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कौन चाहता है कि संसद न चले? राज्यसभा का 44 फीसदी काम चढ़ा हंगामे की भेंट
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
Updated Mon, 26 Mar 2018 06:12 AM IST
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gst lok sabha
- फोटो : PTI
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गत शुक्रवार को अधिकतर सांसद सुबह साढे़ दस बजे संसद पहुंच गए। लॉबी में रखे हाजिरी रजिस्टर पर दस्तखत कर वे 11 बजे से पहले ही लोकसभा और राज्यसभा में अपनी-अपनी सीट पर बैठ गए। छह मिनट भी नहीं बीते थे कि हंगामे के चलते दोनों सदन स्थगित कर दिए गए। लोकसभा फिर बैठी 12 बजे, लेकिन बमुश्किल सात मिनट बाद ही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
पिछले तीन सप्ताह से यही हो रहा है। अलग अलग राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों को लेकर संसद की कार्रवाई बाधित कर रहे हैं। मार्च में राज्यसभा कुल मिलाकर पांच घंटे भी नहीं चली। लोकसभा तो इतनी भी नहीं चल पाई। तेरह मार्च को विपक्षी सांसद हंगामा करते रहे और लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति से सरकार ने 99 मंत्रालयों और विभागों का बजट-2018 संशोधनों सहित महज 30 मिनट में पारित करा लिया। इसी दौरान दो बिल भी पास करा लिए गए जिनमें राजनीतिक दलों को विदेशों से पिछले 42 सालों के दौरान मिले चंदे को हर तरह की जांच से मुक्त करने का विधेयक और सांसदों, राष्ट्रपति व राज्यपालों की सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव भी था।
ऐसा इतिहास में सिर्फ तीसरी बार हुआ है कि बजट बिना किसी चर्चा के ही पास कर लिया गया हो। उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकसभा के तीन उप चुनावों में बीजेपी के हारने के बाद विपक्ष के हौसले बुलंद हैं। अब वे संसद ठप करने की जगह चाहते हैं कि संसद चले और वे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएं। इस प्रस्ताव पर बहस के दौरान उन्हें सरकार के खिलाफ संसद में मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा।
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सरकार के पक्ष में संख्या बल है। 543 सदस्यों वाली लोकसभा में भाजपा के अपने 273 सांसद हैं। सहयोगियों को मिलाकर यह संख्या कहीं ज्यादा हो जाती है। यानी सरकार को कोई खतरा नहीं है। फिर भी न संसद चल पा रही है और न अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हो पा रही है।
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पिछले तीन सप्ताह से यही हो रहा है। अलग अलग राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों को लेकर संसद की कार्रवाई बाधित कर रहे हैं। मार्च में राज्यसभा कुल मिलाकर पांच घंटे भी नहीं चली। लोकसभा तो इतनी भी नहीं चल पाई। तेरह मार्च को विपक्षी सांसद हंगामा करते रहे और लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति से सरकार ने 99 मंत्रालयों और विभागों का बजट-2018 संशोधनों सहित महज 30 मिनट में पारित करा लिया। इसी दौरान दो बिल भी पास करा लिए गए जिनमें राजनीतिक दलों को विदेशों से पिछले 42 सालों के दौरान मिले चंदे को हर तरह की जांच से मुक्त करने का विधेयक और सांसदों, राष्ट्रपति व राज्यपालों की सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव भी था।
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ऐसा इतिहास में सिर्फ तीसरी बार हुआ है कि बजट बिना किसी चर्चा के ही पास कर लिया गया हो। उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकसभा के तीन उप चुनावों में बीजेपी के हारने के बाद विपक्ष के हौसले बुलंद हैं। अब वे संसद ठप करने की जगह चाहते हैं कि संसद चले और वे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएं। इस प्रस्ताव पर बहस के दौरान उन्हें सरकार के खिलाफ संसद में मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा।
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सरकार के पक्ष में संख्या बल है। 543 सदस्यों वाली लोकसभा में भाजपा के अपने 273 सांसद हैं। सहयोगियों को मिलाकर यह संख्या कहीं ज्यादा हो जाती है। यानी सरकार को कोई खतरा नहीं है। फिर भी न संसद चल पा रही है और न अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हो पा रही है।
पहली बार है कि अध्यक्ष सदन चलाने में रुचि नहीं ले रहे हैं
rajya sabha
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह कहते हैं कि पहली बार है कि अध्यक्ष सदन चलाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। पहले एक या दो घंटे के लिए सदन स्थगित किया जाता था और इस बीच अध्यक्ष सत्तापक्ष और विपक्ष से बात कर सदन चलाने का रास्ता निकालते थे। लेकिन अब तो वे दिन भर के लिए ही सदन स्थगित करने के लिए संसद आते हैं।
पिछले दो दिन से कांग्रेस सहित लगभग पूरा विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर हंगामा करने से परहेज कर रहा है लेकिन टीआरएस और अन्नाद्रमुक के मुट्ठी भर सांसदों के हंगामे से संसद ठप पड़ी है। सरकार उन्हें मनाने या समझाने का कोई प्रयास ही नहीं कर रही है।
हाल तक एनडीए के सदस्य रहे शेतकारी संघ के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद राजू शेट्टी कहते हैं कि यूपीए के कार्यकाल में हंगामा होने पर तत्कालीन मनमोहन सिंह और गुलाम नबी आजाद खुद विपक्षी नेताओं से बात कर कुछ रास्ता निकालने की कोशिश करते थे। लेकिन इस बार बीजेपी कोई प्रयास ही नहीं कर रही है। लग रहा है कि वह खुद नहीं चाहती कि नीरव मोदी और अविश्वास प्रस्ताव पर कोई चर्चा हो।
बजट सत्र यूं तो 6 अप्रैल तक चलना है। राज्यसभा का कार्यकाल पूरा कर रहे 59 सांसदों में से जो दोबारा चुन कर नहीं आ पा रहे हैं उनका विदाई भाषण 26 मार्च को होगा। अगर इसी तरह गतिरोध जारी रहा तो सत्र समय से पहले ही खत्म किया जा सकता है।
पिछले दो दिन से कांग्रेस सहित लगभग पूरा विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर हंगामा करने से परहेज कर रहा है लेकिन टीआरएस और अन्नाद्रमुक के मुट्ठी भर सांसदों के हंगामे से संसद ठप पड़ी है। सरकार उन्हें मनाने या समझाने का कोई प्रयास ही नहीं कर रही है।
हाल तक एनडीए के सदस्य रहे शेतकारी संघ के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद राजू शेट्टी कहते हैं कि यूपीए के कार्यकाल में हंगामा होने पर तत्कालीन मनमोहन सिंह और गुलाम नबी आजाद खुद विपक्षी नेताओं से बात कर कुछ रास्ता निकालने की कोशिश करते थे। लेकिन इस बार बीजेपी कोई प्रयास ही नहीं कर रही है। लग रहा है कि वह खुद नहीं चाहती कि नीरव मोदी और अविश्वास प्रस्ताव पर कोई चर्चा हो।
बजट सत्र यूं तो 6 अप्रैल तक चलना है। राज्यसभा का कार्यकाल पूरा कर रहे 59 सांसदों में से जो दोबारा चुन कर नहीं आ पा रहे हैं उनका विदाई भाषण 26 मार्च को होगा। अगर इसी तरह गतिरोध जारी रहा तो सत्र समय से पहले ही खत्म किया जा सकता है।
संसद की कार्रवाई पर खर्च
Rajya Sabha
- फोटो : PTI
मार्च में संसद को पंद्रह दिन चलना था। हर दिन कम से कम छह घंटे। यानी कुल 90 घंटे। राज्यसभा पांच घंटे चली और लोकसभा तीन घंटे। यानी दोनों को मिलाकर 172 घंटे बर्बाद हुए। यानी 320 मिनट। हर मिनट ढाई लाख का खर्च आता है संसद की कार्रवाई पर। यानी इस महीने संसद न चलने से 258 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
लोकसभा
5 मार्च - प्रश्नकाल भी रद्द। कुल पंद्रह मिनट के हंगामे के बाद स्थगित
छह मार्च - 10 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित
7 मार्च - नौ मिनट के हंगामे के बाद स्थगित।
8 मार्च - 15 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित।
9 मार्च - 15 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित।
12- 14 मिनट की हंगामा
13 मार्च - नौ मिनट
14 मार्च - पैंतीस मिनट चली कार्रवाई। वित्त विधेयक (बजट) पारित
15 मार्च - बीस मिनट
16 मार्च - 15 मिनट हंगामा
19 मार्च - 10 मिनट हंगामे के बाद स्थगित
20 मार्च - सात मिनट
21 मार्च - 9 मिनट
22 मार्च - छह मिनट
23 मार्च - 13 मिनट
राज्यसभा
5 मार्च - कई चरणों में 25 मिनट का हंगामा
6 मार्च - 15 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित।
7 मार्च - 10 मिनट
8 मार्च - महिला दिवस पर एक घंटे की चर्चा
9 मार्च - 10 मिनट
12 मार्च - छह मिनट का हंगामा
13 मार्च - 17 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित
14 मार्च - 10 मिनट चली
15 मार्च - सोलह मिनट में स्थगित
16 मार्च - पौन घंटे तक चली
19 मार्च - सात मिनट में ही स्थगित
20 मार्च - छह मिनट
21 मार्च - आठ मिनट
22 मार्च - छह मिनट
23 मार्च - पांच मिनट में स्थगित
किन मुद्दों पर हंगामा
बजट सत्र के दौरान
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस - नीरव मोदी और राफेल डील
अन्ना डीएमके - कावेरी जलविवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रोक
तेलगू देशम और वाईआरएस कांग्रेस - आंध्र प्रदेश के विशेष राज्य का दर्जा
तेलंगाना राष्ट्र समिति - आरक्षण को लेकर एक देश एक नीति हो
मोदी के पहले चार सालों के दौरान
ललित मोदी के वसुंधरा राजे और सुषमा स्वराज से रिश्ते
मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले में संदिग्ध मौतें
दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या
उत्तर प्रदेश में गोहत्या के चलते अखलाक की हत्या
गोहत्या मामले में गुजरात में दलितों की पिटाई
विजय माल्या के देश छोड़कर भागने पर
गुजरात चुनाव के दौरान मोदी के मनमोहन सिंह पर पाकिस्तान से साठगांठ के बयान पर
तीन तलाक़ विधेयक पर
मनमोहन सिंह के अंतिम चार सालों के दौरान
2जी घोटाला
कॉमनवेल्थ घोटाला
कोलमाइंस (कोलगेट) घोटाला
शीतकालीन सत्र 2017
राज्यसभा का 44 फीसदी काम हंगामे की भेंट चढ़ा
लोकसभा के पंद्रह घंटे बर्बाद
लोकसभा में 12, राज्यसभा में 9 बिल पारित
राज्यसभा में अटकने वाले मुख्य बिल
तीन तलाक
जीएसटी संशोधन बिल
एनसीआर संशोधन बिल
पारित होने वाले मुख्य बिल
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जज वेतन भत्ता संशोधन विधेयक
दिवालिया शोधन अक्षमता बिल
संपत्ति अधिग्रहण अर्जुन बिल
केंद्रीय सड़क निधि संशोधन बिल
मानसून सत्र 2017
औसत उपस्थिति - लोकसभा 81 फीसदी, राज्यसभा 80 फीसदी
समय बर्बाद - लोकसभा 30 घंटे, राज्यसभा 28 घंटे
राज्यसभा में पारित बिल - 14
लोकसभा में पारित बिल - 9
पारित होने बिल - आईआईटी पीपीपी बिल, नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा बिल, कंपनी संशोधन विधेयक, बैंकिंग विनिमय बिल, नाबार्ड संशोधन विधेयक
अटके बिल
भगोड़ा आर्थिक अपराधी बिल, चिटफंड संशोधन बिल, उपभोक्ता संरक्षण बिल, नेगोशिएबल इंस्ट्रमेंट्स बिल, नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल, मुस्लिम महिलाओं के विवाह के अधिकारों का संरक्षण (तीन तलाक) बिल, नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजुकेशन (संशोधन) विधेयक जैसे कई महत्वपूर्ण बिल
सांसदों के वेतन भत्ते
मासिक वेतन - 50,000 रुपये
दैनिक भत्ता - 2000 रुपये
संवैधानिक भत्ता - 45000 प्रतिमाह
कार्यालय भत्ता - 45000 प्रतिमाह
यात्रा भत्ता - हवाई मार्ग से 75 फीसदी छूट (सील में 34 यात्राओं के लिए), एसी फर्स्ट क्लास में मुफ्त रेल यात्रा, सड़क मार्ग से 16 रुपये प्रति किलोमीटर
कपड़े धोने का - 25000 रुपये महीना
तीन लैंडलाइन फ़ोन मुफ्त - 1,50,000 कॉल
थ्रीजी सुविधा के साथ दो मोबाइल फोन
कार खरीदने के लिए चार लाख का ब्याजरहित कर्ज
नहीं चाहिए भत्ता
दस दिन पहले आप के तीनों राज्यसभा सांसदों ने हंगामे के चलते सभापति से आग्रह किया था कि ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के नियम के चलते वे उतने दिन का दैनिक भत्ता नहीं लेगें, जितने दिन संसद नहीं चलेगी। बुधवार को भाजपा के लोकसभा सांसद और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी ऐसा ही पत्र अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के लिखा है। लेकिन सांसदों का दैनिक भत्ता केवल दो हजार रुपये प्रतिदिन ही होता है और वह भी उतने दिन का जितने दिन संसद चलती है।
लोकसभा
5 मार्च - प्रश्नकाल भी रद्द। कुल पंद्रह मिनट के हंगामे के बाद स्थगित
छह मार्च - 10 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित
7 मार्च - नौ मिनट के हंगामे के बाद स्थगित।
8 मार्च - 15 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित।
9 मार्च - 15 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित।
12- 14 मिनट की हंगामा
13 मार्च - नौ मिनट
14 मार्च - पैंतीस मिनट चली कार्रवाई। वित्त विधेयक (बजट) पारित
15 मार्च - बीस मिनट
16 मार्च - 15 मिनट हंगामा
19 मार्च - 10 मिनट हंगामे के बाद स्थगित
20 मार्च - सात मिनट
21 मार्च - 9 मिनट
22 मार्च - छह मिनट
23 मार्च - 13 मिनट
राज्यसभा
5 मार्च - कई चरणों में 25 मिनट का हंगामा
6 मार्च - 15 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित।
7 मार्च - 10 मिनट
8 मार्च - महिला दिवस पर एक घंटे की चर्चा
9 मार्च - 10 मिनट
12 मार्च - छह मिनट का हंगामा
13 मार्च - 17 मिनट के हंगामे के बाद स्थगित
14 मार्च - 10 मिनट चली
15 मार्च - सोलह मिनट में स्थगित
16 मार्च - पौन घंटे तक चली
19 मार्च - सात मिनट में ही स्थगित
20 मार्च - छह मिनट
21 मार्च - आठ मिनट
22 मार्च - छह मिनट
23 मार्च - पांच मिनट में स्थगित
किन मुद्दों पर हंगामा
बजट सत्र के दौरान
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस - नीरव मोदी और राफेल डील
अन्ना डीएमके - कावेरी जलविवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रोक
तेलगू देशम और वाईआरएस कांग्रेस - आंध्र प्रदेश के विशेष राज्य का दर्जा
तेलंगाना राष्ट्र समिति - आरक्षण को लेकर एक देश एक नीति हो
मोदी के पहले चार सालों के दौरान
ललित मोदी के वसुंधरा राजे और सुषमा स्वराज से रिश्ते
मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले में संदिग्ध मौतें
दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या
उत्तर प्रदेश में गोहत्या के चलते अखलाक की हत्या
गोहत्या मामले में गुजरात में दलितों की पिटाई
विजय माल्या के देश छोड़कर भागने पर
गुजरात चुनाव के दौरान मोदी के मनमोहन सिंह पर पाकिस्तान से साठगांठ के बयान पर
तीन तलाक़ विधेयक पर
मनमोहन सिंह के अंतिम चार सालों के दौरान
2जी घोटाला
कॉमनवेल्थ घोटाला
कोलमाइंस (कोलगेट) घोटाला
शीतकालीन सत्र 2017
राज्यसभा का 44 फीसदी काम हंगामे की भेंट चढ़ा
लोकसभा के पंद्रह घंटे बर्बाद
लोकसभा में 12, राज्यसभा में 9 बिल पारित
राज्यसभा में अटकने वाले मुख्य बिल
तीन तलाक
जीएसटी संशोधन बिल
एनसीआर संशोधन बिल
पारित होने वाले मुख्य बिल
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जज वेतन भत्ता संशोधन विधेयक
दिवालिया शोधन अक्षमता बिल
संपत्ति अधिग्रहण अर्जुन बिल
केंद्रीय सड़क निधि संशोधन बिल
मानसून सत्र 2017
औसत उपस्थिति - लोकसभा 81 फीसदी, राज्यसभा 80 फीसदी
समय बर्बाद - लोकसभा 30 घंटे, राज्यसभा 28 घंटे
राज्यसभा में पारित बिल - 14
लोकसभा में पारित बिल - 9
पारित होने बिल - आईआईटी पीपीपी बिल, नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा बिल, कंपनी संशोधन विधेयक, बैंकिंग विनिमय बिल, नाबार्ड संशोधन विधेयक
अटके बिल
भगोड़ा आर्थिक अपराधी बिल, चिटफंड संशोधन बिल, उपभोक्ता संरक्षण बिल, नेगोशिएबल इंस्ट्रमेंट्स बिल, नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल, मुस्लिम महिलाओं के विवाह के अधिकारों का संरक्षण (तीन तलाक) बिल, नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजुकेशन (संशोधन) विधेयक जैसे कई महत्वपूर्ण बिल
सांसदों के वेतन भत्ते
मासिक वेतन - 50,000 रुपये
दैनिक भत्ता - 2000 रुपये
संवैधानिक भत्ता - 45000 प्रतिमाह
कार्यालय भत्ता - 45000 प्रतिमाह
यात्रा भत्ता - हवाई मार्ग से 75 फीसदी छूट (सील में 34 यात्राओं के लिए), एसी फर्स्ट क्लास में मुफ्त रेल यात्रा, सड़क मार्ग से 16 रुपये प्रति किलोमीटर
कपड़े धोने का - 25000 रुपये महीना
तीन लैंडलाइन फ़ोन मुफ्त - 1,50,000 कॉल
थ्रीजी सुविधा के साथ दो मोबाइल फोन
कार खरीदने के लिए चार लाख का ब्याजरहित कर्ज
नहीं चाहिए भत्ता
दस दिन पहले आप के तीनों राज्यसभा सांसदों ने हंगामे के चलते सभापति से आग्रह किया था कि ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के नियम के चलते वे उतने दिन का दैनिक भत्ता नहीं लेगें, जितने दिन संसद नहीं चलेगी। बुधवार को भाजपा के लोकसभा सांसद और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी ऐसा ही पत्र अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के लिखा है। लेकिन सांसदों का दैनिक भत्ता केवल दो हजार रुपये प्रतिदिन ही होता है और वह भी उतने दिन का जितने दिन संसद चलती है।