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बड़ी जीत: 39 महिला सैन्य अधिकारियों को मिलेगा स्थायी कमीशन, सु्प्रीम कोर्ट ने दिया आदेश 

Fri, 22 Oct 2021 12:18 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Fri, 22 Oct 2021 12:18 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह बताने का भी आदेश दिया है कि किन वजहों से बाकी अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से इनकार कर दिया गया था। 

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39 women military officers will get permanent commission, the Supreme Court ordered
भारतीय सेना की महिला अधिकारी - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को सात कार्यदिवस के भीतर 39 महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने यह आदेश तब दिया जब केंद्र सरकार ने बताया कि अदालती आदेश के तहत 71 सैन्य अधिकारियों में से 39 अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के योग्य पाया गया है। जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने रक्षा मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए इन सभी 39 महिला अधिकारियों को एक नवंबर तक स्थायी कमीशन प्रदान करने के लिए कहा है। 

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शुक्रवार को सुनवाई की शुरुआत में केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि 72 महिला आवेदकों में से एक ने खुद सेवामुक्त होने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि बाकी बचे 71 महिला अधिकारियों में से सात को चिकित्सकीय रूप से अनफिट करार दिया गया जबकि 25 अधिकारियों को अनुशासन सहित अन्य कारणों के कारण स्थायी कमीशन के योग्य नहीं माना गया। जैन ने बताया कि इन 25 महिला अधिकारियों को पुरुष सैन्य अधिकारियों के लिए अपनाए जाने वाले मानदंडों के अनुरूप ही स्थायी कमीशन के लिए योग्य नहीं माना गया।
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उन्होंने कहा कि इसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं किया गया है। बाकी बच्चे 39 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने के योग्य माना गया है। पीठ ने जैन की बातों को रिकॉर्ड पर लेते हुए 39 महिला अधिकारियों को सात कार्य दिवस के भीतर स्थायी कमीशन प्रदान करने का आदेश दिया। साथ ही पीठ ने केंद्र से कहा कि वह एक चार्ट के जरिए यह बताएं कि जिन 25 अधिकारियों को स्थायी कमीशन के लिए योग्य नहीं माना गया उसके पीछे आधार क्या था?
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मालूम हो कि शीर्ष अदालत महिला अधिकारियों द्वारा दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। गत मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल नितीशा के मामले में कहा था कि 60 फीसदी कट-ऑफ को संतुष्ट करने वाली सभी महिला अधिकारी स्थायी कमीशन की हकदार है, बशर्ते वे चिकित्सा मानदंडों आदि को पूरा करती हो। लेकिन याचिकाकर्ता महिला अधिकारियों का कहना था कि 60 फीसदी कट ऑफ की शर्त करने के बावजूद उन्हें स्थायी कमीशन प्रदान किया जा रहा है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गत एक अक्टूबर को अगले आदेश तक उनकी सेवामुक्ति पर रोक लगा दी थी और सरकार को फिर से इस मसले पर विचार करने के लिए कहा था।

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