या प्रधानमंत्री मोदी ने बॉर्डर पर घुसपैठ को लेकर उनकी सलाह से यह बात कही थी कि कोई नहीं आया है। चीन ने 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है। चीन, कब्जे वाले इलाके में सड़कें, रेलवे नेटवर्क और पुल बना रहा है। ऐसे में भारत, चीन के साथ व्यापार बढ़ा रहा है। इसका मतलब वह चीनी पीएलए को फंडिंग कर रहा है। श्रीनेत ने विदेश मंत्री जयशंकर के उस बयान की भी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने भारत को एक छोटी अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा था कि बड़ी अर्थव्यवस्था से लड़ना आसान नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता ने इसे तिरस्कार भरा बयान बताया है। जयशंकर ने भारत की विदेश नीति को विफल बनाया है। भारत में लंबे समय से कोई अमेरिकी राजदूत नहीं है।