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CJI BR Gavai: 'लोकतंत्र के तीनों स्तंभ समान', प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने पर सीजेआई गवई ने जताई नाराजगी
Mon, 19 May 2025 07:31 AM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 19 May 2025 07:31 AM IST
सार
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को उसके समक्ष लंबित किसी भी मामले या मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक समझे जाने वाले आदेश पारित करने की शक्ति प्रदान करता है। यह न्यायालय को व्यक्तियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आदेश देने की भी अनुमति देता है।
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CJI BR Gavai
- फोटो : PTI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद पहली बार गृह राज्य महाराष्ट्र पहुंचे सीजेआई बीआर गवई ने प्रोटोकॉल का पालन न करने पर नाराजगी जताई। सीजेआई की अगवानी के लिए राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक या मुंबई पुलिस आयुक्त में से कोई भी मौजूद नहीं था। 14 मई को सीजेआई के रूप में शपथ लेने वाले जस्टिस बीआर गवई महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल की ओर से आयोजित सम्मान समारोह के लिए मुंबई में थे। महाराष्ट्र से आने वाले मुख्य न्यायाधीश गवई, केजी बालाकृष्णन के बाद भारतीय न्यायपालिका का नेतृत्व करने वाले दूसरे दलित हैं।
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चैत्यभूमि में नजर आए तीनों अधिकारी
हालांकि, सीजेआई की टिप्पणी के कुछ घंटों बाद ही तीनों शीर्ष अधिकारी उस समय मौजूद नजर आए, जब न्यायमूर्ति गवई प्रतिष्ठित समाज सुधारक और भारत के संविधान के मुख्य वास्तुकार को श्रद्धांजलि देने के लिए दादर में डॉ. बीआर आंबेडकर के अंतिम संस्कार स्थल चैत्यभूमि गए थे।
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बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एवं गोवा ने आयोजित किया था सम्मान समारोह
दरअसल, 52वें सीजेआई के रूप में शपथ लेने के बाद जस्टिस गवई रविवार को बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एवं गोवा की ओर से आयोजित अपने सम्मान समारोह में पहुंचे थे। सीजेआई ने कहा कि वह ऐसे छोटे मुद्दों पर ध्यान नहीं देना चाहते। लेकिन जब किसी अंग या संस्था का प्रमुख पहली बार राज्य में आ रहा हो, खासकर जब वह भी उसी राज्य का हो, तो उनके साथ किया गया व्यवहार सही था या नहीं, यह उन्हें स्वयं सोचना चाहिए।
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संविधान सर्वोच्च... सभी स्तंभों को मिलकर काम करना चाहिए
सीजेआई गवई ने कार्यक्रम में कहा कि संविधान सर्वोच्च है। इसके सभी स्तंभों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे खुशी है कि देश न केवल मजबूत हुआ है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक मोर्चों पर भी विकसित हुआ है। उन्होंने कहा, न तो न्यायपालिका, न कार्यपालिका और न ही विधायिका सर्वोच्च है, बल्कि भारत का संविधान सर्वोपरि है और तीनों अंगों को उसके अनुसार काम करना होगा।