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26/11 की वो स्याह रात और कंमाडो की आपबीती, मंत्रियों के वायदे आज तक पूरे नहीं हुए

Sun, 26 Nov 2017 08:55 AM IST
प्रेमचंद पालमी/अमर उजाला
प्रेमचंद पालमी/अमर उजाला Updated Sun, 26 Nov 2017 08:55 AM IST
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26/11 Mumbai terror attacks: Commando Sunil still Do not forget that accident
26/11 मुंबई हमले के नौ साल

26/11 मुंबई हमले को एक दशक होने को है, लेकिन आज भी इसे याद कर रूह कांप उठती है। एनएसजी के ऑपरेशन में शामिल पटौदी के सफेदा नगर के सुनील आज भी उस घटना को याद करते हैं।

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अमर उजाला संवाददाता से बातचीत में सुनील ने बताया कि 26/11 में सर्च ऑपरेशन के दौरान ताज होटल में मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के साथ कमांडो साथियों के साथ आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दे रहे थे। मेजर संदीप उन्नीकृष्णन आतंकियों की गोली लगने से शहीद हो गए थे, तभी दो गोलियां आकर मेरे कूल्हे में लगीं और मैं घायल हो गया।
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उन्होंने बताया कि 26 नवंबर, 2008 की रात मुंबई हमले की सूचना जैसे ही सरकार को मिली थी, तो तुरंत एनएसजी मानेसर से विमान आईएल-76 में सवार होकर मुंबई के लिए करीब 450 कमांडो दो बार में पहुंचे थे।
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सुनील यादव ने बताया कि ताज होटल में मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के साथ चार कमांडो ने ऑपरेशन संभाला। 27 नवंबर को मुंबई में सुबह कमान संभालने के बाद लगभग 96 घंटे के सर्च ऑपरेशन में उन्होंने ताज होटल में 4 आतंकी, ओबरॉय होटल में 4 आतंकी तथा नरीमन हाउस में 2 आतंकियों को मार गिराया। इसके बाद एनएसजी कमांडो ने फतह हासिल कर ली।


कमांडो सुनील यादव ने बताया कि इस ऑपरेशन में मुझे दो गोलियां लगी थीं। गोलियां लगने के बाद घायल अवस्था में मुंबई अस्पताल में लगभग एक माह 10 दिन तक रहा। उसके बाद ही पटौदी अपने गांव में लौटा। जहां पर राज्य व केंद्र सरकार के मंत्रियों ने आकर अनेक वायदे किए थे, लेकिन वह आज तक पूरे नहीं किए हैं। कमांडो सुनील ने बताया कि जबकि मैं पिछले वर्ष ही 31 अक्तूबर, 2016 को सेवानिवृत्त हो चुका हूं। 

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आज तक न तो केंद्र सरकार से ही कुछ सम्मान के रूप में मिला है और न ही राज्य सरकार ने कुछ दिया है। उन्होंने कहा कि घायल हालत में जब मैं घर पर रहा था, तब तो हर रोज कोई न कोई मंत्री या विधायक आकर कुछ न कुछ वायदे जरूर कर जाते थे, लेकिन लौटकर आज तक कोई नहीं आया है। राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2009 में बहादुरी प्रशंसा पत्र ही देकर इतिश्री कर ली गई, जबकि मुझे बेस्ट कमांडो का भी खिताब मिला हुआ है। उस मेहनत का भी कोई फायदा नहीं मिला।

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