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झटकाः 4 लाख नौकरियां खा जाएगी सरकार की ये नोटबंदी ?

Thu, 24 Nov 2016 12:57 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 24 Nov 2016 12:57 PM IST
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4 Lakh jobs will lose in Demonetization

केंद्र सरकार के नोटबंदी के फरमान का असर अब उद्योग धंधों और रोजगार पर भी पड़ना शुरू हो गया है। माना जा रहा है ‌कि नोटबंदी के चलते लोगों की खरीद करने की क्षमता घट रही है जिसका सीधा असर बाजार पर भी पड़ेगा। 

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मांग कम होने पर उत्पादन भी घटेगा और उद्योग धंधों में रोजगार भी कम होंगे। खासकर श्रम आधारित उद्योगों जैसे टेक्सटाइल, गारमेंट्स, लेदर और ज्वैलरी आदि पर इसका सीधा असर पड़ेगा। फाइनेंस एक्सप्रेस की खबर के अनुसार उद्योगों की मंदी के इस दौर में चार लाख से ज्यादा लोगों को अपना रोजगार खोना पड़ सकता है। 
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जिनमें ज्यादातर दैनिक मजदूर और अस्‍थायी कर्मियों पर ही इसका असर पड़ना तय है। भुगतान न होने के कारण इन लोगों के लिए अपनी नौकरियां बचाए रखना मुश्किल है। 
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एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नकदी के संकट के कारण काफी संख्या में या तो कामगारों ने नौकरी छोड़ दी हैं अस्‍थायी रूप से फिलहाल काम बंद कर दिया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नोटबंदी के बाद यह शुरूआती आंकलन है असली तस्वीर तो कुछ हफ्तों बाद ही साफ हो पाएगी कि कितने लोगों के रोजगार पर इसका असर पड़ता है।

अधिकतर कामगारों के बैंकों में नहीं है खाते

4 Lakh jobs will lose in Demonetization

इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के उपाध्यक्ष रवि सहगल इस संबंध में एक रोचक बात बताते हैं, वो कहते हैं कि भले ही कुछ कामगारों के बैंक अकाउंट हैं लेकिन वे सीधे खाते में भुगतान का विकल्प पसंद नहीं करेंगे उसकी बड़ी वजह ये है कि खाते में 50 हजार से ज्यादा की रकम जाने पर वह गरीबी रेखा के तहत मिलने वाले लाभ से वंचित हो सकते हैं। जिसके तहत उन्हें मिलने वाली तमाम सब्सिडी भी बंद हो सकती है, ऐसे में कोई क्यों चाहेगा कि वो सीधे खाते में अपनी तनख्वाह ले।

उद्योगों को भी इस बात की चिंता सताने लगी है, यही कारण है कि सोमवार को एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने आर्थिक और औद्योगिक मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान कम उत्पादन की चिंता के बारे में बता दिया गया था। 

बैठक के दौरान ज्यादातर औद्योगिक प्रतिनिधियों ने इस बात के साफ संकेत दिए कि नकदी के संकट के कारण उन्होंने अपना उत्पादन घटाकर आधा कर दिया है या फिर कम करना पड़ा है। 

उन्होंने मांग की कि सरकार हफ्ते में अधिकतम 50 हजार रुपये नकद निकासी की सीमा को और बढ़ा दे जिससे जरूरी व्यापार लेनदेन का संचालन किया जा सके।

रोजाना भुगतान वाले कर्मचारियों की नौकरियों पर आया संकट

4 Lakh jobs will lose in Demonetization

औद्योगिक प्रतिनिधियों के अनुसार मोटे तौर पर तीन करोड़ से ज्यादा कामगार टेक्सटाइल और गारमेंट्स सेक्टर में कार्यरत हैं जिनमें से ज्यादातर को दैनिक या साप्ताहिक मजदूरी के तौर पर भुगतान किया जाता है ऐसे में नोटबंदी के कारण उन लोगों के भुगतान पर संकट खड़ा हो गया है।

इसके चलते काफी संख्या में लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है या वो अपने भाग्य को लेकर संशकित हैं। गारमेंट्स इंडस्ट्री के ज्यादातर कर्मचारी तिरपुर जैसे हब में काम करते हैं जिनमें 70 फीसदी से ज्यादा उत्तर और उत्तर पूर्वी राज्यों से आने वाले हैं।

कुछ ऐसे ही हालात चमड़ा उद्योग के भी हैं, जिनमें से मोटे तौर पर 2.5 लाख में से 20-25 फीसदी कामगार रोजाना भुगतान वाले हैं, सरकार के इस फैसले से उन्हें भी सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा है।

इस उद्योग के लिए यह निर्णय इसलिए भी चिंताजनक है कि 90 फीसदी से ज्यादा उद्योग छोटे और मध्यमवर्ग के हैं। ऐसे में उनका ज्यादातर व्यापार नकदी पर ही टिका होता है, यही हाल आभूषण उद्योग का भी है, जिस पर इस नोटबंदी का ग्रहण साफ दिखाई दे रहा है। इस उद्योग में से 15-20 फीसदी कामगारों को रोजाना भुगतान किया जाता है जो सीधे इस फैसले से प्रभावित हुए हैं।

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