देश में कोरोना के कारण अभी तक 393 डॉक्टरों ने गंवाई जान, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा, देखें पूरी सूची
- विशेषज्ञों के मुताबिक, मरीजों से चार गुना ज्यादा संक्रमण के खतरे में होते हैं उनका इलाज करने वाले डॉक्टर
- केंद्र के डॉक्टरों की मौत के आंकड़ों की जानकारी न होने के इंकार के बाद बिफरी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
विस्तार
कोरोना वायरस मरीजों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार कोरोना के कारण देश में अब तक 393 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा तमिलनाडु के 64 डॉक्टरों ने कोरोना संक्रमण के कारण अपनी जान गंवाई है। इसके बाद आंध्रप्रदेश के 43, कर्नाटक के 42, गुजरात के 39, महाराष्ट्र के 37, पश्चिम बंगाल के 29 और उत्तर प्रदेश के 23 डॉक्टरों को महामारी का शिकार होना पड़ा है। देश की राजधानी दिल्ली में भी एक दर्जन से ज्यादा (13) डॉक्टरों की कोरोना के कारण मौत हो चुकी है।
यह आंकड़ा केवल उन डॉक्टरों का है, जो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से रजिस्टर्ड हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारी संख्या में ऐसे डॉक्टर भी हैं, जो इस संस्था से रजिस्टर्ड हुए बिना भी प्रैक्टिस करते हैं। उनकी मौत के आंकड़ों की ठीक-ठीक जानकारी किसी के पास नहीं है। राज्य स्तर पर भी इस तरह के आंकड़े रखने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यही कारण है कि डॉक्टरों की मौत के आंकड़ों के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजन शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि डॉक्टर देश के बॉर्डर से लेकर सीमा के अंदर तक देशवासियों की सेवा करते हैं, लेकिन इसके बाद भी अगर केंद्र सरकार यह कहती है कि उसके पास डॉक्टरों की मौत का आंकड़ा नहीं है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार को देश के सभी स्वास्थ्यकर्मियों की मौत की जानकारी जुटाकर उन्हें विशेष सम्मान देने की कोशिश करनी चाहिए, जिससे डॉक्टरों को भी लगे कि देश के लोगों की सेवा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को एक पहचान दी जा रही है।
इन डॉक्टरों की वजह से उनके परिवार के लोग भी संक्रमित हो रहे हैं और अनेक जगहों पर उनकी मौत की भी खबरें आई हैं। लेकिन पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में इनकी भी कोई जानकारी नहीं रखी जा रही है। दिल्ली के एम्स अस्पताल के ही सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मी और उनके हजारों परिवार के सदस्य कोरोना के कारण संक्रमित हो चुके हैं।
सुरक्षा के बाद भी संक्रमण की चपेट में क्यों
कोरोना मरीजों का इलाज करने के दौरान डॉक्टर पीपीई किट्स पहनकर काम करते हैं। वे सुरक्षा उपायों के प्रति भी पूरी तरह जागरूक होते हैं। ऐसे में वे संक्रमित कैसे हो जाते हैं? इस सवाल पर राजन शर्मा ने कहा कि अब तक हम केवल संपर्क में आने वाले कारकों की चर्चा करते रहे हैं। अब एयरोसोल से संक्रमण की जानकारी भी सामने आ रही है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में सांस के साथ किसी भी डॉक्टर के संक्रमित होने की आशंका हो सकती है। साथ ही अभी अनेक ऐसे कारक भी सामने आ सकते हैं, जिसके बारे में हमें अभी ठीक-ठीक जानकारी नहीं है।
नर्सों की सेवाओं की पहचान करे सरकार
दिल्ली नर्सेज फेडरेशन के अध्यक्ष एलडी रामचंद्रन ने बताया कि नर्सें संक्रमित लोगों के इलाज से सीधी तौर पर जुड़ी रहती हैं। यही कारण है कि उनके संक्रमित होने की संभावनाएं डॉक्टरों की तुलना में ज्यादा होती हैं। लेकिन पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में भारी संख्या में उनकी मौत भी हुई है। लेकिन अभी राष्ट्रीय स्तर पर उनकी जानकारी नहीं रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित लोगों के इलाज में लगी नर्सों के लिए विशेष पैकेज होना चाहिए और मौत की स्थिति में राष्ट्रीय स्तर पर एक मुआवजा राशि निर्धारित होनी चाहिए।
राज्यवार डॉक्टरों की मौत के आंकड़े
(18 सितंबर 2020 दोपहर 12 बजे तक की जानकारी)
| आंध्रप्रदेश | 43 |
| असम | 10 |
| बिहार | 24 |
| चंडीगढ़ | 03 |
| छत्तीसगढ़ | 04 |
| दिल्ली | 13 |
| गुजरात | 39 |
| हरियाणा | 07 |
| हिमाचल प्रदेश | 02 |
| जम्मू-कश्मीर | 01 |
| झारखंड | 04 |
| कर्नाटक | 42 |
| मध्यप्रदेश | 14 |
| महाराष्ट्र | 37 |
| मेघालय | 01 |
| ओडीशा | 09 |
| पुडुचेरी | 02 |
| पंजाब | 05 |
| राजस्थान | 07 |
| तमिलनाडु | 64 |
| तेलंगाना | 10 |
| उत्तर प्रदेश | 23 |
| पश्चिम बंगाल | 29 |
| कुल | 393 |