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Manipur: मणिपुर की इंफाल घाटी में 48 घंटे के बंद से सामान्य जनजीवन प्रभावित, सरकारी व निजी कार्यालय भी रहे बंद

Fri, 23 May 2025 10:43 AM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 23 May 2025 10:43 AM IST
सार

Manipur Strike: मणिपुर में मैतेई संगठन की ओर से बुलाए गए बंद के कारण शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। इंफाल घाटी के पांच जिलों में इसका असर देखा गया। इस दौरान सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान, सरकारी और निजी कार्यालय बंद रहे और सार्वजनिक परिवहन सड़कों से नदारद रहा। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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48-hour bandh affects normal life in Manipur's Imphal valley
मणिपुर बंद - फोटो : amarujala.com

विस्तार

सरकारी बस से राज्य का नाम हटाए जाने के विरोध में मैतेई संगठन समन्वय समिति मणिपुर अखंडता (सीओसीओएमआई) की ओर से आहूत 48 घंटे के राज्यव्यापी बंद का इंफाल घाटी में व्यापक असर पड़ा।शुक्रवार को दूसरे दिन घाटी के पांच जिलों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। इस दौरान सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान, सरकारी और निजी कार्यालय बंद रहे तथा सार्वजनिक परिवहन सड़कों से नदारद रहा।

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चिकित्सा संबंधी आपातकालीन स्थिति और शिरुई लिली महोत्सव में भाग लेने के लिए उखरुल जिले में जाने वाले लोगों को छोड़कर, किसी भी अन्य निजी वाहन को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं है। बिष्णुपुर और थौबल जिलों के विभिन्न हिस्सों में कई महिला बंद समर्थकों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के वाहनों को रोका और सुरक्षा वाहनों के विंडशील्ड पर "मणिपुर/कंगलीपाक" चिपका दिया। कंगलीपाक मणिपुर का प्राचीन नाम है।

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बंद समर्थकों ने दो किलोमीटर तक मशाल जुलूस निकाला 

शुक्रवार सुबह इंफाल पूर्वी जिले के एंड्रो पार्किंग, कोंगबा और खुरई इलाकों में सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं ने अपनी दुकानें खोल ली थीं, लेकिन बंद समर्थकों ने उन्हें अपनी दुकानें बंद करने को कहा। बंद समर्थकों ने इंफाल पश्चिम जिले के उरीपोक, सिंगजामेई और क्वाकेथेल में बंद कराया।

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गुरुवार रात बंद समर्थकों ने दो किलोमीटर तक मशाल जुलूस निकाला और नारे लगाए कि "मणिपुर को नष्ट नहीं किया जा सकता।" राजभवन की ओर जाने वाले सभी स्थानों पर केंद्रीय बलों के जवानों को तैनात किया गया है। मणिपुर सरकार ने बुधवार को उन आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं जिनमें कहा गया है कि शिरुई लिली महोत्सव में पत्रकारों को ले जा रही बस में सुरक्षाकर्मियों ने राज्य का नाम कवर करने के लिए मजबूर किया।

आरोप है कि सुरक्षा बलों ने सरकारी बस को रोक दिया था, जिस पर सरकार मंगलवार को उखरूल जिले में पर्यटन महोत्सव को कवर करने के लिए पत्रकारों को ले जा रही थी, और सूचना व जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर) के कर्मचारियों को बस के शीशे पर लिखे राज्य के नाम को सफेद कागज से ढकने के लिए मजबूर किया था।

सरकार ने बंद के कारण की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की

गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, सरकार ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की है और कहा है कि वह "20 मई को ग्वालटाबी चेकपोस्ट के निकट मणिपुर शिरुई उत्सव को कवर करने के लिए मीडियाकर्मियों को ले जा रही सुरक्षाकर्मियों और मणिपुर राज्य सड़क परिवहन बस से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच करेगी।"



इसमें कहा गया है, "समिति किसी चूक की जांच करेगी और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उपाय सुझाएगी।"  इसमें कहा गया है कि आयुक्त (गृह) एन अशोक कुमार और सचिव टीएच किरण कुमार सिंह वाली समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

डीजीपी, मुख्य सचिव और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग 

घटना पर आक्रोश के बीच, सीओसीओ ने बुधवार आधी रात से 48 घंटे की आम हड़ताल का आह्वान किया और राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से माफी मांगने तथा सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह, डीजीपी राजीव सिंह और मुख्य सचिव प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे की मांग की। सीओसीओएमआई के संयोजक खुरैजम अथौबा ने कहा, "मणिपुर को राज्य बस से हटाने का निर्णय मणिपुर विरोधी है, यह मणिपुर के विचार और इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह से चुनौती देता है।"

उन्होंने कहा, "मणिपुर के लोग यह जानना चाहते हैं कि किसके अधिकार के तहत यह निर्णय लिया गया। इसे 48 घंटे के भीतर जनता के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए।" शिरुई लिली महोत्सव दो वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित किया जा रहा है। मैतेई और कुकी समुदाय के बीच चले लंबे जातीय संघर्ष बुरी तरह प्रभावित राज्य, राष्ट्रपति शासन के बीच सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है। एन बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद फरवरी में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।

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