फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   450 projects in infrastructure sector cost over Rs 4.28 lakh crore due to delay

बुनियादी संरचना क्षेत्र की 450 परियोजनाओं की लागत देरी की वजह से 4.28 लाख करोड़ रुपये बढ़ी

Wed, 27 Jan 2021 04:27 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 27 Jan 2021 04:27 AM IST
विज्ञापन
450 projects in infrastructure sector cost over Rs 4.28 lakh crore due to delay
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

बुनियादी संरचना क्षेत्र की 150 करोड़ रुपये ये अधिक की लागत वाली 450 परियोजनाओं के देर हो जाने से इनकी सम्मिलित अनुमानित लागत 4.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गइ है। एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई।

विज्ञापन


सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय 150 करोड़ रुपये और उससे अधिक मूल्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी करता है। इस तरह की 1,687 परियोजनाओं में से 558 परियोजनाएं देरी से चल रही हैं, जबकि 450 की लागत बढ़ गई है।
विज्ञापन


मंत्रालय के द्वारा दिसंबर 2020 के लिए जारी हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘इन 1,687 परियोजनाओं के क्रियान्वयन की कुल मूल लागत 21,44,627.66 करोड़ रुपये थी। इनके पूरा होने तक की अनुमानित लागत 25,72,670.28 करोड़ रुपये होने की संभावना है, जो कि कुल लागत से 4,28,042.62 करोड़ रुपये (मूल लागत का 19.96 प्रतिशत) अधिक है।’
विज्ञापन
विज्ञापन


मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2020 तक इन परियोजनाओं पर कुल खर्च 12,17,692.37 करोड़ रुपये था, जो परियोजनाओं की अनुमानित लागत का 47.33 प्रतिशत है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि पूरा होने की नई सारिणी के आधार पर देखें तो विलंबित परियोजनाओं की संख्या घटकर 408 हो जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, 558 विलंबित परियोजनाओं में से 111 परियोजनाओं में एक से 12 महीने और 135 परियोजनाओं में 13 से 24 महीने की देरी हुई है। इनके अलावा 187 परियोजनाएं 25-60 महीने और 125 परियोजनाएं 61 महीने या इससे अधिक की देरी में हैं। इन 558 विलंबित परियोजनाओं की औसत देरी 45 महीने है।


विभिन्न परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा दी गई जानकारियों के अनुसार, देरी की मुख्य वजहें भूमि अधिग्रहण में विलंब, वन व पर्यावरण मंजूरी मिलने में विलंब, बुनियादी ढांचे की कमी आदि शामिल हैं। इनके अलावा परियोजना के वित्त पोषण की समस्याएं, विस्तृत इंजीनियरिंग को अंतिम रूप दिए जाने में देरी, स्वरूप में बदलाव, निविदा में देरी, उपकरणों की आपूर्ति में व्यवधान तथा कानून व व्यवस्था की दिक्कतों के चलते भी कुछ परियोजनाएं देर हो जाती हैं।

रिपोर्ट में परियोजनाओं में देरी की एक वजह राज्यों के द्वारा लगाए गए लॉकडाउन को भी बताया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed