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भारत में रोजाना मिट्टी के तेल की आग से मर जाती हैं 400 महिलाएं

Wed, 28 Nov 2018 07:21 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Updated Wed, 28 Nov 2018 07:21 PM IST
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400 women die every day from kerosene oil fire in India
सांकेतिक तस्वीर

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत बीपीएल परिवारों की 58023370 महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन जारी करने का दावा किया है, लेकिन आज भी देश में खाना बनाने के लिए बड़े पैमाने पर मिट्टी के तेल वाला स्टोव ही इस्तेमाल हो रहा है। नतीजा, हर साल छह लाख से ज्यादा महिलाएं स्टोव की आग से जल रही है। अगर रोजाना की बात करें तो लगभग चार सौ महिलाएं आग की चपेट में आने से दम तोड़ देती हैं। 

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इंटरनेशनल सोसायटी फॉर बर्न इंजुरीज 'आईएसबीआई' की बुधवार को रिलीज हुई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट पेश करते हुए आईएसबीआई के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. राजीव बी आहूजा ने कहा, भारत में प्रत्येक वर्ष जलने के कारण 7-8 लाख मरीज अस्पतालों में भर्ती होते हैं। जलने वालों में निम्न सामाजिक आर्थिक वर्ग की महिलाएं तो बहुत उच्च जोखिम में होती हैं। इसके अलावा, आग लगने की सबसे बड़ी वजह मिट्टी तेल के प्रेशर वाला स्टोव फटना बताया गया है।
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अमेरिका में 2011 के बाद आग से जलकर मरने के केवल 5 फीसदी मामले बढ़े तो भारत में 50 प्रतिशत इजाफा...

- 2011 में अमेरिका की जनसंख्या 300 मिलियन थी तो भारत की 1.2 बिलियन यानी चार गुणा ज्यादा
- जलने के केसों की गंभीरता अमेरिका में 80 से 20 फीसदी पर आई तो भारत में यह 50 के आंकडे पर ही टिकी रही
- यूएस में आग से जलने वाले 45 हजार मरीज अस्तपताल में पहुंचे तो अपने देश में एक लाख 80 हजार अस्पताल में भर्ती हुए
- अमेरिका में सालाना 2250 लोगों की जलने से मौत होती है, जबकि भारत में 180000 लोग मारे जाते हैं
- अमेरिका में बर्न बेड्ज़ 1950 तो भारत में महज 400-500
- भारत में रोजाना पांच सौ लोगों की जलने से जान चली जाती है
- नेपाल में आठ फीसदी जनसंख्या दिव्यांग हो गई है, इसमें आग का प्रतिशत पांच है
- भारत में जलने के कारण 5 मिलियन लोग दिव्यांगों की श्रेणी में आ गए हैं 

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना...एक नजर में

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मार्च 2016 को यूपी के बलिया से उज्ज्वला योजना की शुरुआत की थी
-इसके तहत 2018-19 तक बीपीएल परिवारों की महिलाओं को पांच करोड़ एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराने का टारगेट रखा गया
- उज्ज्वला योजना अभी तक 715 जिलों तक ही पहुंच सकी है
-अभी तक इस योजना में 58023370 घरों तक एलपीजी मुहैया कराने का दावा किया गया है
-सरकार एक कनेक्शन पर 16 सौ रुपये की मदद देती है
- देश के अधिकांश मेडिकल कालेजों में बर्न यूनिट तक नहीं है...

डॉ. राजीव बी आहूजा का कहना है कि भारत में आग से मरने वाले लोगों पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जितना कि विदेशों में इस पर काम हुआ है। हमारे यहां अधिकांश मेडिकल कालेजों में बर्न यूनिट तक नहीं है। सामान्य सर्जन को ही बर्न सर्जरी सौंप दी जाती है, यह पूरी तरह गलत है। आग से जलने वाले लोगों का इलाज करने के लिए एक अलग विशेषज्ञता की जरुरत होती है। कम से कम जिला स्तर के अस्पतालों में एक अत्याधुनिक उपकरणों से लैस बर्न यूनिट होनी चाहिए। प्लास्टिक सर्जन की संख्या हमारे देश में न के बराबर है। विभिन्न अस्पतालों में जलने का इलाज करने वाली नर्सें तक नहीं हैं। पीड़ित के रिश्तेदार ही नर्स का काम करते हैं। पोस्ट बर्न मेनेजमेंट सिस्टम अभी तक ज्यादा लोगों को मालूम नहीं है।

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