अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्षकारों का आरोप, केवल हमसे किए जा रहे सवाल, हिंदू पक्ष से नहीं
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सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों ने आरोप लगाया कि इस मामले में केवल हमसे ही सवाल किये जा रहे हैं, हिंदू पक्ष से सवाल नहीं किए जा रहे हैं। दुर्गा पूजा को लेकर हुई छुट्टियों के बाद सोमवार को इस मामले में 38वें दिन की सुनवाई हुई और मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने दलीलें रखी।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ के सामने वकील राजीव धवन ने कहा कि माननीय न्यायाधीश ने दूसरे पक्ष से सवाल नहीं पूछे। सारे सवाल सिर्फ हमसे ही किये गये हैं। निश्चित ही हम उनका जवाब देंगे। वहीं, रामलला का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह पूरी तरह से अनावश्यक टिप्पणी है।
धवन ने यह टिप्पणी उस वक्त की, जब संविधान पीठ ने कहा कि विवादित स्थल पर लोहे की ग्रिल लगाने का मकसद बाहरी बरामद से भीतरी बरामदे को अलग करना था। कोर्ट ने कहा कि लोहे का ग्रिल लगाने का मकसद हिंदुओं और मुसलमानों को अलग-अलग करना था। यह तथ्य सराहनीय है कि हिंदू बाहरी बरामदे में पूजा करते थे जहां राम चबूतरा, सीता रसोई, भंडार गृह थे।
धवन ने कहा- हिंदुओं को केवल पूजा का अधिकार, जमीन का नहीं
मुस्लिम पक्षकारों की ओर से वकील धवन ने कहा कि हिंदुओं को सिर्फ अंदर प्रवेश करने और स्थल पर पूजा अर्चना करने का अधिकार था और इसका मतलब यह नहीं है कि विवादित संपत्ति पर उनका मालिकाना हक था। सुप्रीम कोर्ट ने धवन के इस कथन का संज्ञान लिया।
पीठ ने सवाल किया कि जैसा कि आपने कहा कि उनके पास प्रवेश और पूजा अर्चना का अधिकार था, तो क्या यह आपके मालिकाना अधिकार को कमतर नहीं करता। पीठ ने यह भी कहा कि संपत्ति पर पूर्ण स्वामित्व के मामले मे क्या किसी तीसरे पक्ष को प्रवेश और पूजा अर्चना का अधिकार दिया जा सकता है!
हिंदू पक्षकारों के साथ सुब्रमण्यन स्वामी के बैठने पर जताई आपत्ति
मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने कोर्ट में हिंदू पक्षकारों के साथ पहली कतार में सुब्रह्मण्यन स्वामी के बैठने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विजिटर को गैलरी से आगे आने की अनुमति नहीं है और नियम सबके लिए एक होने चाहिए, फिर इन्हें आगे कैसे बैठने दिया गया।
इस पर सुब्रह्मण्यन स्वामी चुप रहे और चीफ जस्टिस भी कुछ नहीं बोले। धवन अयोध्या केस में अपनी दलीलें रखने लगे।
मालूम हो कि 17 अक्तूबर तक इस मामले में सुनवाई होनी है। यानी कि तबतक इस मामले में कुल 41 दिनों की सुनवाई पूरी हो जाएगी और ठीक एक महीने बाद 17 नवंबर को इस मामले में फैसला आने की उम्मीद है। इसी दिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई सेवानिवृत्त होने वाले हैं।